दिल्ली में सोनिया गांधी मंदिर मार्ग थाने पहुंचीं, जहां प्रियंका गांधी को रिहा कर दिया गया है, जबकि राहुल गांधी और अखिलेश यादव को कुछ ही देर में दिल्ली पुलिस कागज़ी कार्रवाई पूरी करने के बाद छोड़ने वाली है।
पुलिस मुख्यालय में हुई बैठक
घटनाक्रम की शुरुआत नई दिल्ली डीसीपी ऑफिस में हुई एक अहम बैठक से हुई, जिसमें दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और स्पेशल कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर देवेश श्रीवास्तव ने सभी स्पेशल कमिश्नर के साथ मौजूदा हालात पर चर्चा की। बैठक के बाद पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार वहां से निकल गए, जबकि बाकी स्पेशल कमिश्नर उस वक्त भी बैठक में मौजूद थे। इसी बैठक में यह तय हुआ कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत हिरासत में लिए गए सभी नेताओं को कागज़ी औपचारिकताएं पूरी होते ही रिहा कर दिया जाएगा।
65 डीपी एक्ट में हुई कार्रवाई
कांग्रेस के सभी नेताओं को दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 यानी 65 DP Act के तहत बुक किया गया है। इस धारा के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति किसी पुलिस अधिकारी के दिए गए उचित और वैध निर्देश मानने से इनकार करता है, उसका विरोध करता है या उसे अनदेखा करता है, तो पुलिस अधिकारी उसे मौके से हटा सकता है और बिना किसी वारंट के हिरासत में ले सकता है। इसी प्रावधान के आधार पर विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया था।
लोक कल्याण मार्ग पर प्रदर्शन और हिरासत
दरअसल विपक्ष के कुछ नेता लोक कल्याण मार्ग पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर थोड़ी देर पहले पुलिस स्टेशन लाया था। इसी सिलसिले में कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी खुद मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचीं, ताकि हिरासत में लिए गए नेताओं का हाल जान सकें और रिहाई की प्रक्रिया पर नजर रख सकें।
सचिन पायलट ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने बताया कि लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता (LoP) समेत करीब 100 से 150 सांसद एक मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने एक दिन पहले युवाओं के साथ हुए बर्ताव की कड़ी निंदा की, जिसमें छात्रों पर लाठीचार्ज और हमले की बात कही गई। पायलट के मुताबिक, सरकार को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेना चाहिए था, छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेनी चाहिए थी और पेपर लीक मामले पर स्पष्ट बयान देना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय कई नेताओं को वहां से हटा दिया गया। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता को जबरन हटाए जाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि जिस सड़क का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया, वहां राहुल गांधी जन-कल्याण के लिए ही मौजूद थे। पायलट ने इसे लोकतंत्र के लिए एक काला दिन बताया और कहा, "जिस तरह राहुल गांधी को घसीटा गया, वह बर्दाश्त के बाहर है।" उन्होंने कहा कि लोग नाराज़ हैं और न्याय चाहते हैं, और कांग्रेस न्याय दिलाकर रहेगी।



















