खातों पर बैंक की कार्रवाई
पश्चिम बंगाल की पार्टी TMC के लिए मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। ताज़ा घटनाक्रम में HDFC बैंक ने TMC के तीन बैंक खातों पर रोक लगा दी है। इन खातों में कुल 440 करोड़ रुपये की बड़ी रकम जमा बताई जा रही है। यह कार्रवाई तब हुई जब अरूप विश्वास ने खुद को कोषाध्यक्ष बताते हुए बैंक को पत्राचार किया और लेन-देन पर रोक लगाने की मांग की। इसके अलावा, TMC के बागी खेमे के विधायकों ने भी विधाननगर पुलिस की साइबर सेल के जरिए खातों को फ्रीज करने का दबाव बनाया था।
विवाद की असली वजह
इस पूरे मामले में तकनीकी पेच फंसा हुआ है। TMC का दावा है कि अरूप विश्वास को 5 जून को ही कोषाध्यक्ष पद से हटा दिया गया था और उनकी जगह शुभाशीष चक्रवर्ती को जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, बैंक को लिखे गए 12 जून के पत्र में अरूप विश्वास ने अभी भी खुद को वैध कोषाध्यक्ष ही दर्शाया था। इसी परस्पर विरोधी दावों के कारण बैंक ने खातों को फ्रीज करने का निर्णय लिया है।
सियासी बयानबाजी
विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय ने इस मुद्दे पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि इन खातों में जमा धन की जांच होनी चाहिए, क्योंकि यह कटमनी या गबन का पैसा हो सकता है। बागी नेता संदीपन साहा ने भी जांच की मांग का समर्थन किया है। वहीं, TMC विधायक कुणाल घोष ने बागी नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि क्या वे चुनाव के दौरान इन खातों से प्राप्त धन को वापस करने के लिए तैयार हैं। कुणाल घोष का तर्क है कि यदि इन खातों में अवैध धन था, तो उन सभी विधायकों की सदस्यता पर भी संकट आ सकता है जिन्होंने उसी फंड के सहारे चुनाव जीता था।













