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TMC में फूट गहराई: अभिषेक बनर्जी के घर पुलिस, मदन मित्रा के सात ठिकानों पर ED का छापा, सोमवार को स्पीकर से मिलेंगे बागी सांसदराजनीति
13 जून 2026, 9:28 am (137 दिन पहले)· 0

TMC में फूट गहराई: अभिषेक बनर्जी के घर पुलिस, मदन मित्रा के सात ठिकानों पर ED का छापा, सोमवार को स्पीकर से मिलेंगे बागी सांसद

तृणमूल कांग्रेस में बगावत चरम पर है — काकोली घोष दस्तिदार के नेतृत्व वाला गुट खुद को 'असली TMC' बता रहा है, जबकि अभिषेक बनर्जी के घर पुलिस और विधायक मदन मित्रा के ठिकानों पर ED की छापेमारी ने हालात और गरमा दिए हैं।

बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर अंदरूनी टकराव से जूझ रही है। बरसों तक राज्य की राजनीति पर एकछत्र पकड़ रखने वाली इस पार्टी के भीतर अब खुद ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती देने वाली आवाज़ें खुलकर सामने आ रही हैं। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि पार्टी के कई सांसद खुद को ही 'असली TMC' घोषित करने की तैयारी कर रहे हैं।

एक ही दिन में तीन झटके

शनिवार की सुबह माहौल तब और तनावपूर्ण हो गया जब अभिषेक बनर्जी के घर पुलिस पहुंच गई। इसके समानांतर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नगर पालिका भर्ती घोटाले की जांच को आगे बढ़ाते हुए तृणमूल विधायक और पूर्व मंत्री मदन मित्रा से जुड़े सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। राजनीतिक उठापटक के बीच इन कार्रवाइयों ने पार्टी की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।

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संगठन से सड़क तक पहुंचा असंतोष

यह बगावत सिर्फ संगठन के भीतर की खींचतान भर नहीं रह गई है। सांसद, विधायक और वरिष्ठ नेता — हर स्तर पर नाराज़गी साफ दिख रही है। कई नेता सार्वजनिक मंचों से अभिषेक बनर्जी के काम करने के तरीके पर सीधे सवाल खड़े कर चुके हैं। पार्टी के भीतर की रस्साकशी अब खुली लड़ाई का रूप ले चुकी है, और सबसे बड़ा सवाल यही उभरकर सामने आया है — असली तृणमूल कांग्रेस कौन है और पार्टी की कमान आखिर किसके हाथ रहेगी?

कल्याण बनर्जी का खुला हमला

संकट को और गहरा करने का काम वरिष्ठ नेता और वकील कल्याण बनर्जी ने किया, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से अभिषेक बनर्जी पर हमला बोला। उन्होंने अभिषेक पर अहंकारी रवैये का आरोप लगाते हुए ऐलान कर दिया कि अब वह उनका कानूनी प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने ममता बनर्जी के सामने भी दो-टूक चुनौती रख दी कि पार्टी को अब साफ करना होगा कि वह उनके साथ है या अभिषेक बनर्जी के साथ।

काकोली घोष दस्तिदार का गुट और 'असली TMC' का दावा

दूसरी ओर, काकोली घोष दस्तिदार की अगुवाई में एक बड़ा धड़ा खुलकर मैदान में आ गया है। इस गुट का दावा है कि करीब 20 सांसद उनके पाले में हैं और वही तृणमूल कांग्रेस का असली चेहरा हैं। यही गुट सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर आधिकारिक मान्यता की मांग रखेगा। इसी वजह से यह बैठक महज औपचारिकता नहीं, बल्कि ममता बनर्जी की राजनीति की सबसे कड़ी परीक्षा मानी जा रही है।

दिल्ली में बागियों की सक्रियता

सूत्रों के मुताबिक पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी रविवार को दिल्ली में इन बागी सांसदों से मुलाकात करने वाले हैं। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाज़ार और गर्म कर दिया है। माना जा रहा है कि बीजेपी भी पूरे प्रकरण पर बारीकी से नज़र गड़ाए हुए है।

काकोली घोष दस्तिदार पहले ही इशारा कर चुकी हैं कि ज़रूरत पड़ने पर उनका गुट बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA को समर्थन देने को तैयार है। यही कारण है कि यह विवाद अब तृणमूल का घरेलू झगड़ा न रहकर राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

लगातार छूटते साथी

बीते कुछ दिनों में पार्टी को एक के बाद एक झटके लगे हैं। राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और संसद, दोनों से इस्तीफा दे दिया। उनसे पहले सुखेंदु शेखर राय भी पार्टी का साथ छोड़ चुके थे। इसके बाद कई सांसद बागी खेमे की ओर झुकते दिखाई दिए। बताया जा रहा है कि बागी गुट में यूसुफ पठान, सायोनी घोष, रचना बनर्जी, देव अधिकारी, सताब्दी रॉय और माला रॉय जैसे जाने-पहचाने नाम शामिल हैं — यानी असंतोष अब किसी छोटे दायरे तक सीमित नहीं रहा।

क्या ममता संभाल पाएंगी कमान?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट ममता बनर्जी के लिए केवल संगठनात्मक चुनौती नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक विरासत से जुड़ा सवाल बन गया है। अगर बड़ी तादाद में सांसद अलग गुट खड़ा कर लेते हैं तो इसका सीधा असर 2026 के बंगाल चुनावों पर पड़ सकता है। फिलहाल सबकी निगाहें सोमवार को ओम बिरला से होने वाली मुलाकात पर टिकी हैं — यही बैठक तय करेगी कि तृणमूल कांग्रेस की असली ताकत किसके पास है और बंगाल की सियासत किस करवट बैठेगी।

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