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तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों पर दल-बदल कानून के तहत नोटिस जारी, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बीच बढ़ा सियासी तनावराजनीति
27 अग॰ 2026, 2:21 pm (61 दिन पहले)· 1

तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों पर दल-बदल कानून के तहत नोटिस जारी, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बीच बढ़ा सियासी तनाव

लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को अयोग्यता याचिकाओं पर 7 दिनों के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने का नोटिस दिया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच सुप्रीम कोर्ट ने समयबद्ध कार्रवाई पर जोर दिया है, वहीं बीजेपी नेता दिलीप घोष ने बागी नेताओं पर तंज कसा है।

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 बागी सांसदों को औपचारिक नोटिस जारी किया। 25 अगस्त की तारीख वाले इन नोटिसों के जरिए सभी संबंधित सांसदों को अयोग्यता याचिकाओं पर अगले सात दिनों के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है। यह समन संविधान की दसवीं अनुसूची में उल्लिखित दल-बदल विरोधी नियमों के तहत दायर याचिकाओं पर आधारित है, जिससे इन जनप्रतिनिधियों की संसद सदस्यता पर संकट गहरा गया है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और लोकसभा अध्यक्ष का कदम

यह संपूर्ण मामला तृणमूल कांग्रेस के सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा हुआ है। बागी सांसदों द्वारा तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर जीत हासिल करने के बाद एनसीपीआई का रुख करने को पार्टी ने संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन माना है। अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित अयोग्यता प्रक्रिया में हो रही देरी को देखते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था, ताकि मामले का जल्द से जल्द निपटारा कराया जा सके।

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सर्वोच्च न्यायालय में 25 अगस्त को इस महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की समीक्षा की। सुनवाई के दौरान लोकसभा अध्यक्ष का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को अवगत कराया कि संबंधित 20 सांसदों को पहले ही नोटिस भेजे जा चुके हैं। इस पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल नोटिस देना ही पर्याप्त कदम नहीं है, बल्कि मुख्य विषय यह है कि यह पूरी अयोग्यता प्रक्रिया एक निश्चित समय सीमा के भीतर कब संपन्न होगी।

दिलीप घोष का तंज और क्षेत्रीय राजनीति पर हमला

संसदीय नोटिस जारी होने के तुरंत बाद बीजेपी नेता दिलीप घोष ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए बागी सांसदों और एनसीपीआई पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से यह राजनीतिक फेरबदल हुआ है, वैसे राजनीति नहीं की जाती। दिलीप घोष के अनुसार, एनसीपीआई एक ऐसा क्षेत्रीय दल है जिसके नाम से पहले लोग पूरी तरह अनजान थे। उन्होंने व्यंग्य करते हुए टिप्पणी की कि किसी के भी पार्टी की टी-शर्ट पहन लेने मात्र से नया राजनीतिक दल अस्तित्व में नहीं आ जाता।

दिलीप घोष ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए आरोप लगाया कि कई नेता केवल अपनी साख बचाने के लिए ऐसी नई जगहों का सहारा ले रहे हैं। उनका मानना था कि कुछ लोग व्यक्तिगत लाभ के लिए नए संगठन खड़े करते हैं और अन्य लोग अपने राजनीतिक अस्तित्व को बनाए रखने के लिए उनका समर्थन लेने लगते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकार की अवसरवादी राजनीति से न तो जनता को कोई लाभ पहुंचेगा और न ही देश का कोई भला होगा।

सवाल-जवाब

लोकसभा अध्यक्ष ने बागी सांसदों को कितने दिनों में जवाब देने का निर्देश दिया है?
लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।
अभिषेक बनर्जी ने किस कानूनी आधार पर अयोग्यता की मांग की है?
अभिषेक बनर्जी ने संविधान की दसवीं अनुसूची में निहित दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के तहत बागी सांसदों की अयोग्यता की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई किस पीठ ने की?
इस याचिका पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने 25 अगस्त को सुनवाई की।
बीजेपी नेता दिलीप घोष ने एनसीपीआई पर क्या टिप्पणी की?
दिलीप घोष ने एनसीपीआई को एक अनजान क्षेत्रीय दल बताते हुए तंज कसा कि केवल टी-शर्ट पहनने से राजनीतिक पार्टी नहीं बनती और लोग चेहरा बचाने के लिए वहां शरण ले रहे हैं।
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