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उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 की बिसात: बुलडोजर की दहाड़ के सामने अखिलेश यादव की आम वाली सियासत का नया दांवराजनीति
8 जुल॰ 2026, 3:20 pm (21 दिन पहले)· 2

उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 की बिसात: बुलडोजर की दहाड़ के सामने अखिलेश यादव की आम वाली सियासत का नया दांव

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है, जहां एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सख्त कानून-व्यवस्था के साथ मैदान में हैं, वहीं अखिलेश यादव आम बांटकर एक नया सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। एक तरफ जहां सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरी ताकत के साथ मोर्चा संभाल लिया है, वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी चुनावी मैदान में पूरी सक्रियता के साथ उतर चुके हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के दौरों के दौरान समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। राज्य की कानून-व्यवस्था और भू-माफियाओं के खिलाफ उनका कड़ा रवैया एक बार फिर अपने चरम पर दिखाई दिया। इसके विपरीत, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इन दिनों एक अलग ही अंदाज में नजर आ रहे हैं। वे बेहद शांत और मुस्कुराते हुए जनता तथा अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच आम की टोकरी बांटकर एक नया सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की इस राजनीतिक बिसात पर एक तरफ जहां कड़े और आक्रामक तेवर हैं, वहीं दूसरी तरफ आम की मिठास के जरिए दिलों को जीतने की कोशिश की जा रही है। इस राजनीतिक परिदृश्य के कई गहरे मायने हैं और दोनों ही दलों के पास अपने-अपने मजबूत तर्क और चुनावी समीकरण हैं।

प्रतापगढ़ और सुलतानपुर की धरती से कड़ा संदेश

अयोध्या में हाल के दिनों में सामने आए चंदा चोरी के घटनाक्रमों के बाद भारतीय जनता पार्टी किसी भी कीमत पर बैकफुट पर जाने के मूड में नहीं दिख रही है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कमान अपने हाथों में ले ली है और वे लगातार समाजवादी पार्टी पर तीखे हमले बोल रहे हैं। प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के दौरों पर मुख्यमंत्री का वही पुराना और आक्रामक अंदाज देखने को मिला जिसे लोग अक्सर बुलडोजर नीति के रूप में जानते हैं। सुलतानपुर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि समाजवादी पार्टी से जुड़े जितने भी भू-माफिया हैं, वे अब कानून के डर से थर-थर कांप रहे हैं और आत्मसमर्पण करते हुए गिड़गिड़ा रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह बयान केवल एक चुनावी रैली का भाषण मात्र नहीं है, बल्कि यह बीजेपी के उस मूल एजेंडे को फिर से स्थापित करने की कोशिश है जो अपराधियों के खिलाफ शून्य सहिष्णुता यानी जीरो टॉलरेंस और सख्त कानून-व्यवस्था पर आधारित है। इस रणनीति के जरिए सत्ताधारी दल यह संदेश देना चाहता है कि चुनावी नतीजे चाहे जो भी रहे हों, राज्य में अपराधियों और अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सरकार की सख्त कार्रवाई में रत्ती भर भी ढील नहीं दी जाएगी।

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मलिहाबादी आमों के जरिए अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति

जहां एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनसभाओं में गरज रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अखिलेश यादव का एक बेहद ही शांत और गंभीर अंदाज देखने को मिल रहा है। अखिलेश यादव इन दिनों लखनऊ में मलिहाबादी आमों की टोकरियां बांटते और शुभचिंतकों से उपहार स्वीकार करते हुए नजर आ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि बीते रविवार को खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और दोनों उप-मुख्यमंत्रियों के साथ उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास पर मलिहाबादी आम का स्वाद चखा था। इसके ठीक बाद अखिलेश यादव ने भी मलिहाबादी आमों को अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं में वितरित करना शुरू कर दिया। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए मलिहाबाद के स्थानीय किसानों ने अखिलेश यादव को विशेष रूप से 27 पेटी आम भेंट स्वरूप दिए हैं। अखिलेश यादव की इस आम पॉलिटिक्स को राजनीतिक हलकों में बेहद चतुराई भरा कदम माना जा रहा है। यह दरअसल उनके पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले के साथ-साथ किसान-समर्थक छवि को मजबूत करने के अभियान का हिस्सा है। इस पूरी कवायद के जरिए समाजवादी पार्टी यह दिखाना चाहती है कि वे राज्य के बुनियादी मुद्दों, मेहनती किसानों और आम नागरिकों के साथ सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। अखिलेश यादव बिना किसी आक्रामक बयानबाजी के, बेहद सहज रहकर सत्ताधारी दल की राष्ट्रवाद और सख्त प्रशासन की राजनीति के समानांतर अपनी एक नरम और सबको साथ लेकर चलने वाली राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं।

दोनों पक्षों की चुनावी रणनीति और दांव-पेंच

भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट मानना है कि उत्तर प्रदेश में विकास की तेज रफ्तार, जैसे कि नए एक्सप्रेसवे का निर्माण और अयोध्या से कनेक्टिविटी का विस्तार, और अपराध से मुक्त समाज ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। योगी आदित्यनाथ अपराधियों पर कड़ा प्रहार करके अपने पारंपरिक वोट बैंक को यह अटूट भरोसा दिलाना चाहते हैं कि राज्य में कानून का शासन ही सर्वोपरि रहेगा। दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी और उनके मुखिया अखिलेश यादव पूरी तरह से जनमुद्दों, किसानों और पीडीए के त्रिकोण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी अयोध्या के चुनावी नतीजों के बाद किसी भी तरह के अति-उत्साह से बचते हुए जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ को और मजबूत करने में जुटी हुई है। स्थानीय स्तर पर आम लोगों और किसानों को तरजीह देना, बेरोजगारी और बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दों को मुखरता से उठाना उनकी इस पूरी रणनीति का मुख्य हिस्सा है। वे जनता के सामने खुद को एक सकारात्मक और संवेदनशील विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।

धारणा की जंग में तब्दील होता चुनावी मुकाबला

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का यह पूरा मुकाबला अब केवल बयानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह परसेप्शन यानी जनता के बीच एक खास धारणा बनाने की जंग बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भली-भांति जानते हैं कि साल 2027 की सत्ता का रास्ता प्रतापगढ़, सुलतानपुर और अवध के इसी महत्वपूर्ण इलाके से होकर गुजरेगा। यही वजह है कि वे इस क्षेत्र में लगातार नई विकास परियोजनाओं की सौगात दे रहे हैं और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार किए हुए हैं। दूसरी तरफ, अखिलेश यादव मलिहाबाद के प्रसिद्ध आमों की मिठास के सहारे किसानों और ग्रामीण मतदाताओं के दिलों में अपनी जगह बनाए रखना चाहते हैं। वे इसके जरिए एक मौन संदेश दे रहे हैं कि सत्ता की कड़वाहट और प्रशासनिक सख्ती के बीच वे जनता के साथ मिठास और खुशियां बांटने के लिए खड़े हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति इस समय एक बेहद ही रोमांचक मोड़ पर आ पहुंची है। जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैलियों में उमड़ रही भीड़ और अपराधियों पर उनके सख्त प्रहारों से सत्तापक्ष के कार्यकर्ताओं में नया जोश भर रहा है, वहीं अखिलेश यादव की यह अनूठी मैंगो डिप्लोमेसी और शांत रणनीति विपक्ष को एक नया और प्रभावी रास्ता दिखा रही है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की जनता बुलडोजर की दहाड़ पर अपना भरोसा जताती है या फिर आम की मिठास को गले लगाती है। हालांकि, इसमें कोई दोराय नहीं है कि उत्तर प्रदेश की यह चुनावी जंग आने वाले दिनों में और भी ज्यादा कांटे की होने वाली है।

सवाल-जवाब

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'आम पॉलिटिक्स' क्या है?
यह समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव की एक रणनीति है, जिसके तहत वे कार्यकर्ताओं को मलिहाबादी आम बांटकर अपनी किसान-हितैषी और समावेशी छवि को मजबूत कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतापगढ़ और सुलतानपुर में क्या संदेश दिया?
उन्होंने अपराधियों और अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सरकार के सख्त रुख को दोहराया और समाजवादी पार्टी से जुड़े भू-माफियाओं पर कानून के शिकंजे की बात कही।
अखिलेश यादव का 'पीडीए' फॉर्मूला क्या है?
पीडीए का मतलब पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक है। अखिलेश यादव इसी सामाजिक समीकरण के जरिए आगामी चुनावों में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं।
मलिहाबादी आमों की 27 पेटियों का क्या महत्व है?
मलिहाबाद के किसानों ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों के प्रतीक के तौर पर अखिलेश यादव को विशेष रूप से 27 पेटियां आम उपहार में दी हैं।
2027 के चुनाव के लिए बीजेपी का मुख्य एजेंडा क्या है?
बीजेपी राज्य में कानून का शासन बनाए रखने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति, नए एक्सप्रेसवे के निर्माण और अयोध्या कनेक्टिविटी जैसी विकास परियोजनाओं पर भरोसा कर रही है।
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