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उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 से पहले असदुद्दीन ओवैसी की चेतावनी, अखिलेश यादव को दिया गठबंधन का प्रस्तावराजनीति
27 अग॰ 2026, 10:50 pm (15 दिन पहले)· 2

उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 से पहले असदुद्दीन ओवैसी की चेतावनी, अखिलेश यादव को दिया गठबंधन का प्रस्ताव

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को हाथ मिलाने की सलाह दी है। उन्होंने चेताया कि अगर अखिलेश ने अब भी गठबंधन नहीं किया तो राज्य में उनका हश्र बिहार के तेजस्वी यादव जैसा हो सकता है।

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं। राज्य में मुस्लिम मतदाताओं को साधने की होड़ के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बड़ा दांव खेला है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने चुनावी गठबंधन का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही ओवैसी ने कड़े शब्दों में आगाह किया है कि यदि अखिलेश यादव ने समय रहते उनके साथ हाथ नहीं मिलाया, तो उत्तर प्रदेश के नतीजों में उनका हश्र वही होगा जो बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव का हुआ था।

सपा और कांग्रेस के मुस्लिम प्रेम को बताया छलावा

अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए ओवैसी ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों पर हुए विभिन्न अत्याचारों के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी समान रूप से उत्तरदायी हैं। ओवैसी के अनुसार, कुछ राजनीतिक दल खुद को मुस्लिम वोट बैंक का एकतरफा ठेकेदार मानते हैं, परंतु जब इस समुदाय के अधिकारों की रक्षा करने की बात आती है, तो वे खामोशी इख्तियार कर लेते हैं और अपने बंगलों में सिमट जाते हैं।

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कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए ओवैसी ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी का मुस्लिम प्रेम महज एक नौटंकी है। इससे पहले बुधवार को ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में स्वतंत्र मुस्लिम नेतृत्व तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया था, जिस पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे बीजेपी की मदद करने का प्रयास करार दिया था। इस पर ओवैसी ने पलटवार करते हुए कहा कि दोनों ही दल वास्तव में अल्पसंख्यकों के सबसे बड़े विरोधी हैं और वे कभी नहीं चाहते कि मुस्लिम समुदाय का कोई स्वतंत्र नेता आगे आए।

बिहार के चुनावी तजुर्बे का जिक्र और चेतावनी

अपनी बात को साबित करने के लिए हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने बिहार चुनाव का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार में अपनी पार्टी के लिए महज पांच सीटें मांगी गई थीं, लेकिन गठबंधन के बड़े साझेदारों ने उनकी मांग को पूरी तरह अनसुना कर दिया था। इतना ही नहीं, चुनाव प्रचार के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने ओवैसी के प्रत्याशियों को हराने के लिए मुस्लिम सांसदों की पूरी टीम मैदान में उतार दी थी। ओवैसी ने जोर देकर कहा कि अतीत के इन कड़वे अनुभवों के बावजूद अभी भी समझौते का अवसर खुला है। अगर अखिलेश यादव अब भी गठबंधन का फैसला नहीं लेते हैं, तो चुनावी मैदान में उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

उत्तर प्रदेश में 2027 का सियासी गणित और सीटों का आंकड़ा

उत्तर प्रदेश की वर्तमान 18वीं विधानसभा का कार्यकाल वर्ष 2027 में समाप्त हो रहा है। ऐसे में राज्य की 403 विधानसभा सीटों के लिए फरवरी से मार्च 2027 के बीच नए चुनाव कराए जाने की प्रबल संभावना है। देश के इस सबसे बड़े सूबे में सरकार बनाने के लिए किसी भी राजनीतिक दल या मोर्चे को कम से कम 202 सीटों का स्पष्ट बहुमत हासिल करना होता है। ऐसे में मुस्लिम मतदाताओं की निर्णायक भूमिका को देखते हुए ओवैसी का यह गठबंधन प्रस्ताव राज्य के सियासी समीकरणों को नया मोड़ दे सकता है।

सवाल-जवाब

ओवैसी ने अखिलेश यादव को क्या ऑफर दिया है?
असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अखिलेश यादव को एआईएमआईएम के साथ चुनावी गठबंधन करने का प्रस्ताव दिया है।
ओवैसी ने अखिलेश यादव को बिहार के किस नेता का उदाहरण देकर चेतावनी दी?
ओवैसी ने चेतावनी दी कि यदि अखिलेश गठबंधन नहीं करते हैं, तो यूपी में उनका हाल बिहार के राजद नेता तेजस्वी यादव जैसा हो सकता है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल कितनी सीटें हैं और बहुमत का आंकड़ा क्या है?
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, और सरकार बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 202 सीटें हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के अगले चुनाव कब होने की संभावना है?
वर्तमान 18वीं विधानसभा का कार्यकाल 2027 में समाप्त हो रहा है, जिससे चुनाव फरवरी से मार्च 2027 के दौरान होने की संभावना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·14 दिन पहले

असदुद्दीन ओवैसी का यह बयान उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों में एक नया मोड़ ला रहा है। जहाँ एक तरफ वे मुस्लिम प्रतिनिधित्व और स्वतंत्र नेतृत्व की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सपा और कांग्रेस पर उनका यह तीखा हमला क्षेत्रीय दलों के बीच वोटों के ध्रुवीकरण को और तेज कर सकता है। यदि यह गठबंधन नहीं होता है, तो 2027 के रण में विपक्षी एकता पर इसका गहरा असर पड़ना तय है, जिससे चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय हो सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 दिन पहले

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर ध्रुवीकरण और वोट बैंक की राजनीति तेज हो गई है। ओवैसी द्वारा अखिलेश यादव को गठबंधन का प्रस्ताव और बिहार के नतीजों का हवाला देना यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय दल अब दबाव की राजनीति के जरिए अपने सियासी अस्तित्व और सौदेबाजी की क्षमता को मजबूत करना चाहते हैं। इस तरह के बयानों से आगामी चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव और राजनीतिक समीकरण किस दिशा में करवट लेंगे, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा क्योंकि मुख्यधारा के दल और नए चेहरे दोनों ही इस वर्ग के समर्थन के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·14 दिन पहले

उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों वाले इस राजनीतिक रण में यह बयानबाजी केवल शुरुआती सुगबुगाहट नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में चुनावी मैदान की पिच तैयार करने की रणनीति है। ओवैसी का यह दबाव मुख्य विपक्षी खेमे के लिए रणनीतिक उलझन पैदा कर सकता है। खेल के मैदान की तरह ही राजनीति में भी टाइमिंग और सही चाल का बहुत महत्व होता है, और यह देखना अहम होगा कि मुख्यधारा के दल इस आक्रामक गेंदबाजी का सामना कैसे करते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·15 दिन पहले

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर यह बयानबाजी विपक्षी खेमे की रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत देती है। असदुद्दीन ओवैसी का यह गठबंधन प्रस्ताव और बिहार चुनाव के हवाले से दी गई चेतावनी सीधे तौर पर मुस्लिम वोटों के बिखराव और समाजवादी पार्टी के पारंपरिक समीकरणों को चुनौती देती है। यदि क्षेत्रीय दल अल्पसंख्यकों की नुमाइंदगी और स्वतंत्र नेतृत्व के इस दबाव से नहीं निपटते हैं, तो आने वाले दिनों में ध्रुवीकरण और सीटों के गणित पर इसका गहरा असर पड़ना तय है।

Ravikash Gupta@ravikash·15 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह साफ है कि ओवैसी की रणनीति केवल सीटों के मोलभाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मुस्लिम मतदाताओं के बीच सपा के एकाधिकार को तोड़ने का सुनियोजित प्रयास है। यदि विपक्षी खेमा इस सामाजिक और राजनीतिक दबाव का प्रभावी काउंटर नहीं ढूंढता है, तो यह समीकरण ध्रुवीकरण को बढ़ावा देकर चुनावी नतीजों के गणित को पूरी तरह उलट सकता है, जिससे वित्तीय और कॉर्पोरेट निवेश के लिहाज से संवेदनशील इस राज्य में दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।

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