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उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों की बदहाली के दावों पर योगी आदित्यनाथ का पलटवार, गिनाए ऑपरेशन कायाकल्प के कामराजनीति
17 अग॰ 2026, 6:09 pm (70 दिन पहले)· 1

उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों की बदहाली के दावों पर योगी आदित्यनाथ का पलटवार, गिनाए ऑपरेशन कायाकल्प के काम

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के उन बयानों पर पलटवार किया है जिनमें राज्य के स्कूलों की हालत खराब होने का दावा किया गया था। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए सरकारी विद्यालयों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी गई है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आज विपक्षी दल यह कह रहे हैं कि वे स्कूलों के वीडियो बनाएंगे। इस पर सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि जरूर वीडियो बनाओ भाई, क्योंकि हमने अपनी नीतियों से स्कूलों की सूरत बदल दी है।

मुख्यमंत्री ने विस्तार से बताया कि राज्य सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से सरकारी विद्यालयों में बुनियादी ढांचे को कितना मजबूत किया है। हर स्कूल में अच्छी फ्लोरिंग कराई गई है, छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालयों का निर्माण कराया गया है, तथा शुद्ध पेयजल की सुविधा मुहैया कराई गई है। इसके अलावा विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था की गई है। सरकार ने करीब 1 करोड़ 60 लाख बच्चों को स्कूल बैग और किताबें निःशुल्क उपलब्ध कराई हैं। इसके साथ ही प्रत्येक छात्र को यूनिफॉर्म, जूते, मोज़े और स्वेटर जैसी सभी जरूरी सुविधाएं भी दी जा रही हैं।

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साल 2017 से पहले और आज के स्कूलों में अंतर

अपनी सरकार के कार्यकाल की तुलना 2017 से पहले के दौर से करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय क्या स्थिति थी। वर्ष 2017 से पहले स्कूलों में या तो इमारतें नहीं थीं, और अगर इमारतें थीं तो पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं थे। यदि शिक्षक मौजूद थे तो स्कूल में छात्र नहीं टिकते थे। सत्र पूरा होने से पहले ही आधे से ज्यादा बच्चे स्कूल छोड़ देते थे क्योंकि परिसरों में पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं थीं।

आज के समय में स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। निपुण भारत अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के स्कूली बच्चे न केवल अक्षर ज्ञान में बल्कि वाक्य विन्यास करने में भी पूरी तरह निपुण हो रहे हैं। वे अपने विद्यालयों में विज्ञान, गणित और अंग्रेजी की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। जब भी अधिकारी या मंत्री स्कूलों का दौरा करते हैं, तो वे देखते हैं कि बच्चे कुछ रचनात्मक और बेहतर कर रहे हैं। यह सकारात्मक बदलाव आज जमीन पर साफ नजर आ रहा है।

कोटेदारों की स्थिति और पिछली सरकारों पर निशाना

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कोटेदारों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हमारा काम अगर हमें समाज में विशेष सम्मान न दिलाए, तो कम से कम उस कार्य की वजह से हमें अपमानित भी महसूस नहीं होना चाहिए। इस बात का हमेशा ध्यान रखना बेहद जरूरी है। वर्ष 2017 से पहले जब कोटेदार अपना काम करते थे, तो समाज के लोग उन्हें शक की नजरों से देखते थे और उन्हें उचित सम्मान नहीं मिलता था।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब कोटेदार शब्द से ही लोगों को एक प्रकार की चिढ़ होने लगी थी। हालांकि इसमें गलती कोटेदारों की अपनी नहीं थी, क्योंकि पाप कोई और करता था और उसका खामियाजा किसी और को भुगतना पड़ता था। उस समय सत्ता की बागडोर संभालने वाले लोगों की नीयत में खोट था। उनके भ्रष्ट आचरण की आंच से कोटेदार लाख चाहने के बावजूद खुद को नहीं बचा पाते थे, जिसका परिणाम यह होता था कि समाज में उन्हें हमेशा संदेह की दृष्टि से देखा जाता था।

सवाल-जवाब

उत्तर प्रदेश के स्कूलों में बुनियादी सुधार के लिए कौन सी योजना चलाई गई है?
राज्य सरकार ने स्कूलों में सुधार के लिए ऑपरेशन कायाकल्प योजना चलाई है जिसके तहत फ्लोरिंग, शौचालय और पेयजल जैसी सुविधाएं दी गई हैं।
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों में क्या-क्या सुविधाएं दी गई हैं?
इसके तहत अच्छी फ्लोरिंग, बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय, पेयजल, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और फर्नीचर की व्यवस्था की गई है।
राज्य सरकार द्वारा कितने बच्चों को स्कूल बैग और किताबें दी गई हैं?
सरकार ने लगभग 1 करोड़ 60 लाख बच्चों को स्कूल बैग और किताबें उपलब्ध कराई हैं।
स्कूली बच्चों में पठन-पाठन सुधार के लिए कौन सा अभियान चल रहा है?
उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की पठन और शिक्षण दक्षता सुधारने के लिए निपुण भारत अभियान चलाया जा रहा है।
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टिप्पणियाँ 4

Karan Malhotra@karan-malhotra·70 दिन पहले

मुख्यमंत्री का यह बयान कि 'विपक्ष जरूर वीडियो बनाए', प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से एक कड़ा राजनीतिक दांव है। 'ऑपरेशन कायाकल्प' के दाווों की जमीनी हकीकत का आकलन करने के लिए स्वतंत्र शिक्षाविदों और स्थानीय नागरिकों द्वारा इन परिसरों का ऑडिट कराया जाना चाहिए, ताकि बुनियादी ढांचे और 'निपुण भारत' अभियान के तहत बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक प्रगति का पारदर्शी मूल्यांकन हो सके।

Ananya Iyer@ananya-iyer·70 दिन पहले

करण मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह ध्यान देना होगा कि आज के दौर में जब सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर व्यवस्था सुधार के दावों और हकीकत पर आधारित डॉक्यू-सीरीज़ या वीडियो रिपोर्ट्स का चलन बढ़ रहा है, तब इस तरह की राजनीतिक बयानबाजी का असर केवल चुनावी मैदान तक सीमित नहीं रहता। यह देखना दिलचस्प होगा कि स्वतंत्र ऑडिट और वीडियो सबूत भविष्य में राज्य की शैक्षिक आख्यानों को डिजिटल माध्यमों पर कैसे प्रभावित करते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·70 दिन पहले

मुख्यमंत्री का यह आक्रामक रुख और 'ऑपरेशन कायाकल्प' के आंकड़ों को सीधे जनता के सामने रखना यह स्पष्ट करता है कि आगामी राजनीतिक लड़ाइयों में शिक्षा और बुनियादी ढांचा एक बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है। विपक्ष द्वारा स्कूलों के वीडियो बनाने की चुनौती को स्वीकार करते हुए जमीनी बदलावों का दावा करना यह दिखाता है कि सत्ता पक्ष इस मोर्चे पर अपनी छवि को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। हालांकि, धरातल पर इस सुधार की निरंतरता और शिक्षकों की कमी जैसे मुद्दों पर प्रशासनिक सख्ती कितनी प्रभावी रहती है, यह आने वाले दिनों में जनता के बीच इस नैरेटिव की स्वीकार्यता तय करेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·70 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह ध्यान देना आवश्यक है कि जब सरकार बुनियादी ढांचे और डिजिटल लर्निंग जैसे मोर्चों पर अपनी उपलब्धियां गिनाती है, तो वित्तीय प्रबंधन और संसाधन आवंटन का यह मॉडल राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक विकास का आधार बनता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बुनियादी बदलाव का क्या आर्थिक प्रभाव पड़ता है।

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