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युवा पीढ़ी के अपमान पर भड़के उद्धव ठाकरे, तोरणा किला जीतने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज से की जेन जी की तुलनाराजनीति
30 जुल॰ 2026, 12:40 pm (46 दिन पहले)· 0

युवा पीढ़ी के अपमान पर भड़के उद्धव ठाकरे, तोरणा किला जीतने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज से की जेन जी की तुलना

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने युवाओं को 'कॉकरोच' कहे जाने पर आपत्ति जताते हुए जेन जी की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज और संत ज्ञानेश्वर से की।

मुंबई में आयोजित एक पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने देश की युवा पीढ़ी को अपमानित किए जाने के मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। लगभग 13 से 28 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं यानी जेन जी के लिए हाल ही में इस्तेमाल किए गए 'कॉकरोच' शब्द पर भारी आपत्ति जताते हुए उन्होंने युवाओं की क्षमता का समर्थन किया। अपने संबोधन में उन्होंने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज का उदाहरण सामने रखा। उन्होंने कहा कि जिस तरह आज की नई पीढ़ी के विचार व्यक्त करने पर उनके लिए अनुचित शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है, उसी प्रकार इतिहास में मुगलों ने भी छत्रपति शिवाजी महाराज को 'चूहा' कहकर उनका मजाक उड़ाने की कोशिश की थी।

इतिहास के प्रेरक उदाहरणों से युवा क्षमता को रेखांकित किया

उद्धव ठाकरे ने कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि लगभग 13-14 से 27-28 साल की उम्र वाले युवा, जिन्हें कुछ लोग 'कॉकरोच' कहकर नीचा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं, वास्तव में असीम ऊर्जा और क्षमता से भरे हुए हैं। उन्होंने ऐतिहासिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए ध्यान दिलाया कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने मात्र 17 वर्ष की अल्पायु में तोरणा किला जीतकर अपनी महान यात्रा का आगाज़ किया था। इसके अलावा उन्होंने संत ज्ञानेश्वर का भी उदाहरण दिया, जिन्होंने बहुत ही कम उम्र में कालजयी ग्रंथ 'ज्ञानेश्वरी' की रचना कर समाज को नई दिशा दी थी।

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ठाकरे ने कहा कि इन दोनों ही विभूतियों को अपने दौर में स्थापित शक्तियों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। "मुगलों ने तो शिवाजी महाराज को भी 'चूहा' कहा था।" उन्होंने स्पष्ट किया कि कम उम्र में ही शिवाजी महाराज ने विशाल मुग़ल साम्राज्य को चुनौती देने का साहस दिखाया था। इसलिए आज के युवाओं द्वारा सामाजिक या राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखने पर उन्हें कमजोर या कमतर आंकना सर्वथा गलत है।

संसद में बढ़ा इंटरनेट स्लैंग और जेन जी शब्दावली का प्रभाव

उद्धव ठाकरे की यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय राजनीति और संसद के भीतर भी नई पीढ़ी की बोलचाल की भाषा का प्रभाव तेजी से देखा जा रहा है। संसद के मानसून सत्र के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने अपने संदेश को अधिक प्रभावी और युवाओं से जोड़ने के लिए सोशल मीडिया तथा इंटरनेट पर प्रचलित शब्दावली का खुलकर इस्तेमाल किया। संसदीय कार्यवाहियों में पारंपरिक औपचारिक भाषा के स्थान पर इस तरह के डिजिटल स्लैंग का प्रयोग चर्चा का विषय बना रहा।

सदन की बहस के दौरान सत्ता पक्ष के नेताओं ने सरकारी सुधारों और नए विधेयकों का समर्थन करने के लिए इस नई शब्दावली का सहारा लिया, वहीं विपक्षी सांसदों ने NEET परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए इंटरनेट स्लैंग का प्रयोग किया। इसी क्रम में बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने प्रस्तावित विधेयक का पक्ष रखते हुए लोकप्रिय इंटरनेट अभिव्यक्ति "क्लॉक इट" (clock it) का उपयोग किया, जिसका अर्थ किसी बात को सही समय पर सटीक रूप से समझने या पकड़ने से होता है। उन्होंने सदन में कहा कि जेन जी की भाषा का प्रयोग करते हुए यह स्वीकार करना होगा कि प्रधानमंत्री मोदीजी ने इस विधायी समाधान को लाने में पूरी तरह से सही कदम उठाया है।

सवाल-जवाब

उद्धव ठाकरे ने जेन जी की तुलना किससे की?
उद्धव ठाकरे ने जेन जी (लगभग 13 से 28 वर्ष के युवाओं) की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज और संत ज्ञानेश्वर से की।
छत्रपति शिवाजी महाराज ने किस उम्र में तोरणा किला जीता था?
छत्रपति शिवाजी महाराज ने मात्र 17 वर्ष की उम्र में तोरणा किला जीतकर अपनी विजय यात्रा शुरू की थी।
मुगलों ने छत्रपति शिवाजी महाराज के लिए किस शब्द का इस्तेमाल किया था?
उद्धव ठाकरे के अनुसार, मुगलों ने छत्रपति शिवाजी महाराज का उपहास उड़ाने के लिए उन्हें 'चूहा' कहा था।
संसद के मानसून सत्र में बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने किस शब्द का प्रयोग किया था?
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने एक प्रस्तावित विधेयक के समर्थन में इंटरनेट स्लैंग 'क्लॉक इट' (clock it) का इस्तेमाल किया था।
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