पंजाब के लुधियाना पूर्व विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के सत्यापन को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। यहां की वोटर लिस्ट में एक मतदाता के नाम के साथ स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह जैसी दिखने वाली फोटो छपी सामने आई, जिसके बाद चुनावी रिकॉर्ड की शुद्धता पर सियासी दलों ने तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। इस गड़बड़ी को आधार बनाकर कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग के काम पर सवाल उठाए, जबकि स्थानीय निर्वाचन तंत्र ने पूरे विवाद को भ्रामक बताते हुए स्पष्टीकरण जारी किया है।
सोशल मीडिया पर उठा मुद्दा और कांग्रेस का कड़ा रुख
कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने इस मामले को सोशल मीडिया मंच एक्स पर उठाते हुए नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लुधियाना पूर्व के पार्ट 38 में सीरियल नंबर 422 पर दर्ज प्रविष्टि की ओर ध्यान दिलाया, जहां मतदाता के नाम के आगे भगत सिंह की छवि लगी हुई थी। उन्होंने लिखा, “बस यही देखना बाकी रह गया था।” इस पोस्ट के सामने आते ही सियासी गलियारों में बहस छिड़ गई कि इतने महत्वपूर्ण आधिकारिक दस्तावेज में ऐसी चूक कैसे संभव हुई।
इससे पहले लुधियाना अर्बन कांग्रेस के अध्यक्ष संजय तलवार ने भी इसी मतदान केंद्र की सूची में आठ अन्य नामों के आगे गलत तस्वीरें प्रकाशित होने का गंभीर आरोप लगाया था। तलवार ने मांग की कि पूर्व क्षेत्र के सभी 235 मतदान बूथों की मतदाता सूचियों की व्यापक और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना था कि चुनावी प्रक्रिया में आम जनता का भरोसा कायम रखने और पात्र मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की हिफाजत के लिए मतदाता रिकॉर्ड का पूरी तरह सटीक होना बुनियादी शर्त है।
राष्ट्रीय राजनीति और हरियाणा का संदर्भ
यह मामला ऐसे समय पर गरमाया है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी हरियाणा विधानसभा चुनाव में कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर लगातार मुखर हैं। राहुल गांधी ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की कमियों, वोटरों के अधिकारों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से मिलने की अनुमति मांगी थी, हालांकि ज्ञानेश कुमार ने इस मांग और रुख से इनकार कर दिया। इस राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते लुधियाना की इस स्थानीय घटना ने तुरंत राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया।
प्रशासन की सफाई और जांच का घटनाक्रम
विवाद बढ़ने पर लुधियाना के जिला चुनाव अधिकारी-सह-डिप्टी कमिश्नर कार्यालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कांग्रेस के दावों को भ्रामक करार दिया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह त्रुटि पूर्व की मतदाता सूची में मौजूद थी और 13 अगस्त 2026 को प्रकाशित की गई ड्राफ्ट सूची में भी दर्ज रह गई थी। हालांकि, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के तहत चलाए गए सत्यापन अभियान के दौरान इस गलती की पहचान कर ली गई थी और आवश्यक सुधार कर दिया गया था।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सही तस्वीर के साथ अंतिम संशोधित मतदाता सूची 12 अक्टूबर को प्रकाशित की जानी तय थी। अधिकारियों का कहना है कि जब यह गड़बड़ी ड्राफ्ट स्तर पर ही पकड़कर सुधार ली गई थी, तो इसे अब बड़ा मुद्दा बनाना तथ्यों से परे है। इसके बावजूद, विपक्षी दल पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए व्यापक जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।



















