पंजाब के संगरूर शहर में शादी के आगामी सीजन से ठीक पहले साइबर जालसाजों द्वारा महिलाओं को ऑनलाइन कपड़ों की खरीदारी के नाम पर निशाना बनाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। इलाके के एक जाने-माने कपड़ा प्रतिष्ठान के नाम और पहचान का दुरुपयोग करके धोखेबाजों ने सोशल मीडिया पर कई फर्जी पेज तैयार किए हैं। इन नकली प्रोफाइल के जरिए नामी दुकान की साख का फायदा उठाकर ग्राहकों से पैसे ऐंठे जा रहे हैं और कपड़े डिलीवर नहीं किए जा रहे हैं।
नकली प्रोफाइल बनाकर असली वीडियो चुराने का तरीका
इस पूरे फर्जीवाड़े की कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित तरीके से रची गई है। धोखेबाज सबसे पहले बाजार की प्रतिष्ठित दुकान के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से कपड़ों, विशेष रूप से डिजाइनर और आकर्षक सूटों के वीडियो और रील डाउनलोड कर लेते हैं। इसके बाद वे उसी दुकान के नाम से मिलते-जुलते नकली सोशल मीडिया अकाउंट बनाते हैं और वहां इन चुराए गए वीडियो को अपलोड कर देते हैं। ग्राहकों को फंसाने के लिए इन पोस्ट्स पर सूट की कीमतें बाजार भाव और असली दुकान के रेट से काफी कम दिखाई जाती हैं। घर बैठे सस्ती दरों पर बेहतरीन सूट पाने की चाहत में कई महिलाएं इन विज्ञापनों के झांसे में आ जाती हैं।
ऑर्डर और भुगतान के बाद संपर्क काटने का खेल
जब ग्राहक इन नकली सोशल मीडिया खातों पर दिए गए संदेशों या नंबरों के माध्यम से सूट बुक करते हैं, तो जालसाज उनसे डिजिटल माध्यम से फर्जी बैंक खातों में अग्रिम भुगतान करने को कहते हैं। सस्ते दामों के आकर्षण में महिलाएं ऑनलाइन रकम ट्रांसफर कर देती हैं। पैसे मिलते ही जालसाज बातचीत पूरी तरह बंद कर देते हैं और खरीदारों के फोन उठाना भी बंद कर देते हैं। पीड़ितों को न तो बुक किए गए कपड़े मिलते हैं और न ही उनकी भेजी गई रकम वापस मिलती है।
दुकान पर पहुंच रही हैं ठगी की शिकार महिलाएं
प्रतिष्ठान के संचालक आरव गर्ग के अनुसार, बीते 15 से 20 दिनों के भीतर कई पीड़ित महिलाएं सीधे उनके शोरूम में पहुंचकर शिकायत दर्ज करा रही हैं। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने संबंधित सोशल मीडिया पेज से कपड़े बुक किए और भुगतान भी पूरा कर दिया, मगर पार्सल कभी उनके पते पर नहीं पहुंचा। दुकानदार को ग्राहकों को समझाना पड़ रहा है कि जिस प्रोफाइल से उन्होंने लेन-देन किया, वह उनकी असली दुकान का नहीं बल्कि उनके नाम पर ठगों द्वारा चलाया जा रहा नकली खाता है।
साइबर सेल में शिकायत और सतर्क रहने के उपाय
दुकानदार आरव गर्ग ने इस धोखाधड़ी के संबंध में संगरूर के साइबर क्राइम थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस की साइबर शाखा ने मामले की जांच करते हुए आश्वासन दिया है कि धोखेबाजों द्वारा संचालित इन फर्जी सोशल मीडिया पेजों को शीघ्र ब्लॉक कराया जाएगा और इनके पीछे सक्रिय गिरोह को पकड़ा जाएगा। ऑनलाइन शॉपिंग करते समय इस तरह के जालसाजों से बचने के लिए आवश्यक है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले ऑफर्स की सत्यता की पूरी जांच की जाए। किसी भी अज्ञात खाते पर पैसे भेजने से पहले वीडियो कॉल के जरिए विक्रेता की पहचान और वास्तविक दुकान की पुष्टि अवश्य करनी चाहिए।



















