पंजाब की राजनीति में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब साल 2016 के चर्चित नाभा जेलब्रेक मामले के आरोपी और गैंगस्टर से नेता बने गुरप्रीत सेखों ने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया। फिरोजपुर जिले के जीरा इलाके में आयोजित एक राजनीतिक रैली में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद सेखों को औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल कराया। चुनावी राज्य में इस कदम के बाद से ही सत्तारूढ़ दल पर विपक्षी खेमे की ओर से चौतरफा हमले शुरू हो गए हैं और राज्य की कानून व्यवस्था पर भी नए सवाल उठने लगे हैं।
2027 के चुनावों में हिंसा का खतरा: बलकौर सिंह
गुरप्रीत सेखों की सत्ताधारी दल में एंट्री पर दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह ने सबसे कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी जनसेवकों के बजाय अपराधियों को संरक्षण दे रही है। बलकौर सिंह का कहना था कि पार्टी की इस नीति के चलते आगामी विधानसभा चुनावों में लगभग 15 गैंगस्टर मैदान में उतर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा, "2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव बेहद हिंसक होने वाले हैं।"
बलकौर सिंह ने राज्य के राजनीतिक माहौल पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि अब राजनीति में आने का रास्ता गंभीर अपराधों से होकर गुजरता है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे फैसला करें कि वे विधानसभा में अपराध करने वालों को देखना चाहते हैं या उन ईमानदार जनप्रतिनिधियों को जो जनता के अधिकारों के लिए आवाज उठा सकें।
अकाली दल का तंज: गैंगस्टरों के खिलाफ वार नहीं, प्यार
शिरोमणि अकाली दल ने भी इस घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार की कड़ी आलोचना की है। अकाली दल के नेताओं का कहना है कि आप सरकार का गैंगस्टरों के खिलाफ अभियान अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है। सरकार राज्य में अपराधियों पर शिकंजा कसने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में नाभा जेलब्रेक के मास्टरमाइंड का मुख्यमंत्री खुद गले लगाकर स्वागत कर रहे हैं। अकाली दल के अनुसार, जब अपराधियों को इस तरह नायक की तरह सम्मानित किया जाएगा, तो राज्य की कानून-व्यवस्था की बदहाली का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
भाजपा ने कसा तंज, उठाए पुराने बयानों पर सवाल
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता फतेह जंग बाजवा ने भी गुरप्रीत सेखों के सत्तारूढ़ दल में शामिल होने पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बाजवा ने मुख्यमंत्री के पुराने बयानों की याद दिलाते हुए पूछा कि जो मान पहले गैंगस्टरों को कांग्रेस और बादल परिवार की देन बताते थे, आज वही विवादित चेहरे उनकी पार्टी का हिस्सा क्यों बन रहे हैं? बाजवा ने आरोप लगाया कि पार्टी की प्राथमिकता अब सिर्फ चुनावी सीटें जीतना रह गई है, चाहे इसके लिए सिद्धांतों से समझौता ही क्यों न करना पड़े। उनका दावा है कि पंजाब के मतदाता ऐसे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले चेहरों को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।



















