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भरतपुर के गांवों में नई फसल आते ही छाछ और बाजरे की पारंपरिक राबड़ी की खुशबू, जानिए सेहतमंद नाश्ता तैयार करने का तरीकाराजस्थान
5 अक्तू॰ 2026, 9:18 am (35 मिनट पहले)· 0

भरतपुर के गांवों में नई फसल आते ही छाछ और बाजरे की पारंपरिक राबड़ी की खुशबू, जानिए सेहतमंद नाश्ता तैयार करने का तरीका

राजस्थान के भरतपुर जिले में नए बाजरे की आवक के साथ ही पारंपरिक राबड़ी बनाने का दौर शुरू हो गया है, जो स्वाद के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है।

राजस्थान के भरतपुर जिले के ग्रामीण अंचलों में खेतों से नए बाजरे की कटाई होकर आते ही रसोई घरों का माहौल पूरी तरह बदल गया है। वर्तमान समय में भले ही आधुनिक जीवनशैली और नए तरह के व्यंजन तेजी से फैल रहे हों, लेकिन भरतपुर के देहाती इलाकों में अब भी पारंपरिक देसी खान-पान का गहरा प्रभाव दिखता है। नई फसल घर पहुंचते ही ग्रामीण परिवार अपने पसंदीदा पारंपरिक पकवान तैयार करने में जुट जाते हैं। बाजरे से तैयार किए जाने वाले अलग-अलग देसी व्यंजनों में छाछ और बाजरे के मेल से बनने वाली राबड़ी को सबसे अधिक पसंद किया जाता है। यह व्यंजन न केवल खाने में लाजवाब स्वाद देता है, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इसके कई गुणकारी लाभ माने जाते हैं। भरतपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां यह पारंपरिक राबड़ी शौक से न पकाई जाती हो।

स्वास्थ्य और पोषण के नजरिए से क्यों खास है यह देसी नाश्ता

देहात के लोग बाजरे की इस राबड़ी को स्वाद के साथ-साथ अत्यंत गुणकारी और सुपाच्य आहार मानते हैं। यही मुख्य कारण है कि गांव-देहात में अधिकांश लोग अपने दिन की शुरुआत इसी पारंपरिक नाश्ते के साथ करते हैं। खेती-बाड़ी में पसीना बहाने वाले किसानों और श्रमसाध्य कार्यों में लगे मजदूरों के लिए यह आहार ऊर्जा का एक प्रमुख जरिया बनता है, जिससे उन्हें पूरे दिन खेतों में कठिन काम करने का संबल मिलता है। पोषक तत्वों की बात करें तो बाजरे में भरपूर फाइबर, कैल्शियम और अन्य जरूरी घटक पाए जाते हैं, जबकि दूसरी ओर छाछ पेट के पाचन तंत्र को संतुलित और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है। जब इन दोनों पौष्टिक तत्वों का संगम होता है, तो यह राबड़ी एक प्राकृतिक सुपरफूड के रूप में सामने आती है। ग्रामीणों का मानना है कि इसके नियमित खान-पान से पेट से जुड़ी तमाम तकलीफें दूर रहती हैं और शरीर दिन भर चुस्त-दुरुस्त रहता है।

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घर पर कैसे तैयार की जाती है छाछ और बाजरे की राबड़ी

बाजरे और छाछ के इस मिश्रण से राबड़ी तैयार करने का तरीका बहुत ही सहज, सीधा और सदियों पुराना है। इस पूरी तैयारी में किसी भी तरह के कृत्रिम मसाले या रासायनिक सामग्रियों का इस्तेमाल नहीं होता। सबसे पहले साफ-सुथरे नए बाजरे को लेकर उसे चक्की या ओखली में इस तरह पीसा जाता है कि वह बारीक आटे की जगह मोटा दलिया बन सके। इसके पश्चात एक बड़े पात्र या पारंपरिक मिट्टी की हांडी में ताजी छाछ निकाली जाती है और उसमें बाजरे का तैयार मोटा दलिया मिलाया जाता है।

छाछ और दलिया के इस घोल को पूरी तरह से मिलाने के बाद चूल्हे पर हल्की आंच पर चढ़ाया जाता है। राबड़ी को सही रूप देने और उसके स्वाद को निखारने के लिए इसे पकने के दौरान लगातार या थोड़ी-थोड़ी देर में चम्मच से हिलाते रहना जरूरी होता है। ऐसा लगातार चलाने से दलिया बर्तन के पेंदे में जलता या चिपकता नहीं है और छाछ के साथ समान रूप से घुलकर पकता रहता है।

धीमी आंच पर पकने के बाद ऐसे परोसते हैं यह ग्रामीण व्यंजन

धीमी आंच पर धीरे-धीरे पकते हुए बाजरे का दलिया पूरी छाछ को धीरे-धीरे सोख लेता है। इसके बाद यह गाढ़ा मिश्रण एक रेशेदार और स्वादिष्ट राबड़ी का रूप धारण कर लेता है। जब यह पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है, तो इसमें आवश्यकतानुसार सादा नमक और थोड़ी सी पीसी हुई काली मिर्च डाली जाती है। तैयारी पूरी होने पर इस व्यंजन को अपनी रुचि के आधार पर हल्का गुनगुना या फिर पूरी तरह ठंडा करके भी खाया जाता है। गांव के बुजुर्गों और स्थानीय लोगों का कहना है कि नए बाजरे के इस्तेमाल से इस राबड़ी का देसी स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। भरतपुर के गांवों में यह पारंपरिक रेसिपी आज भी लोगों के दैनिक खान-पान का एक अटूट और अभिन्न अंग बनी हुई है।

सवाल-जवाब

भरतपुर के गांवों में बाजरे की राबड़ी कब और क्यों बनाई जाती है?
खेतों से नया बाजरा आते ही ग्रामीण इलाकों में यह राबड़ी बनाई जाती है, क्योंकि ताजे अनाज से इसका स्वाद और पौष्टिकता बढ़ जाती है।
बाजरे की राबड़ी में कौन से मुख्य तत्व पाए जाते हैं?
बाजरे में प्रचुर मात्रा में फाइबर, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व होते हैं, जबकि छाछ पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करती है।
इसे बनाने के लिए बाजरे को किस तरह तैयार किया जाता है?
साफ किए गए नए बाजरे को पीसकर उसका मोटा दलिया तैयार किया जाता है, ताकि वह छाछ में अच्छी तरह पक सके।
पकने के बाद राबड़ी में कौन से मसाले मिलाए जाते हैं?
राबड़ी पकने के बाद उसमें स्वादानुसार सादा नमक और हल्की सी पिसी काली मिर्च मिलाई जाती है।
क्या बाजरे की राबड़ी को ठंडा करके खाया जा सकता है?
हां, इसे अपनी पसंद के अनुसार हल्का गर्म या पूरी तरह ठंडा करके भी खाया जा सकता है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·10 मिनट पहले

मिट्टी की हांडी में धीमी आंच पर पकने वाली राबड़ी और छाछ का यह देसी मेल सच में गजब है, सुबह-सुबह खेतों में काम करने वालों के लिए इससे बढ़िया और ताकतवर नास्ता हो ही नहीं सकता।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 मिनट पहले

रोहन भाई, एकदम सही कहा आपने। पिछली बार जब मैं भरतपुर के एक गाँव में गया था, तो सुबह-सुबह चुल्हे पर बनी इसी राबड़ी का स्वाद चखा था, आज भी वो सौंधी महक याद है।

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