रबी फसलों के आगामी चक्र को देखते हुए खेतों में सरसों की बिजाई की तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। इसी बीच काश्तकारों के लिए बीज की उपलब्धता को लेकर बड़ी सुविधा सामने आई है। भरतपुर स्थित सरसों अनुसंधान केंद्र ने आगामी बिजाई के लिए 9 विशिष्ट और उन्नत किस्मों का कुल 800 क्विंटल प्रमाणित बीज तैयार किया है। खुले बाजार के मुकाबले किसानों के खर्च को घटाने के मकसद से यह समूचा प्रमाणित स्टॉक 150 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर मुहैया कराया जा रहा है।
विभिन्न भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियों के अनुकूल किस्में
अनुसंधान केंद्र की ओर से तैयार किए गए इस बीज भंडार में अलग-अलग कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किस्में चुनी गई हैं। इसमें पीली सरसों की खास किस्मों के अलावा ऐसी किस्में भी शामिल हैं जो कम सिंचाई वाले इलाकों में भी भरपूर पैदावार दे सकती हैं। इसके साथ ही जिन इलाकों में बिजाई में देरी हो जाती है, वहां के लिए भी उपयुक्त बीजों का बंदोबस्त किया गया है। खेतों की मिट्टी की नमी और बिजाई की समयावधि के हिसाब से किसान अपनी जरूरत के मुताबिक सही किस्म चुन सकते हैं।
पहले आओ पहले पाओ के आधार पर वितरण
सरसों अनुसंधान केंद्र के डायरेक्टर वी.वी. सिंह के अनुसार, किसानों की व्यावहारिक जरूरतों को केंद्र में रखकर केंद्र पर सरसों की कई किस्मों पर निरंतर शोध और क्षेत्रीय परीक्षण किए जाते हैं। इन परीक्षणों में जो किस्में सबसे बेहतर परिणाम देती हैं, केवल उन्हीं का प्रमाणित बीज के रूप में बड़े पैमाने पर संवर्धन किया जाता है। तैयार 800 क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण पहले आओ, पहले पाओ की व्यवस्था के तहत 150 रुपये प्रति किलो की दर से किया जाएगा।
गिर्राज किस्म की मांग और गुणवत्ता परीक्षण
तैयार की गई किस्मों में गिर्राज किस्म स्थानीय काश्तकारों के बीच विशेष रूप से सराही जाती है। भरतपुर जिले के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान गिर्राज की ही बुवाई करना पसंद करते हैं। बीजों की अंकुरण क्षमता और शुद्धता बनाए रखने के लिए केंद्र में कड़े मानकों के तहत टेस्टिंग और वैज्ञानिक निगरानी की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज से अंकुरण मजबूत होता है और अंततः पैदावार में इजाफा होता है, जिससे किसानों को नकली या कमजोर बीजों की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा।


















