राजस्थान सरकार की ओर से निकाली गई सफाई कर्मचारी भर्ती में आवेदन करने पहुंचे अलवर नगर निगम के कर्मचारियों के सामने भारी संकट खड़ा हो गया है. शहर भर की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले करीब 900 संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी पिछले 20 से 25 दिनों से नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं. भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए अनिवार्य अनुभव प्रमाण पत्र अब तक एक भी कर्मचारी को जारी नहीं किया गया है. आवेदन जमा करने की अंतिम समय सीमा 13 तारीख बेहद नजदीक आ चुकी है, जिससे कर्मचारियों में रोष बढ़ता जा रहा है.
प्रशासनिक टालमटोल से कर्मचारियों में रोष
अलवर नगर निगम के तीनों जोन में कार्यरत करीब 900 कर्मचारियों का भविष्य इस प्रशासनिक देरी के कारण अधर में लटक गया है. कर्मचारी प्रतिनिधियों मोहनलाल इंदोरिया और राजेश सारसर का कहना है कि नगर निगम के अधिकारी और प्रमाण पत्र तैयार करने के लिए गठित समितियां केवल आश्वासन दे रही हैं. कर्मचारियों को लगातार यही कहा जा रहा है कि प्रमाण पत्र बन जाएगा, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा. कर्मचारियों का दर्द है कि वे रोज तड़के 4 बजे अपने छोटे बच्चों और परिवारों को छोड़कर पूरे शहर की सफाई करने निकलते हैं, लेकिन अपने वैध हक और जरूरी दस्तावेज के लिए उन्हें दफ्तरों की चौखट नापनी पड़ रही है.
समितियों के बयानों में विरोधाभास और असमंजस
कर्मचारियों ने निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उनका आरोप है कि मामले के निपटारे के लिए बनी समितियों के सदस्य अलग-अलग बातें कह रहे हैं, जिससे पूरे मामले में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है. समय पर दस्तावेज न मिलने की सूरत में इन कर्मचारियों का भर्ती में शामिल होने का अवसर हमेशा के लिए छिन सकता है. तय समय सीमा से पहले यदि कागजात हाथ में नहीं आए, तो वे आवेदन फॉर्म जमा करने की पात्रता खो देंगे.
काम का बहिष्कार और हड़ताल की सीधी चेतावनी
समस्या का समाधान न होने पर कर्मचारियों ने कड़ा रुख अपनाने का ऐलान किया है. प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 13 तारीख की अंतिम समय सीमा से पहले अनुभव प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए, तो सभी 900 कर्मचारी सामूहिक रूप से काम का बहिष्कार कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि हड़ताल के कारण पूरे अलवर शहर की सफाई व्यवस्था चरमराती है और जगह-जगह कचरे के ढेर लगते हैं, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी.





















