राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थानीय स्तर पर कुमावत समाज ने राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ देने वाला एक बड़ा कदम उठाया है। क्षेत्र में आयोजित एक विशाल महापंचायत के मंच से समाज ने मुख्यधारा के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों से दूरी बनाने का खुला ऐलान कर दिया। इस महापंचायत में लगभग 84 गांवों के प्रतिनिधियों और समाज के लोगों की मौजूदगी दर्ज की गई, जहां पिछले दिनों हुए विवादों पर गहरा रोष जताया गया और भावी राजनीतिक भागीदारी को लेकर तीन बड़े संकल्प लिए गए।
तीन बड़े राजनीतिक संकल्प और निर्दलीय मैदान में उतरने की रणनीति
आयोजित महापंचायत के दौरान समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने साफ शब्दों में कहा कि वे अब आगामी चुनावी मुकाबलों में किसी भी स्थापित दल के भरोसे नहीं रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के साथ किसी भी प्रकार का राजनीतिक तालमेल नहीं रखा जाएगा। इसके स्थान पर समाज अपने स्तर पर स्वतंत्र यानी निर्दलीय उम्मीदवार खड़े करेगा।
इसके अलावा समाज ने यह भी तय किया कि उनके द्वारा मैदान में उतारा जाने वाला कोई भी प्रत्याशी मौजूदा जनप्रतिनिधियों के साथ मंच साझा नहीं करेगा और न ही उनके साथ खड़ा नजर आएगा। यह कदम समाज द्वारा अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान स्थापित करने और दोनों प्रमुख दलों के दबाव से पूरी तरह मुक्त होकर काम करने की मंशा को दर्शाता है।
19 लोगों पर दर्ज पुलिस केस बना रोष की मुख्य जड़
कुमावत समाज के इस कड़े रुख के पीछे हालिया समय में हुआ एक प्रशासनिक टकराव मुख्य कारण बनकर उभरा है। स्थानीय निकाय चुनाव के समय हुए एक उग्र विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में राजनगर पुलिस थाने में समाज के 19 व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए थे। समाज का स्पष्ट मानना है कि यह कानूनी कार्रवाई पूरी तरह अनुचित थी और इसी बात को लेकर समुदाय में गहरा असंतोष सुलग रहा था।
मुकदमे दर्ज होने के बाद समाज के लोगों ने राजसमंद पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के समक्ष अपनी मांगों को लेकर देर रात तक जोरदार धरना-प्रदर्शन भी किया था। उस दौरान प्रशासन को आंदोलन तेज करने की स्पष्ट चेतावनी दी गई थी। जब लंबे समय तक इस मामले में कोई राहत नहीं मिली, तो पूरे जिले के गांवों को लामबंद करते हुए इस महापंचायत का आयोजन किया गया।
स्थानीय राजनीति और आगामी चुनावों पर असर की संभावना
राजसमंद में हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनावों के बाद उभरी इस नाराजगी ने क्षेत्र की राजनीतिक हलचलों को तेज कर दिया है। 84 गांवों के कुमावत समाज द्वारा लिए गए इन तीन फैसलों के बाद आगामी पंचायत और स्थानीय चुनावों में मतदान के समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है। समाज की इस खुली घोषणा के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और दोनों प्रमुख पार्टियों के संगठनात्मक ढांचे पर सीधा दबाव बन गया है, जिससे आने वाले दिनों में चुनावी परिदृश्य काफी दिलचस्प होने वाला है।



















