भारतीय सेना की सबसे पुरानी और अनुभवी सैन्य टुकड़ियों में शामिल 13 ग्रेनेडियर्स 'गंगा जैसलमेर रीसाला' ने 3 अक्टूबर को जयपुर में अपनी 561 वर्ष पुरानी गौरवशाली परंपरा और अदम्य साहस को याद किया। वर्ष 1465 से चली आ रही इस ऐतिहासिक सैन्य इकाई की जड़ें रेगिस्तानी युद्ध कौशल से जुड़ी हैं। इस बटालियन में सेवा देने वाले सैनिकों का एक बड़ा हिस्सा राजस्थान के सीकर, झुंझुनू और नागौर जिलों से आता है, जो पीढ़ियों से इस रेजिमेंट का मान बढ़ाते रहे हैं।
ऊंटों की टुकड़ी से स्टैंडर्ड इन्फेंट्री तक का सफर
इस ऐतिहासिक सैन्य इकाई की शुरुआत मूल रूप से ऊंटों पर सवार होकर थार के बीहड़ों में रेगिस्तानी युद्ध लड़ने वाली एक विशेष टुकड़ी के रूप में हुई थी। समय बदलने के साथ-साथ युद्ध नीतियों और रक्षा तकनीक में भी बदलाव आया, जिसके चलते इस रिसाले का स्वरूप भी आधुनिक रूप लेता गया। आज यह इकाई भारतीय सेना की एक बेहद सशक्त स्टैंडर्ड इन्फेंट्री बटालियन के रूप में अपनी सेवाएं दे रही है और देश की रक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रही है।
1965 और 1971 के युद्धों में अदम्य पराक्रम
इस बटालियन के नाम सीमा सुरक्षा के कई अविस्मरणीय अध्याय दर्ज हैं। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान इस बटालियन ने प्रसिद्ध तनोट माता मंदिर की रक्षा की थी और सांचू तथा साधेवाला की अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य चौकियों को अपने कब्जे में लिया था। इसके बाद 1971 के भारत-पाक युद्ध में भी इकाई ने शानदार पराक्रम दिखाया। सैनिकों ने सीमा पार करते हुए पाकिस्तान के लगभग 300 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अधिकार जमाया और रणहाल तथा बिजनोट जैसे रणनीतिक स्थानों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया।
तीन पीढ़ियों का जुड़ाव और राज्यवर्धन राठौड़ का संदेश
जयपुर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। कर्नल राठौड़ का इस बटालियन के साथ गहरा पारिवारिक नाता है, क्योंकि उनके परिवार की तीन पीढ़ियों ने इस गौरवशाली रिसाले में सेवाएं दी हैं। उनका यह संबंध प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर 1965 तथा 1971 के ऐतिहासिक युद्धों तक फैला रहा है। बटालियन के शौर्य, परंपरा और बलिदान को नमन करते हुए कर्नल राठौड़ ने रेखांकित किया कि ऐसी गौरवमयी सैन्य विरासत महज इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली नई पीढ़ियों के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत है।





















