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अलवर में दहेज के लिए दो सगी बहनों को घर में बंद कर लोहे के हथियारों से पीटा, हालत गंभीरराजस्थान
9 सित॰ 2026, 12:38 am (3 घंटे पहले)· 1

अलवर में दहेज के लिए दो सगी बहनों को घर में बंद कर लोहे के हथियारों से पीटा, हालत गंभीर

अलवर के चिरावल माली गांव में ससुराल वालों ने दहेज की खातिर दो सगी बहनों पर लोहे के हथियारों से जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल दोनों बहनों का इलाज राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में चल रहा है।

राजस्थान के अलवर जिले में नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले चिरावल माली गांव से दहेज प्रताड़ना की एक बेहद खौफनाक वारदात सामने आई है। यहां ससुराल वालों ने लोहे के घातक हथियारों से वार कर दो सगी बहनों पर जानलेवा हमला कर दिया। वारदात को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने मकान का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद कर लिया ताकि पीड़िताएं भाग न सकें। इस हमले में दोनों बहनें लहूलुहान होकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और घायलों को संभाला। प्राथमिक सहायता के बाद पुलिस ने दोनों पीड़िताओं को इलाज के लिए अलवर के राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय भेजा, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है और चिकित्सकों की देखरेख में उपचार जारी है।

सात साल पहले हुआ था विवाह, लगातार हो रही थी दहेज की मांग

पीड़ित महिलाओं की पहचान बृजलता सैनी और वीरवती सैनी के रूप में हुई है, जो मूल रूप से सीकरी थाना क्षेत्र की निवासी हैं। दोनों सगी बहनों की शादी लगभग सात वर्ष पूर्व चिरावल माली गांव के रहने वाले दो भाइयों, अनिल और भूपेंद्र के साथ हुई थी। पीड़िताओं के अनुसार विवाह के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग लगातार दहेज की अतिरिक्त मांग को लेकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। प्रताड़ना में ससुर, सास, जेठ और जेठानी समेत परिवार के कई सदस्य शामिल थे।

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जनवरी में दिए थे दो लाख रुपये, फिर भी नहीं थमा उत्पीड़न

बृजलता सैनी ने बताया कि ससुराल वालों के अत्याचार और लगातार बढ़ती मांग से तंग आकर उनके मायके वालों ने इसी साल जनवरी महीने में दो लाख रुपये नकद ससुराल पक्ष को दिए थे। पीहर पक्ष को उम्मीद थी कि दो लाख रुपये देने के बाद प्रताड़ना का सिलसिला थम जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पैसे मिलने के बावजूद ससुराल वालों का लालच कम नहीं हुआ और वे लगातार और धन व सामान की मांग करते हुए दोनों बहनों का उत्पीड़न करते रहे।

घर का गेट बंद कर लोहे के हथियारों से किया खूनी हमला

वारदात वाले दिन सोमवार को ससुराल पक्ष के लोगों का विवाद फिर बढ़ गया। आरोप है कि ससुर विशंभर, सास फूलवती, जेठ जगदीश, जेठानी शकुंतला, जेठ सतीश, सतीश की पत्नी निरमा और उनकी बेटी प्रीति ने मिलकर साजिश रची। इन सभी आरोपियों ने पहले घर का मुख्य दरवाजा कसकर बंद कर दिया ताकि कोई बाहर न जा सके और न ही मदद के लिए अंदर आ सके। इसके बाद आरोपियों ने लोहे के हथियारों से दोनों बहनों पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। लोहे की छड़ों व हथियारों के वार से दोनों बहनें गंभीर रूप से चोटिल होकर जमीन पर गिर पड़ीं और खून से लथपथ हो गईं।

महिला अधिवक्ता की गुहार और पुलिस की जांच

पीड़ित बहनों में से बृजलता सैनी पेशे से नगर कोर्ट में एडवोकेट हैं, जबकि उनकी सगी बहन वीरवती सैनी एक गृहिणी हैं। अस्पताल में जेरे इलाज बृजलता सैनी ने अपने दर्द का बयां करते हुए कहा कि जब अदालत में प्रैक्टिस करने वाली एक महिला वकील भी अपने ही ससुराल में इस प्रकार की बर्बर हिंसा का शिकार हो सकती है, तो समाज की आम और मासूम महिलाओं की सुरक्षा और स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। पीड़िताओं ने मीडिया के जरिए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, स्थानीय पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है और दर्ज कराए गए आरोपों की सत्यता की पुष्टि की जा रही है।

सवाल-जवाब

अलवर के चिरावल माली गांव में क्या घटना हुई?
चिरावल माली गांव में ससुराल वालों ने घर का दरवाजा बंद कर दो सगी बहनों पर लोहे के हथियारों से जानलेवा हमला कर दिया।
इस हमले में घायल बहनों की पहचान क्या है?
घायल बहनों के नाम बृजलता सैनी (नगर कोर्ट में एडवोकेट) और वीरवती सैनी (गृहिणी) हैं।
पीड़ित बहनों की शादी कब और किससे हुई थी?
दोनों बहनों की शादी लगभग सात वर्ष पहले चिरावल माली गांव निवासी अनिल और भूपेंद्र के साथ हुई थी।
घटना के पीछे क्या मुख्य कारण बताया जा रहा है?
शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष की ओर से लगातार की जा रही अतिरिक्त दहेज की मांग और उत्पीड़न इसका मुख्य कारण है।
क्या पीड़िताओं के परिवार ने पहले कोई पैसा दिया था?
हां, प्रताड़ना से परेशान होकर परिजनों ने इसी साल जनवरी में ससुराल वालों को दो लाख रुपये नकद दिए थे।
घायलों का इलाज कहां चल रहा है और पुलिस क्या कदम उठा रही है?
दोनों बहनों का इलाज अलवर के राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में चल रहा है, जबकि पुलिस मामले की जांच और आरोपों की पुष्टि कर रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 3

Rohan Verma@rohan-verma·22 मिनट पहले

अलवर की यह घटना समाज में दहेज के दानव और घरेलू हिंसा के भयावह रूप को बेनकाब करती है। एक शिक्षित महिला और पेशे से अधिवक्ता होने के बावजूद बृजलता और उनकी बहन का सुरक्षित न होना कानून और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सात साल के लंबे उत्पीड़न और पुलिस जांच के बीच यह जरूरी है कि आरोपियों पर त्वरित कानूनी शिकंजा कसे, ताकि इस तरह के मामलों में एक कड़ा संदेश जाए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·21 मिनट पहले

अलवर की यह घटना इस बात का गंभीर उदाहरण है कि कानून और शिक्षा होने के बावजूद सामाजिक कुप्रथाएं कितनी गहरी हैं। जब एक महिला अधिवक्ता तक घरेलू हिंसा का शिकार हो जाती है, तो यह प्रणालीगत विफलता को दर्शाता है। पुलिस और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि निष्पक्ष जांच के साथ इस मामले में स्पीडी ट्रायल हो, अन्यथा इस तरह के जघन्य अपराधों में कमी लाना असंभव होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

अलवर की यह घटना कानून के शासन और महिला सुरक्षा पर सीधा सवालिया निशान लगाती है, जहाँ खुद एक महिला अधिवक्ता को दहेज के लिए इस हद तक प्रताड़ित किया गया। यह स्पष्ट करता है कि दहेज लोभी समाज और न्याय प्रणाली दोनों को चुनौती दे रहे हैं। पुलिस और अदालत की आगामी कार्रवाई में यह देखना होगा कि क्या सभी नामजद आरोपियों को त्वरित और कड़ी सजा मिलती है, जो ऐसे अपराधों के खिलाफ एक मजबूत मिसाल बन सके।

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