छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित बिलासपुर संभाग के भीतर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित 'भारतमाला परियोजना' के लिए की गई भू-अर्जन प्रक्रिया में व्यापक पैमाने पर घपलेबाज़ी का मामला सामने आया है। सड़क निर्माण हेतु अधिगृहीत की गई जमीनों के बदले वितरित किए गए मुआवजे में भारी वित्तीय गड़बड़ियों और धांधली के गंभीर आरोपों ने समूचे प्रशासनिक व राजनीतिक ढाँचे को झकझोर कर रख दिया है। इन कथित अनियमितताओं की पारदर्शी व निष्पक्ष पड़ताल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शासन ने ज़िला-वार विशेष जाँच समितियों की स्थापना की है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज
मामले में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए रायपुर स्थित राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) ने आधिकारिक तौर पर आपराधिक प्रकरण पंजीकृत कर लिया है। जांच एजेंसी द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(सी) के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 467 (फर्जी दस्तावेज़ तैयार करना), धारा 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से कूटरचना), धारा 471 (फर्जी दस्तावेज़ों को असली के रूप में इस्तेमाल करना) तथा धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के अंतर्गत मामला दर्ज कर वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बिलासपुर संभाग के चार प्रमुख जिलों तक फैली जांच की आंच
प्राप्त शिकायतों की सूक्ष्म एवं विस्तृत जाँच का दायरा बिलासपुर संभाग के चार मुख्य ज़िलों तक फैला हुआ है, जिनमें बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ शामिल हैं। ईओडब्ल्यू तथा एसीबी मुख्यालय रायपुर द्वारा 06 अगस्त और 24 अगस्त 2026 को प्रेषित शासकीय पत्रों के आधार पर इन सभी ज़िलों में दर्ज शिकायतों का गहन परीक्षण किया जा रहा है।
स्थानीय प्रभाव समाप्त करने के लिए क्रॉस-जाँच का अनोखा मॉडल
जाँच की संपूर्ण प्रक्रिया को बाहरी दबाव या किसी भी प्रकार के प्रभाव से मुक्त रखने हेतु एक विशेष प्रशासनिक रणनीति तैयार की गई है। यद्यपि गठित टीमों में राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को ही शामिल किया गया है, परंतु मुख्य रणनीति यह है कि कोई भी अधिकारी अपने ही ज़िले के मामलों की पड़ताल नहीं करेगा। नई व्यवस्था के तहत एक ज़िले का राजस्व अमला दूसरे ज़िले में हुए भूमि अर्जन, नामांतरण और मुआवजा राशि वितरण से संबंधित अभिलेखों व फाइलों की गहन छानबीन करेगा।
राजस्व महकमे में हलचल और कड़ी कार्रवाई की संभावना
इस अंतर-ज़िला अदला-बदली व्यवस्था (क्रॉस-जाँच) से स्थानीय अधिकारियों की संभावित साठगांठ या व्यक्तिगत प्रभाव की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इस अप्रत्याशित कदम के लागू होते ही बिलासपुर संभाग के संपूर्ण राजस्व महकमे में हलचल का माहौल है। वर्षों से बंद पड़ी फाइलों और दस्तावेज़ों को दोबारा खोला जाने लगा है, जिससे आने वाले समय में कई रसूखदार अधिकारियों एवं प्रभावशाली व्यक्तियों पर दंडात्मक कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है।




















