राजस्थान के निकाय चुनाव के दौरान करौली से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने प्रशासनिक तत्परता की मिसाल पेश कर दी। नगर परिषद करौली के वार्ड नंबर 48 में मंगलवार को हुई तेज बारिश ने मतदान केंद्र तक जाने वाला रास्ता ही डुबो दिया, फिर भी मतदान दल तय समय पर अपनी ड्यूटी निभाने पहुंच गया, वो भी नाव में सवार होकर। मंगलवार को करौली में मानसूनी बारिश के बीच हुए इस घटनाक्रम ने आम मतदाताओं के साथ-साथ प्रशासनिक अमले का ध्यान भी अपनी ओर खींचा।
भद्रावती नदी में उफान से बंद हुआ रास्ता
वार्ड नंबर 48 में मतदान केंद्र संख्या 59, यानी राजकीय प्राथमिक विद्यालय, कल्लादह में बनाया गया है। मंगलवार को हुई भारी बारिश के बाद पास बहने वाली भद्रावती नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और नदी उफान पर आ गई। इससे मतदान केंद्र तक पहुंचने वाला सामान्य सड़क मार्ग पूरी तरह पानी में डूब गया। सुबह-सुबह जब मतदान दल केंद्र की ओर रवाना होने की तैयारी में था, तभी पता चला कि सड़क का रास्ता अब इस्तेमाल के लायक नहीं बचा है।
सड़क बंद तो जलमार्ग बना विकल्प
रास्ता बंद होने की खबर मिलते ही प्रशासन ने देर नहीं की। सड़क मार्ग की जगह नदी के रास्ते ही मतदान केंद्र तक पहुंचने का फैसला लिया गया और इसके लिए नाव का इंतजाम किया गया। मतदान सामग्री और कर्मचारियों को नाव में बिठाकर भद्रावती नदी पार कराई गई। यह पूरा घटनाक्रम पुलिस बल की मौजूदगी में हुआ, जिससे मतदान दल की सुरक्षा को लेकर कोई कमी न रह जाए। नाव से नदी पार करते हुए मतदान दल का यह सफर आसान नहीं था, क्योंकि बारिश के बाद पानी की रफ्तार सामान्य से कहीं ज्यादा तेज थी।
होमगार्ड और बीएलओ ने निभाई अहम भूमिका
इस पूरे अभियान में होमगार्ड के जवानों और बीएलओ ने बड़ी भूमिका निभाई। नाव खेकर मतदान दल को सुरक्षित रूप से दूसरे किनारे तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इन्हीं लोगों ने संभाली। बढ़े हुए पानी के बीच हर कदम फूंक-फूंककर रखा गया, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके। पुलिस, होमगार्ड और बीएलओ के आपसी तालमेल से ही यह मुश्किल सफर बिना किसी परेशानी के पूरा हो सका।
एसडीएम राकेश कुमार रावत के मार्गदर्शन में तैयार हुई योजना
इस पूरे इंतजाम की कमान एसडीएम राकेश कुमार रावत ने संभाली। उनके मार्गदर्शन में ही तय हुआ कि सड़क मार्ग बंद होने की स्थिति में मतदान दल को नाव के जरिए केंद्र तक भेजा जाएगा। प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश की कि खराब मौसम और नदी में बढ़े पानी की वजह से मतदान प्रक्रिया पर कोई असर न पड़े। एसडीएम रावत की निगरानी में हर छोटी-बड़ी जरूरत का पहले से ध्यान रखा गया, जिससे मतदान दल को केंद्र तक पहुंचने में देरी न हो।
बारिश भी नहीं रोक पाई मतदान की तैयारी
नगरीय निकाय चुनावों में हर वार्ड के मतदाता को तय समय के भीतर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का मौका मिलता है, और इसके लिए मतदान केंद्र पर तय वक्त पर मतदान दल का पहुंचना जरूरी होता है। करौली के वार्ड नंबर 48 में सामने आई यह घटना बताती है कि प्रशासन के लिए मौसम जैसी अप्रत्याशित बाधाएं भी मतदान प्रक्रिया रोकने का कारण नहीं बन सकतीं, बशर्ते समय रहते सही फैसला लिया जाए। करौली की यह तस्वीर दिखाती है कि मौसम की मार भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के आड़े नहीं आ सकी। एक तरफ नदी में लगातार बढ़ता पानी चुनौती बना हुआ था, दूसरी तरफ तय समय पर मतदान शुरू कराने की जिम्मेदारी प्रशासन के कंधों पर थी। मतदान केंद्र संख्या 59 तक नाव के सहारे पहुंचा दल इस बात का सबूत बना कि अगर प्रशासनिक तैयारी मजबूत हो, तो प्राकृतिक बाधाएं भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। पानी उतरने या सड़क फिर से खुलने का इंतजार करने के बजाय प्रशासन ने फौरन फैसला लेकर मतदान प्रक्रिया को बिना रुकावट आगे बढ़ाया। करौली के वार्ड नंबर 48 की यह घटना अब प्रशासनिक तत्परता और चुनावी जिम्मेदारी की एक अलग मिसाल के तौर पर देखी जा रही है।



















