मानसून में उमस और नमी बढ़ते ही घरों की छत, सीढ़ियां, बाहरी दीवारें और फर्श पर हरे-काले रंग की काई जमने लगती है। जिन कोनों में धूप नहीं पहुंचती और पानी घंटों तक ठहरा रहता है, वहां यह परत सबसे तेज़ी से फैलती है और बरसात खत्म होने तक बढ़ती ही चली जाती है।
काई इतनी खतरनाक क्यों मानी जाती है
ऊपर से यह मामूली गंदगी जैसी दिखती है, लेकिन गीली अवस्था में यह फर्श और सीढ़ियों को शीशे जैसा फिसलन भरा बना देती है, जिससे गिरने और चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से इसे नज़रअंदाज़ करने के बजाय समय रहते साफ कर देना ज्यादा समझदारी है, और इसके लिए बाजार के महंगे क्लीनर की भी जरूरत नहीं, रसोई में मौजूद कुछ चीजें ही काम आ जाती हैं।
बेकिंग सोडा से घोल बनाकर करें शुरुआत
सबसे पहले जिस जगह काई जमी है वहां से सूखी मिट्टी और गंदगी को ब्रश से हटा लें, तभी घोल असर दिखाएगा। इसके बाद एक बाल्टी पानी में थोड़ा-सा बेकिंग सोडा घोलकर पेस्ट जैसा घोल तैयार करें और उसे काई वाले हिस्से पर डालकर कुछ मिनट के लिए यूं ही छोड़ दें ताकि परत ढीली पड़ जाए। इसके बाद किसी पुराने और कड़े ब्रश से सतह को अच्छी तरह रगड़ें और आखिर में साफ पानी से धो डालें, काई निकलकर अलग हो जाएगी।
ज्यादा गहरी जमी काई के लिए सफेद सिरका आजमाएं
अगर काई बहुत पुरानी और मोटी परत में जम गई है तो सफेद सिरके को पानी में मिलाकर उसका घोल भी उतना ही असरदार साबित होता है। इस घोल को सतह पर फैलाकर कुछ देर के लिए छोड़ें, फिर ब्रश से रगड़कर पूरी सतह साफ कर लें। एक बात का खास ख्याल रखें, सिरके को कभी भी ब्लीच या किसी और केमिकल के साथ न मिलाएं, ऐसा करने पर जहरीली और खतरनाक गैस बन सकती है जो सेहत के लिए नुकसानदेह है।
छोटी जगह के लिए गर्म पानी और नमक भी कारगर
अगर काई सीमित और छोटी जगह पर ही जमी है, तो गर्म पानी में नमक घोलकर बना घोल भी इस्तेमाल किया जा सकता है, गर्म पानी परत को जल्दी ढीला कर देता है। घोल डालने के बाद ब्रश से रगड़कर सतह साफ करें। दीवार साफ करते समय इस बात का पूरा ध्यान रखें कि पानी की एक बूंद भी करंट वाले स्विच-बोर्ड, वायरिंग या सॉकेट के आसपास न पहुंचे, वरना झटका लगने का खतरा हो सकता है।
सफाई से पहले ये सावधानियां जरूर बरतें
काई हटाते वक्त हाथों में रबर के दस्ताने और पैरों में फिसलन-रोधी जूते जरूर पहनें, ताकि खुद फिसलकर चोट न लगे। छत पर सफाई करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि वहां ऊंचाई से गिरने का खतरा रहता है। अगर काई की परत बहुत मोटी हो गई है या दीवार में लगातार सीलन बनी रहती है, तो घरेलू उपायों की जगह किसी विशेषज्ञ से मदद लेना ही बेहतर विकल्प है।



















