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अनादरा के नरेश कुमार ने आरएएस 2024 में पाई सफलता, ऑटो चालक के घर से निकलकर बने गांव के पहले तहसीलदारराजस्थान
8 अक्तू॰ 2026, 7:13 pm (2 घंटे पहले)· 0

अनादरा के नरेश कुमार ने आरएएस 2024 में पाई सफलता, ऑटो चालक के घर से निकलकर बने गांव के पहले तहसीलदार

सिरोही जिले के अनादरा गांव निवासी नरेश कुमार ने आरएएस 2024 परीक्षा उत्तीर्ण कर राजस्थान तहसीलदार सेवा हासिल की। इससे पहले वह पटवारी और वीडीओ पदों पर भी चयनित हो चुके थे।

कठिन परिस्थितियों और सीमित साधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है, इसे सिरोही जिले के अनादरा गांव निवासी नरेश कुमार ने सच साबित किया है। एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले नरेश कुमार ने प्रतिष्ठित आरएएस 2024 भर्ती परीक्षा में शानदार सफलता प्राप्त की है। इस चयन के आधार पर उन्हें राजस्थान तहसीलदार सेवा आवंटित की गई है, जिसके साथ ही वह अपने समूचे गांव के पहले तहसीलदार बन गए हैं। इस गौरवशाली उपलब्धि के बाद जब वह अपने गृह नगर अनादरा पहुंचे, तो स्थानीय ग्रामीणों और समाज के लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका भव्य और आत्मीय स्वागत किया।

माता-पिता के संघर्ष और मजदूरी ने बनाया अफसर

नरेश कुमार के पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उनके पिता गोपाराम मेघवाल आजीविका चलाने के लिए ऑटो रिक्शा चलाते हैं। घर की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य होने के कारण उनके माता-पिता ने बेटे की उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्षों तक हाड़-तोड़ मजदूरी भी की। बेटे को प्रशासनिक सेवा का बड़ा अधिकारी बनता देखकर परिवार के सदस्यों की आंखें खुशी से छलक उठीं। नरेश की इस कामयाबी ने न केवल परिवार बल्कि पूरे अंचल का मान बढ़ाया है।

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अनादरा से दिल्ली यूनिवर्सिटी तक का सफर

अपनी प्रारंभिक पढ़ाई के दौरान नरेश कुमार ने अनादरा गांव के ही स्कूल से बुनियादी शिक्षा पूरी की। गांव से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च अध्ययन के लिए दिल्ली का रुख किया और देश के प्रतिष्ठित संस्थान दिल्ली यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। स्नातक डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने पूरी लगन और अनुशासन के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में खुद को समर्पित कर दिया।

प्रतियोगी परीक्षाओं में हैट्रिक: पटवारी और वीडीओ के बाद तहसीलदार

प्रशासनिक सेवाओं में चयन से पूर्व भी नरेश कुमार ने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया था। आरएएस 2024 से पहले उन्होंने दो अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं को भी पास किया था, जहां उनका चयन पटवारी और विलेज डेवलपमेंट ऑफिसर (VDO) के पद पर हो चुका था। सरकारी नौकरियों की इस हैट्रिक के बाद उन्होंने अपनी मंजिल राजस्थान तहसीलदार सेवा के रूप में पाई। नरेश कुमार ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता के त्याग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अपनी निरंतर मेहनत को दिया है। उनकी यह उपलब्धि गांव के अन्य नौजवानों को भी आगे बढ़ने का हौसला दे रही है।

सवाल-जवाब

नरेश कुमार का चयन किस परीक्षा के माध्यम से हुआ है?
नरेश कुमार का चयन आरएएस 2024 भर्ती परीक्षा के माध्यम से हुआ है, जिसमें उन्हें राजस्थान तहसीलदार सेवा आवंटित हुई है।
नरेश कुमार किस जिले और गांव के निवासी हैं?
नरेश कुमार राजस्थान के सिरोही जिले के अनादरा गांव के निवासी हैं।
आरएएस से पहले नरेश कुमार ने कौन सी परीक्षाएं पास की थीं?
आरएएस से पूर्व उनका चयन पटवारी और विलेज डेवलपमेंट ऑफिसर (VDO) के पद पर भी हो चुका था।
नरेश कुमार ने अपनी स्नातक की पढ़ाई कहां से पूरी की?
नरेश कुमार ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया है।
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टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·25 मिनट पहले

ऑटो चलाने वाले पिता के बेटे का दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़कर सीधा तहसीलदार बनना गजब है। माता-पिता की सालों की मेहनत का ऐसा फल देखकर सचमुच आँखें नम हो जाती हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·44 मिनट पहले

पिता ऑटो चलाते हैं और बेटा सीधे तहसीलदार बन गया, यही असली मेहनत का फल है। डीयू से पढ़ाई करके गांव का नाम रोशन कर दिया भाई ने।

Arjun Mehta@arjun-mehta·43 मिनट पहले

रवि जी, बिल्कुल सही कहा आपने। ऑटो वाले पिता के बेटे का डीयू से पढ़कर तहसीलदार बनना वाकई प्रेरणादायक है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

पिता ऑटो चलाते हैं और बेटा तहसीलदार बन गया, यह मेहनत का असली फल है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पर क्या इससे पहले भी उनके परिवार से किसी ने कभी इतनी बड़ी पढ़ाई की थी या वो दिल्ली यूनिवर्सिटी जाने वाले पहले थे?

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