राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में शुक्रवार की देर रात एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सामने आया, जब एक रिहायशी बस्ती में अचानक विशालकाय मगरमच्छ दाखिल हो गया. गढ़ी इलाके के अंतर्गत आने वाले आदर्श गांव बोरी के एक मोहल्ले में तड़के लगभग 3 बजे करीब 6 फीट लंबा मगरमच्छ रेंगता हुआ देखा गया. उस वक्त गांव के लोग गहरी नींद में थे और एक परिवार अपने मकान के बाहर खुले में खाट बिछाकर आराम कर रहा था. मगरमच्छ धीरे-धीरे उसी मकान के मुख्य द्वार की तरफ बढ़ रहा था, जिससे वहां सो रहे लोगों पर सीधा खतरा मंडराने लगा تھا.
जागते युवाओं की नजर पड़ी तो टला अनहोनी का खतरा
रात के सन्नाटे में गांव की गली से गुजर रहे कुछ स्थानीय नौजवानों की नजर अचानक सड़क पर रेंगते हुए इस जलीय जीव पर पड़ी. छह फीट लंबे मगरमच्छ को मकान की चौखट के बेहद करीब और सोते हुए लोगों की तरफ बढ़ता देख युवकों ने तुरंत समझदारी दिखाई. उन्होंने बिना समय गंवाए तेज आवाज में चिल्लाकर खाट पर सो रहे परिवार के सदस्यों को जगाया और सुरक्षित दूरी बनाने को कहा. युवाओं के अलर्ट करने से परिवार के लोग फौरन सुरक्षित स्थान पर पहुंचे, जिससे एक बेहद भयानक हादसा होने से पहले ही टल गया. इसके बाद मोहल्ले में लोगों का जमावड़ा लग गया और पूरे इलाके में भय का माहौल बन गया.
परतापुर गौशाला टीम और पुलिस ने मिलकर चलाया बचाव अभियान
स्थिति की नजाकत को भांपते हुए ग्रामीणों ने तुरंत फोन के माध्यम से रेस्क्यू दल को मामले की सूचना दी. खबर मिलते ही परतापुर गौशाला की रेस्क्यू टीम आवश्यक उपकरणों के साथ मौके पर पहुंच गई. घटना की जानकारी मिलने पर गढ़ी थाना पुलिस और अरथुना थाना पुलिस का जाब्ता भी मौके पर मुस्तैद हो गया. बस्ती के बीचों-बीच मगरमच्छ की मौजूदगी के कारण अभियान में अत्यधिक सावधानी बरती गई, ताकि न तो किसी नागरिक को चोट पहुंचे और न ही वन्यजीव को कोई नुकसान हो. रेस्क्यू दल ने काफी देर की कड़ी मशक्कत के बाद रस्सियों और जाल की सहायता से छह फीट लंबे मगरमच्छ को पूरी तरह काबू में कर लिया.
नदी में छोड़ा गया मगरमच्छ, गांव वालों ने ली राहत
सफलतापूर्वक पकड़े जाने के बाद मगरमच्छ को बस्ती से दूर ले जाकर सुरक्षित रूप से नदी के प्राकृतिक जलक्षेत्र में छोड़ दिया गया. इस पूरे बचाव कार्य में राहुल पंचाल, परेश डिंडोर, कृष्णा खराड़ी, नयन डाबी, नितेश कलाल, रामा, गिरीश खांट के साथ ही स्थानीय पार्षद गायत्री खांट और पुलिस प्रशासन ने सक्रिय भूमिका निभाई. बस्ती से मगरमच्छ के हटते ही गांव के लोगों ने सुकून महसूस किया. ग्रामीणों की सजगता और त्वरित राहत कार्य के कारण बिना किसी जनहानि के यह खतरनाक रेस्क्यू पूरा हो सका.

















