मणिपुर के पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह ने बुधवार को कामजोंग जिले का दौरा किया। इस उच्चस्तरीय दौरे का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में बिगड़े हुए सुरक्षा हालातों की समीक्षा करना और तमाम तैनात सुरक्षाबलों के बीच आपसी तालमेल को और अधिक मजबूत करना था। इस दौरान उनके साथ कानून-व्यवस्था के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक और सीमा सुरक्षा बल मुख्यालय मणिपुर के उप महानिरीक्षक भी मौजूद रहे।
अधिकारियों और जवानों के साथ उच्चस्तरीय चर्चा
दौरे की शुरुआत में शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने जिले में तैनात पुलिस कर्मियों के साथ विस्तृत बातचीत की। उन्होंने इलाके में मौजूदा कानून-व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन किया। इसके बाद अधिकारियों ने 11 असम राइफल्स और सीमा सुरक्षा बल के प्रतिनिधियों के साथ एक संयुक्त सुरक्षा समन्वय बैठक आयोजित की। इस बैठक में सुरक्षा परिदृश्य का मूल्यांकन किया गया और क्षेत्र में तैनात विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद
शीर्ष पुलिस नेतृत्व ने अपनी यात्रा के अगले चरण में कुकी और नागा नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस दौरान अधिकारियों ने दोनों समुदायों के लोगों की चिंताओं को ध्यान से सुना और उनकी समस्याओं पर विचार-विमर्श किया। पुलिस प्रमुख ने सभी प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए हरसंभव सहायता और सहयोग प्रदान किया जाएगा।
ताजा आगजनी की घटनाएं और पुरानी झड़पें
यह महत्वपूर्ण दौरा ऐसे समय में हुआ है जब कामजोंग जिले में एक बार फिर हिंसा और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं। हाल ही में तड़के खोइकाई कुकी गांव में अज्ञात उग्रवादियों द्वारा कई घरों में आग लगाने की घटना घटी। इस ताजी हिंसा ने पूरे इलाके में तनाव को और बढ़ा दिया है, जिसके चलते पुलिस प्रशासन को तुरंत हरकत में आना पड़ा।
पिछले हफ्तों के हिंसक संघर्ष
जिले में पिछले सप्ताह भी सुरक्षा संबंधी गंभीर घटनाएं दर्ज की गई थीं। उस दौरान संदिग्ध उग्रवादियों ने चासाद नामक कुकी पहाड़ी गांव पर हमला बोला था और कम से कम 15 मकानों को आग के हवाले कर दिया था। इस भीषण आगजनी के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों को अपना घर छोड़कर नजदीकी जंगलों और एक सेना शिविर में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
गोलीबारी में हुई मौतों का सिलसिला
इस आगजनी की घटना से ठीक पहले दिन के समय इसी गांव पर एक और हमला हुआ था। उस हमले में संदिग्ध उग्रवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी, जिसमें एक कुकी नागरिक की मौत हो गई थी और चार अन्य लोग गंभीर रूप से गोली लगने से घायल हो गए थे। लगातार हो रही इन वारदातों के बाद से ही पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया जा रहा है।



















