भीलवाड़ा में मानसून का सीजन आते ही रिहायशी इलाकों और खेतों में वन्यजीवों की आवाजाही में तेजी आ गई है। लगातार हो रही बारिश के कारण जमीन के अंदर बने बिलों और ठिकानों में पानी भर जाने के चलते सांप और अन्य सरीसृप जीव भोजन तथा सुरक्षित ठिकाने की तलाश में बाहर का रुख करने लगे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला भीलवाड़ा जिले के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रामपुरिया से सामने आया है, जहां एक किसान के खेत में करीब 10 फीट लंबा अजगर निकल आने से आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया और सनसनी फैल गई।
यह घटना उस समय सामने आई जब स्थानीय किसान नारायण गुर्जर के खेत में कुछ महिलाएं रोजाना की तरह मवेशियों के लिए चारा काटने का काम कर रही थीं। इसी दौरान उनकी नजर अचानक चारे के ढेर के बीच छिपे बैठे एक विशालकाय अजगर पर पड़ी। इतने बड़े जीव को अपने इतने करीब देखकर महिलाओं के होश उड़ गए और वहां भारी डर व अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए किसान नारायण गुर्जर ने किसी भी तरह की लापरवाही या जोखिम न उठाते हुए तुरंत समझदारी का परिचय दिया और बिना किसी देरी के मामले की जानकारी वन विभाग को दी।
सूचना मिलते ही वन विभाग की त्वरित रेस्क्यू टीम बिना वक्त गंवाए घटनास्थल के लिए रवाना हो गई। वनपाल चंद्रपाल सिंह राणावत के स्पष्ट निर्देशों के तहत कार्रवाई करते हुए टीम ने खेत में पहुंचकर अजगर की तलाश का अभियान शुरू किया। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने गहन छानबीन के बाद चारे के बीच छिपे बैठे उस अजगर को सफलताપૂર્વक ढूंढ निकाला। वनरक्षक दिनेश कुमार रेगर ने बेहद सावधानी और सुरक्षित तरीके से मोर्चा संभालते हुए अजगर का सफल रेस्क्यू किया। राहत की बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी ग्रामीण या अन्य व्यक्ति को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा।
विशालकाय अजगर के सुरक्षित रूप से पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने चैन की सांस ली और डर का वह माहौल खत्म हुआ जो उसे देखकर फैल गया था। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में वनरक्षक दिनेश कुमार रेगर के साथ-साथ वनरक्षक भागचंद बैरवा, वन मित्र शंभू रैगर, नागरिक सुरक्षा विभाग के स्वयंसेवक तथा वन्यजीव रक्षक नारायण लाल बेरवा शामिल थे। इस अभियान की खास बात यह रही कि अजगर को पकड़ने में स्थानीय ग्रामीणों ने भी पूरी तत्परता के साथ वन विभाग की टीम का भरपूर सहयोग किया, जिससे ऑपरेशन समय पर पूरा हो सका।
अजगर के सफल और सुरक्षित रेस्क्यू के बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर मौजूद सभी ग्रामीणों को इकट्ठा कर वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक किया। वनरक्षक दिनेश कुमार रेगर ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए समझाया कि यदि भविष्य में खेतों में या आसपास कभी भी कोई अन्य वन्यजीव, अजगर या कोई भी खतरनाक जंगली जानवर दिखाई दे, तो तुरंत उसकी सूचना वन विभाग को दी जानी चाहिए। ग्रामीणों से यह खास अपील की गई कि वे खुद से उस वन्यजीव को पकड़ने की कोशिश बिल्कुल न करें और न ही उसे किसी प्रकार का शारीरिक नुकसान पहुंचाएं।
अधिकारियों ने ग्रामीणों को यह भी समझाया कि वन्यजीव हमारी प्रकृति और पर्यावरण का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए यह हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि हम इन बेजुबान जीवों की सुरक्षा करें। वन विभाग की समय पर मिली तत्परता और स्थानीय ग्रामीणों के आपसी सहयोग से उस 10 फीट लंबे अजगर को सुरक्षित बचा लिया गया, जिससे लोगों के मन में बैठा हुआ अनावश्यक डर पूरी तरह से समाप्त हो गया और सभी ने राहत महसूस की।





















