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बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में डॉक्टरों का कमाल, घुटने के आर-पार हुई 28 इंच की लोहे की रॉड निकाल बचाई मरीज की टांगराजस्थान
3 अक्तू॰ 2026, 11:28 am (22 मिनट पहले)· 0

बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में डॉक्टरों का कमाल, घुटने के आर-पार हुई 28 इंच की लोहे की रॉड निकाल बचाई मरीज की टांग

सड़क हादसे में घड़साना निवासी पप्पी खान के बाएं घुटने में त्रिकोणीय लोहे की रॉड घुस गई थी, जिसे पीबीएम ट्रॉमा सेंटर की टीम ने दो घंटे के जटिल ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

राजस्थान के बीकानेर स्थित पीबीएम ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण शल्य चिकित्सा को अंजाम देकर 40 वर्षीय व्यक्ति के पैर को कटने से बचा लिया है। सड़क हादसे का शिकार हुए मरीज के बाएं घुटने के पार्श्व भाग में 28 इंच लंबी लोहे की नुकीली रॉड आर-पार घुस गई थी। डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि रॉड निकालने के दौरान पैर की मुख्य नसें या रक्त वाहिकाएं कट न जाएं। करीब दो घंटे तक चले सघन ऑपरेशन के बाद सर्जनों ने रॉड को बाहर निकाल दिया और मरीज की नसें व घुटना पूरी तरह सुरक्षित हैं।

सड़क हादसे के बाद गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे थे पप्पी खान

घड़साना क्षेत्र के 12 एमएलडी गांव के रहने वाले 40 वर्षीय पप्पी खान गुरुवार को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। हादसे की तीव्रता इतनी अधिक थी कि एक त्रिकोणीय आकार की लोहे की छड़ उनके बाएं घुटने के किनारे से भीतर धंस गई। घायल अवस्था में उन्हें तुरंत पीबीएम ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी यूनिट में लाया गया। उस समय घुटने में अत्यधिक सूजन आ चुकी थी, विकृति साफ दिख रही थी और खून बह रहा था, यद्यपि मरीज होश में बना हुआ था।

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रक्त वाहिकाओं और नसों को बचाने के लिए बनाई गई विशेष सर्जिकल टीम

पीबीएम ट्रॉमा सेंटर के निदेशक और अस्थिरोग विभागाध्यक्ष डॉ. बीएल खजोटिया ने मरीज की हालत देखकर तुरंत जरूरी चिकित्सकीय तैयारियां शुरू करवाईं। घुटने में फंसी रॉड लगभग 4 सेंटीमीटर चौड़ी थी। जरा सी भी चूक से घुटने के लिगामेंट, मुख्य नसें और प्रमुख नसें हमेशा के लिए कट सकती थीं, जिससे मरीज जीवन भर के लिए दिव्यांग हो सकता था। इस जोखिम को देखते हुए कार्डियो थोरेसिक एवं वेस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विशेषज्ञ डॉ. सर्वेश को भी सर्जरी टीम में शामिल किया गया।

दो घंटे चली जटिल सर्जरी और सुरक्षित निकाला गया 28 इंच का सरिया

ऑपरेशन थियेटर में ले जाने से पूर्व चिकित्सकों ने मरीज के घुटने की हड्डी, लिगामेंट और नसों की स्थिति का गहन मुआयना किया। इसके बाद रात लगभग 8:30 बजे मरीज को इमरजेंसी ओटी में शिफ्ट किया गया। डॉ. बीएल खजोटिया और सीटीवीएस सर्जन डॉ. सर्वेश के नेतृत्व में डॉक्टरों ने अत्यंत सतर्कता बरतते हुए शल्य क्रिया शुरू की। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद 28 इंच लंबी और 4 सेंटीमीटर चौड़ी त्रिकोणीय लोहे की छड़ को सुरक्षित बाहर खींच लिया गया।

घाव की ड्रेसिंग पूरी, मरीज की स्थिति स्थिर

रॉड निकालने के फौरन बाद डॉक्टरों ने अंदरूनी घाव की पूरी जांच की और आवश्यक मेडिकल प्रक्रिया पूरी कर ड्रेसिंग की। डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि ऑपरेशन के बाद मरीज की शारीरिक स्थिति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है। उनके पैर की नसें सामान्य रूप से काम कर रही हैं और घुटने की कार्यक्षमता भी बरकरार रखी गई है।

ऑपरेशन को अंजाम देने वाली डॉक्टरों की टीम

इस जीवनरक्षक सर्जरी में डॉ. बीएल खजोटिया और डॉ. सर्वेश के अलावा डॉ. विक्रांत, डॉ. कमल और डॉ. राजेंद्र मीना शामिल रहे। वहीं एनेस्थीसिया विभाग की ओर से डॉ. हर्षिता तथा डॉ. अनीश ने महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग दिया। दोनों विभागों के आपसी समन्वय और तत्परता के चलते ही गंभीर रूप से घायल मरीज का पैर सुरक्षित बच सका।

सवाल-जवाब

पीबीएम अस्पताल में किस मरीज के घुटने से रॉड निकाली गई?
घड़साना के 12 एमएलडी निवासी 40 वर्षीय पप्पी खान के घुटने से डॉक्टरों ने रॉड निकाली।
घुटने में धंसी लोहे की रॉड का आकार क्या था?
रॉड 28 इंच लंबी, त्रिकोणीय आकार की और लगभग 4 सेंटीमीटर चौड़ी थी।
ऑपरेशन में कितना समय लगा?
डॉक्टरों की टीम ने लगभग दो घंटे चले जटिल ऑपरेशन के बाद रॉड को बाहर निकाला।
इस सर्जरी का नेतृत्व किन डॉक्टरों ने किया?
सर्जरी का नेतृत्व ट्रॉमा सेंटर निदेशक डॉ. बीएल खजोटिया और सीटीवीएस सर्जन डॉ. सर्वेश ने किया।
ऑपरेशन के बाद मरीज की क्या स्थिति है?
मरीज की हालत स्थिर है, घुटना सुरक्षित है और पैर की नसें पूरी तरह काम कर रही हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 मिनट पहले

सालों पहले जब मैं खुद एक हादसे के बाद ट्रॉमा वार्ड में था, तब डॉक्टरों को ऐसे ही अपनी जान की बाजी लगाते देखा था। पप्पी खान की टांग बचना किसी चमत्कार से कम नहीं है, डॉक्टरों को सलाम।

Rohan Verma@rohan-verma·6 मिनट पहले

करन भाई, वाकई वो 28 इंच की रॉड निकालना कितना डरावना रहा होगा, सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं!

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