पिछले साल के अंत में शुरू हुई अंतर्राज्यीय पुलिस की तलाश आखिरकार एक बड़े मुकाम पर पहुंच गई है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सीनियर एडवोकेट के घर हुई करोड़ों की सनसनीखेज डकैती के मामले में जांच एजेंसियों को सात महीने बाद एक अहम कामयाबी मिली है। कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहे एक शातिर अपराधी को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया है। तीस साल के इस आरोपी की पहचान शाहरुख कुरैशी के रूप में हुई है। जांचकर्ताओं का कहना है कि यह अपराधी पुलिस से बचने के लिए सिर्फ छिपा हुआ ही नहीं था, बल्कि एक और बड़े अपराध को अंजाम देने की पूरी तैयारी कर चुका था। इस गिरफ्तारी से उस मामले को सुलझाने में बड़ी मदद मिली है जिसने वीआईपी इलाकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
राजस्थान में रची जा रही नई साजिश नाकाम
इस बहुचर्चित मामले में सबसे बड़ी सफलता जयपुर के झोटवाड़ा थाना क्षेत्र से मिली। झोटवाड़ा पुलिस की स्पेशल टीम के सदस्य मालीराम और बलराम को मुखबिरों के जरिए कुछ बेहद अहम खुफिया जानकारियां मिली थीं। इसी सटीक सूचना के आधार पर पुलिस दल ने इक्कीस जुलाई को नांगल पुलिया इलाके में एक गुप्त अभियान चलाया। मूल रूप से भोपाल के निसादपुरा इलाके का रहने वाला शाहरुख कुरैशी गिरफ्तारी से बचने के लिए इसी इलाके में एक किराये के मकान में चुपचाप रह रहा था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने उसके पास से एक देसी कट्टा भी बरामद किया है। खुफिया रिपोर्ट से यह बात भी सामने आई है कि यह आरोपी जयपुर के कई बड़े और अमीर घरों की रेकी कर चुका था और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहा था, लेकिन पुलिस की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई ने उसके खतरनाक मंसूबों पर पानी फेर दिया।
कुत्तों को शांत करने की खौफनाक तरकीब
यह कुख्यात गिरोह पच्चीस और छब्बीस दिसंबर दो हजार पच्चीस की दरमियानी रात को तब सुर्खियों में आया था, जब इन्होंने भोपाल में एक जाने-माने वकील के घर को निशाना बनाया था। शुरुआत में जांच अधिकारियों के लिए यह एक पहेली थी कि अपराधी घर के पहरेदार कुत्तों को बिना भड़काए अंदर कैसे घुस गए। हालांकि, बाद की गहन तफ्तीश में एक बेहद आसान लेकिन खौफनाक रणनीति का खुलासा हुआ। योजना के मुताबिक, इस गैंग के सदस्य अपने साथ मांस के टुकड़े लेकर गए थे। उन्होंने कुत्तों को वह मांस खिला दिया, जिससे जानवर पूरी तरह शांत हो गए और उनका ध्यान भटक गया। कुत्तों के शांत होते ही बाकी अपराधी घर में दाखिल हुए और अठारह लाख रुपये कैश के साथ-साथ सोने और चांदी के भारी मात्रा में आभूषण लूट लिए। इस पूरी घटना ने पीड़ित परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया था।
घर के भेदियों और बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश
जैसे-जैसे भोपाल लूटकांड की जांच आगे बढ़ी, यह पूरी तरह साफ हो गया कि अपराधियों को घर के अंदर की पल-पल की जानकारी मिल रही थी और उन्होंने इसी के आधार पर अपनी योजना बनाई थी। इस अपराध में शामिल नेटवर्क बहुत बड़ा था, जिसमें कुल उन्नीस लोगों को आधिकारिक तौर पर आरोपी बनाया गया है। शाहरुख कुरैशी के पकड़े जाने से पहले, पुलिस कई अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार कर चुकी थी, जिनकी इस पूरी साजिश में अहम भूमिका थी। इनमें घर की नौकरानी ज्योति सावले और उसकी बहन किरण शामिल थीं, जिन्होंने टारगेट वाले घर की सुरक्षा व्यवस्था और आंतरिक लेआउट की महत्वपूर्ण जानकारियां गिरोह तक पहुंचाई थीं। इसके अलावा, पुलिस ने अरबाज, सादिक, मोहम्मद असद, लकी, गोलू और अनिल भाल्से को भी पकड़ा था। इन सभी का मुख्य काम घर की रेकी करना और मुख्य हमलावर टीम को लगातार सही समय पर अपडेट देना था।
पूछताछ जारी और कई सुरागों की तलाश
जयपुर में मिली इस शानदार कामयाबी के बावजूद, पुलिस का यह सघन अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। इस पूरे आपराधिक नेटवर्क का सरगना वाजिद अली, जिसे अपराध की दुनिया में वज्जू के नाम से भी जाना जाता है, अब भी अपने कई साथियों के साथ फरार है। शाहरुख कुरैशी की गिरफ्तारी से पुलिस को बचे हुए अपराधियों तक पहुंचने की एक अहम कड़ी मिल गई है। थानाधिकारी रायसल सिंह ने पुष्टि की है कि जांच दल फिलहाल आरोपी से बरामद देसी कट्टे के स्रोत और उसके स्थानीय संपर्कों के बारे में गहन पूछताछ कर रहा है। इस पूछताछ में गिरोह के काम करने के तरीके की भी स्पष्ट रूप से पुष्टि हुई है। यह बात सामने आई है कि यह गैंग रात के समय बड़े और अमीर घरों को निशाना बनाता है, और अगर वहां पालतू कुत्ते होते हैं, तो वे खास तौर पर मांस का इस्तेमाल करते हैं। पुलिस अधिकारी अब पकड़े गए आरोपी से मिले नए सुरागों के आधार पर पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।




















