राजस्थान के कोटा जिले में बचत समिति यानी बीसी के नाम पर कई परिवारों की मेहनत की पूंजी हड़पने का गंभीर मामला सामने आया है। कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत नदी पार इलाके में स्थित बजरंगपुरा में यह धोखाधड़ी हुई है। यहां रहने वाले 50 से अधिक लोगों ने थाने पहुंचकर एक बीसी संचालक के खिलाफ सामूहिक तौर पर शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ितों का कहना है कि वे भविष्य की जरूरतों के लिए लंबे समय से अपनी छोटी-बड़ी बचत इस कमेटी में जमा कर रहे थे, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी जब उन्हें उनका पैसा नहीं लौटाया गया, तब जाकर पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ। पीड़ितों के अनुसार गबन की गई कुल राशि 80 लाख रुपये से भी अधिक है।
भरोसे के नाम पर सालों की बचत जुटाई
पीड़ित स्थानीय निवासियों ने पुलिस को बताया कि बजरंगपुरा का निवासी पुरुषोत्तम तिवारी इलाके में बीसी का संचालन करता था। आसपास के लोग उस पर भरोसा करते थे और अपनी मासिक बचत का हिस्सा नियमित रूप से उसके पास जमा करवाते थे। शुरुआती दिनों में योजना का कामकाज सामान्य रूप से चलता दिखाई दे रहा था, जिसके कारण लोगों को यह विश्वास था कि जरूरत पड़ने पर या समय पूरा होने पर उन्हें उनकी पूरी रकम आसानी से मिल जाएगी। इसी विश्वास के आधार पर कई मध्यमवर्गीय और कामकाजी परिवारों ने अपनी गाढ़ी कमाई इस बीसी में लगाना जारी रखा। हालांकि, कुछ समय बीतने के बाद संचालक ने भुगतान करने में आनाकानी शुरू कर दी और लोगों को उनकी ही रकम वापस मिलना पूरी तरह बंद हो गया।
मकान बेचने के बाद भी नहीं लौटाए पैसे, दंपती हुआ लापता
जब जमाकर्ताओं ने अपने पैसे वापस मांगने के लिए पुरुषोत्तम तिवारी पर दबाव बनाना शुरू किया, तो उसने आश्वासन दिया था कि वह अपना मकान बेचकर सभी का बकाया पाई-पाई चुका देगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके बाद उसने अपना मकान भी बेच दिया, लेकिन मकान की बिक्री के बाद भी किसी भी पीड़ित को उसकी जमा पूंजी वापस नहीं मिली। इसके बाद जब लोगों ने संचालक से संपर्क करने की कोशिश की, तो पता चला कि पुरुषोत्तम तिवारी और उसकी पत्नी दोनों घर छोड़कर कहीं चले गए हैं। दोनों के अचानक गायब होने के बाद लोगों को ठगे जाने का पूरा यकीन हो गया, जिससे आक्रोशित होकर दर्जनों पीड़ित एक साथ कुन्हाड़ी पुलिस थाने पहुंचे।
मेहनतकश परिवारों का टूटा सहारा
इस धोखे की चपेट में आने वालों में कई ऐसे परिवार शामिल हैं, जिन्होंने हर महीने अपनी सीमित आय में से कुछ हजार रुपये बचाकर जमा किए थे, जबकि कई लोगों ने अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार लाखों रुपये इस कमेटी में लगाए थे। पीड़ित दुर्गाशंकर ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि इलाके के बहुत से लोग लंबे समय से बीसी में अपनी बचत का पैसा लगा रहे थे और सभी को यह आस थी कि तय समय पर उन्हें उनकी रकम मिल जाएगी, परंतु अब उन्हें एक रुपया भी नहीं दिया जा रहा है। इसी तरह एक अन्य पीड़ित सौरभ चावला ने भी बताया कि उनकी गाढ़ी कमाई इसमें फंस चुकी है और उन्हें अपनी जमा रकम वापस नहीं मिल रही है। परेशान लोगों ने पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनकी डूबी हुई रकम को वापस दिलाया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।
कुन्हाड़ी थाना पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया
दर्जनों पीड़ितों की लिखित शिकायतों को दर्ज करने के बाद कुन्हाड़ी थाना पुलिस ने पूरे प्रकरण की विधिवत जांच शुरू कर दी है। पुलिस दल अब फरार बीसी संचालक पुरुषोत्तम तिवारी और उसकी पत्नी के संभावित ठिकानों की जानकारी एकत्र कर रहा है। इसके साथ ही जांच अधिकारी यह विवरण भी जुटा रहे हैं कि इस बीसी योजना में कुल कितने सदस्यों ने पैसे लगाए थे और अब तक कुल कितने रुपयों का वित्तीय लेनदेन हुआ है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे रिकॉर्ड की पड़ताल और संचालक से पूछताछ के बाद ही गबन की सही रकम और धोखाधड़ी के पूरे दायरे की स्पष्ट तस्वीर सामने आ पाएगी। फिलहाल दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर 50 से अधिक लोगों से 80 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

















