17 सितंबर को कन्या राशि में सूर्य का प्रवेश: 7 राशियों का चमकेगा भाग्य, मिलेगी नौकरी और कारोबार में तरक्की2026 का अंत होने से पहले मिथुन, कर्क और वृश्चिक राशि वालों को मिलेगा बड़ा आर्थिक लाभ, बढ़ेगी आमदनीबलिया में व्हाट्सएप हैक कर यूपीआई से 75 हजार मांगने का नया साइबर फ्रॉड, पुलिस ने जारी किया अलर्टअमरीकी ट्रेजरी के बायबैक प्लान से डॉलर पर बढ़ा दबाव, बॉन्ड यील्ड में दिखा दुर्लभ पैटर्नस्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज संकट से WTI क्रूड में उबाल, डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बीच $92 तक जा सकती है कीमतमेघालय में तनाव के बीच वेस्ट जयंतिया हिल्स में खुले पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर तुरंत रोकमध्य प्रदेश में पुलिस अफसर पर कड़ी कार्रवाई के तहत हत्या के आरोपी से बेहद सस्ती जमीन लेने के आरोप में सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर FIR और निलंबन का आदेश जारीस्वीडिश रिक्सबैंक ने ब्याज दर 1.75 प्रतिशत पर रखी बरकरार, मध्य पूर्व के तनाव के बीच दिए बढ़ोतरी के संकेतबिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणामों पर भड़का गुस्सा, 90 प्रतिशत छात्र फेल होने के बाद सड़कों पर उतरेलखनऊ में जापान के राजदूत से मिले अखिलेश यादव, सोशल मीडिया पर साझा की तस्वीर
बीकानेर कृषि अनुसंधान केन्द्र में गाजर घास पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, वैज्ञानिकों ने दी खरपतवार नियंत्रण की सलाहराजस्थान
21 अग॰ 2026, 7:07 pm (2 घंटे पहले)· 2

बीकानेर कृषि अनुसंधान केन्द्र में गाजर घास पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, वैज्ञानिकों ने दी खरपतवार नियंत्रण की सलाह

बीकानेर स्थित कृषि अनुसंधान केन्द्र में गाजर घास के दुष्प्रभावों और उसकी रोकथाम पर जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें वैज्ञानिकों ने किसानों व छात्रों को इसके खतरों से आगाह किया।

राजस्थान के बीकानेर स्थित कृषि अनुसंधान केन्द्र परिसर में आक्रामक खरपतवार गाजर घास के बढ़ते प्रकोप और उससे होने वाले नुकसान के प्रति किसानों और विद्यार्थियों को सचेत करने के लिए एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम संपन्न हुआ। पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस के नाम से जानी जाने वाली यह घास न केवल कृषि फसलों की पैदावार को प्रभावित कर रही है, बल्कि स्थानीय वनस्पतियों, पशुधन तथा मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चुनौती खड़ी कर रही है। कृषि विशेषज्ञों ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को गाजर घास की सही पहचान करने, इसके विषाक्त प्रभावों को समझने तथा खेत और आसपास के क्षेत्रों सेइसे पूरी तरह नष्ट करने की व्यावहारिक विधियों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की।

फसलों, जैव विविधता और पर्यावरण पर गाजर घास का दुष्प्रभाव

जागरूकता शिविर के दौरान कृषि अनुसंधान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शीश पाल सिंह ने रेखांकित किया कि गाजर घास एक अत्यंत आक्रामक और तेजी से फैलने वाली खरपतवार प्रजाति है। जब यह खरपतवार किसी क्षेत्र में अपनी जड़ें जमा लेती है, तो इसका फैलाव रोकना काफी कठिन हो जाता है। यह खेतों में बोई गई मुख्य फसलों के लिए उपलब्ध जल, आवश्यक पोषक तत्वों और सूरज की रोशनी तथा स्थान पर अपना अधिकार जमा लेती है, जिससे फसलों की वृद्धि रुक जाती है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा, यह आसपास उगने वाली स्थानीय वनस्पतियों को भी पनपने नहीं देती, जिससे क्षेत्र की प्राकृतिक जैव विविधता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

ये भी पढ़ें

कार्यक्रम के दौरान डॉ. रूपेश मीना ने गाजर घास के रासायनिक संगठन पर रोशनी डालते हुए बताया कि इस खरपतवार में विभिन्न प्रकार के विषाक्त रासायनिक पदार्थ मौजूद होते हैं। ये विषैले तत्व मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित करने के साथ-साथ पौधों की सामान्य विकास प्रक्रिया को भी बाधित करते हैं। वहीं डॉ. बी.डी.एस. नाथावत ने अपने संबोधन में आगाह किया कि गाजर घास केवल फसलों की वृद्धि ही नहीं रोकती, बल्कि कई तरह की खतरनाक बीमारियों के रोगाणुओं और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट-पतंगों के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल का काम भी करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय रहते इसका प्रबंधन न किए जाने पर खेतों में बीमारियों और कीटों का हमला तेजी से बढ़ सकता है।

इंसानों और पशुओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा

गाजर घास का प्रभाव केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह मानव जीवन और पशुधन के लिए भी एक बड़ा स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गाजर घास के सीधे संपर्क में आने या इसके हवा में तैरते परागकणों की वजह से संवेदनशील व्यक्तियों में त्वचा संबंधी समस्याएं जैसे खुजली, एलर्जी और दाने हो सकते हैं। इसके साथ ही, इसके परागकण आंखों में तेज जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न कर सकते हैं। यही कारण है कि कृषि वैज्ञानिक इस घास को हटाते समय विशेष सावधानी बरतने का सुझाव देते हैं।

गाजर घास को नष्ट करने के कार्य में जुटे किसानों और मजदूरों को सलाह दी गई है कि वे इसे कभी भी नंगे हाथों से न छूएं। इस खरपतवार को उखाड़ते या साफ करते समय हाथों में दस्ताने पहनना और शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़ों का इस्तेमाल करना अत्यंत आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, चरागाहों और खाली पड़ी जमीनों पर इस घास के फैलने से मवेशियों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है, क्योंकि इसके विषैले तत्वों से पशुओं में विभिन्न प्रकार की बीमारियां और शारीरिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

फूल आने से पहले नियंत्रण और समेकित प्रबंधन जरूरी

गाजर घास के नियंत्रण को लेकर विशेषज्ञों ने सबसे महत्वपूर्ण बात यह बताई कि इसमें फूल खिलने और बीज बनने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही कदम उठाए जाने चाहिए। एक बार पौधे में बीज बन जाने पर वे हवा, पानी और पशुओं के माध्यम से आसपास के विस्तृत इलाकों में बहुत तेजी से फैल जाते हैं। इसलिए, प्रारंभिक अवस्था में ही इसकी रोकथाम करना सबसे प्रभावी रणनीति मानी जाती है। सामान्य तौर पर लोग इस खरपतवार को कांग्रेस घास के नाम से भी पहचानते हैं, जो बहुत ही कम समय में खाली पड़ी जमीन, सड़क के किनारों, खेतों की मेढ़ों और चरागाहों में तेजी से फैल जाती है।

वैज्ञानिकों ने गाजर घास को पूरी तरह खत्म करने के लिए यांत्रिक, जैविक और रासायनिक तीनों तरीकों को अपनाने पर बल दिया है। यदि खरपतवार का प्रसार छोटे क्षेत्र में है, तो पौधों को फूल आने से पहले जड़ सहित उखाड़कर नष्ट कर देना सबसे सुलभ और असरदार उपाय है। हालांकि, जहां इसका प्रकोप बहुत बड़े भूभाग या पूरे खेत में फैल चुका हो, वहां समेकित खरपतवार प्रबंधन प्रणाली को लागू करना आवश्यक हो जाता है। इसके तहत विभिन्न नियंत्रण तकनीकों का एक साथ उपयोग करके इस हठी खरपतवार पर स्थायी रूप से काबू पाया जा सकता है।

सवाल-जवाब

गाजर घास (पार्थेनियम) क्या है और यह क्यों हानिकारक है?
यह एक तेजी से फैलने वाली आक्रामक खरपतवार है जो फसलों के पोषक तत्व छीनती है तथा इंसानों और पशुओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
गाजर घास से इंसानों के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?
इसके सीधे संपर्क या परागकणों से त्वचा में खुजली, एलर्जी, आंखों में जलन और सांस की समस्या हो सकती है।
गाजर घास को नियंत्रित करने का सही समय कौन सा है?
विशेषज्ञों के अनुसार पौधे में फूल आने और बीज बनने से पहले ही इसे नष्ट कर देना चाहिए।
गाजर घास को हटाते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
इसे कभी भी नंगे हाथों से न छूएं। हटाते समय दस्ताने पहनें और शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े इस्तेमाल करें।
बीकानेर में जागरूकता कार्यक्रम कहां आयोजित किया गया था?
यह कार्यक्रम कृषि अनुसंधान केन्द्र बीकानेर में आयोजित किया गया था, जहां किसानों और छात्रों को खरपतवार नियंत्रण की जानकारी दी गई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR