राजस्थान सरकार ने राज्य भर में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से अपनी महत्वाकांक्षी पहल को तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत राज्य के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, प्रमुख सार्वजनिक स्थलों और संवेदनशील क्षेत्रों में कुल 14,122 आधुनिक एचडी सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं। इस उन्नत निगरानी प्रणाली का मुख्य ध्येय कामकाजी महिलाओं, छात्राओं और आम नागरिकों के लिए भयमुक्त वातावरण तैयार करना तथा किसी भी अप्रिय घटना पर त्वरित पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
छात्राओं और कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम
राज्य के विभिन्न शहरों और ग्रामीण इलाकों में स्थित बालिका विद्यालयों, महाविद्यालयों, कोचिंग केंद्रों और हॉस्टलों के आसपास असामाजिक तत्वों तथा मनचलों की आवाजाही अक्सर महिलाओं की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनती रही है। इसके साथ ही, देर रात दफ्तरों या अपने कार्यस्थलों से घर लौटने वाली कामकाजी महिलाओं को बाजारों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों पर यात्रा करते समय असुरक्षा का अहसास होता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए राजस्थान सरकार ने इस व्यापक सर्विलांस व्यवस्था की रूपरेखा तैयार की है। यह आधुनिक ढांचा न केवल अपराधियों में खौफ पैदा करेगा, बल्कि महिलाओं के मन में सुरक्षा और विश्वास की भावना को भी सुदृढ़ करेगा।
किन प्रमुख स्थानों पर बिछाया जा रहा है निगरानी का जाल
योजना के विस्तृत खाके के अनुसार, प्रदेश भर के उन तमाम क्षेत्रों की पहचान की गई है जहां दैनिक रूप से महिलाओं और बालिकाओं की उपस्थिति अधिक रहती है या जहां सुरक्षा जोखिम ज्यादा हैं
- शैक्षणिक परिसर: सभी बालिका स्कूल, सरकारी तथा निजी कॉलेज, विश्वविद्यालय परिसर और छात्राओं के लिए संचालित सरकारी व निजी छात्रावास।
- सार्वजनिक आवाजाही के क्षेत्र: शहर के प्रमुख व्यापारिक बाजार, भीड़भाड़ वाले चौराहे, बस टर्मिनल, रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक पार्क।
- ब्लैक स्पॉट्स और संवेदनशील इलाके: शहरों के वे गलियारे और मार्ग जहां स्ट्रीट लाइट की समुचित व्यवस्था नहीं है अथवा जहां असामाजिक गतिविधियों का खतरा बना रहता है।
14,122 कैमरों के नेटवर्क की तकनीकी खासियतें
लाडली सुरक्षा योजना को पूरी तरह प्रभावी और भरोसेमंद बनाने के लिए इसमें आधुनिक तकनीक का समावेश किया गया है। पूरे नेटवर्क में उच्च गुणवत्ता वाले एचडी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो दिन के उजाले के साथ-साथ रात के अंधेरे में भी बिल्कुल साफ और स्पष्ट वीडियो फुटेज रिकॉर्ड करने में पूरी तरह सक्षम हैं। इन सभी 14,122 कैमरों की लाइव फीड को सीधे केंद्रीय पुलिस कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा गया है। इससे कंट्रोल रूम में तैनात पुलिसकर्मी किसी भी संदेहास्पद गतिविधि को देखते ही तुरंत नजदीकी गश्ती दल को अलर्ट कर सकेंगे और पुलिस बल मौके पर पहुंच जाएगा।
इसके अलावा, जांच प्रक्रिया और न्यायिक प्रणाली को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से प्रत्येक कैमरे की रिकॉर्डिंग का 15 से 30 दिनों का सुरक्षित डेटा बैकअप रखा जाएगा। इस फुटेज की मदद से किसी भी आपराधिक घटना की त्वरित छानबीन की जा सकेगी और अदालत में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में मदद मिलेगी। निर्बाध निगरानी बनाए रखने के लिए बिजली कटौती की स्थिति में भी प्रणाली को सक्रिय रखने हेतु यूपीएस और सोलर पावर बैकअप स्थापित किए जा रहे हैं। वहीं महिलाओं की निजता का पूर्ण सम्मान करते हुए शौचालय, चेंजिंग रूम, वॉशरूम या ड्रेसिंग रूम जैसे अति-व्यक्तिगत स्थानों में कैमरे लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया है।





















