प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में आगामी रबी सत्र को लेकर कृषि कार्य गति पकड़ने लगे हैं। दौसा, बारां और सवाई माधोपुर के काश्तकार इन दिनों खेतों में डाई-अमोनियम फॉस्फेट यानी DAP की अनुपलब्धता को लेकर भारी दिक्कतों से जूझ रहे हैं। इसके विपरीत, सीकर और झुंझुनूं सहित पूरे शेखावाटी अंचल में फिलहाल उर्वरक केंद्रों पर वैसी आपाधापी नजर नहीं आ रही है। स्थानीय स्तर पर मांग में यह ठहराव मुख्य रूप से कृषि चक्र की मौजूदा स्थिति के कारण देखा जा रहा है। यहां का एक बड़ा किसान वर्ग अभी खरीफ की पकी उपज समेटने, उसे मंडियों तक पहुंचाने तथा आगामी बुवाई की शुरुआती तैयारी में व्यस्त है।
कृषि चक्र और बदलते मौसम का बुवाई पर असर
शेखावाटी क्षेत्र पारंपरिक रूप से सरसों, गेहूं और प्याज की सघन खेती के लिए जाना जाता है। स्थानीय काश्तकार बुवाई की तारीखें तय करने से पहले मिट्टी में मौजूद नमी, वायुमंडलीय तापमान और मौसमी बदलावों का बारीकी से आकलन करते हैं। कृषि विशेषज्ञ जेपी धायल के मुताबिक, अभी अधिकांश इलाकों में कटाई और फसल बेचने की प्रक्रिया चल रही है। गेहूं की बुवाई शुरू करने के लिए नवंबर का शुरुआती हफ्ता मौसम के लिहाज से सबसे मुफीद रहता है। इसी वजह से बड़ी तादाद में काश्तकारों ने अभी खेतों में बीज डालने का काम शुरू नहीं किया है, जिससे खुदरा व सहकारी दुकानों पर रासायनिक उर्वरक की खपत काफी नियंत्रित बनी हुई है।
सिंचाई वाले इलाकों में बुवाई की शुरुआत
पूरे इलाके की स्थिति पूरी तरह एक जैसी नहीं है। जिन काश्तकारों के पास ट्यूबवेल या नहरी पानी के पुख्ता साधन हैं और जिनके खेत पूरी तरह तैयार हैं, उन्होंने रबी की फसलों की प्राथमिक बुवाई शुरू कर दी है। ऐसे क्षेत्रों में जरूरत के मुताबिक खाद की खरीद भी की जा रही है। वर्तमान में इन किसानों को गोदामों में मौजूद माल से खाद उपलब्ध करवाई जा रही है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि जैसे ही बाकी इलाकों में भी बुवाई का रकबा फैलेगा, वैसे ही वितरण केंद्रों पर दबाव काफी बढ़ जाएगा।
नवंबर में अचानक मांग बढ़ने की आशंका
शुरुआती दौर में किल्लत न दिखने का यह अर्थ कतई नहीं है कि आने वाले हफ्तों में भी स्थिति इतनी ही सहज रहेगी। भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधि दिनेश जाखड़ के मुताबिक, सीकर जिले में हर साल मुख्य सीजन के दौरान आपूर्ति में रुकावटें पैदा होती हैं। बीजारोपण के चरम समय पर जब पूरे क्षेत्र में एक साथ उर्वरक की आवश्यकता पड़ती है, तब लॉजिस्टिक्स और स्टॉक पर भारी दबाव पड़ता है।
इलाके में 20 अक्टूबर के उपरांत चना और सरसों की बुवाई रफ्तार पकड़ेगी। इसके ठीक बाद नवंबर महीने में प्याज, गेहूं और जौ की व्यापक बुवाई शुरू हो जाएगी। इस नाजुक समय पर फसलों को फास्फोरस पोषक तत्व उपलब्ध कराने के लिए DAP बेहद अनिवार्य होता है। खाद की डिलीवरी में यदि थोड़ी भी देरी होती है, तो पूरी कृषि समय-सारिणी प्रभावित होने का जोखिम रहता है।
कृषि विभाग ने पर्याप्त उपलब्धता का दिया भरोसा
दूसरी तरफ, सरकारी तंत्र का दावा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। कृषि विभाग के अतिरिक्त संयुक्त निदेशक (कृषि) शिवजी राम कटारिया ने बताया, "किसानों की मांग के अनुसार DAP का पूरा प्रबंध किया जा रहा है।" उन्होंने आश्वस्त किया कि अगले माह जब बुवाई अपने चरम पर होगी, तब राज्य प्रशासन की अग्रिम तैयारियां किसानों को कतारों में लगने से बचाएंगी और विभाग के पास आपूर्ति के लिए पर्याप्त भंडार संचित है।





















