राजस्थान के कोटा शहर में धारदार हथियारों और छुरों से जानलेवा हमलों की बढ़ती घटनाएं स्थानीय प्रशासन के लिए सिरदर्द बन चुकी हैं। अपराधियों की धरपकड़ और धारदार हथियारों की जब्ती के लिए पुलिस प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है, लेकिन सड़कों पर हमलों का यह सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल बीते एक सप्ताह के भीतर चाकूबाजी की करीब आधा दर्जन वारदातें दर्ज की गई हैं। इन हालिया हमलों में कई नागरिक गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं, जबकि एक युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
शहर में सामने आ रहे आंकड़े कानून व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल पैदा कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चालू वर्ष के दौरान कोटा में चाकूबाजी की लगभग 100 घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें 110 से ज्यादा लोग लहूलुहान होकर अस्पतालों तक पहुंचे। वहीं इन हमलों और धारदार हथियारों के वार से आधा दर्जन से अधिक नागरिकों की असमय मौत भी दर्ज की गई है। प्रशासनिक अमले के सामने सबसे जटिल चुनौती यह बनकर उभरी है कि कम उम्र के लड़कों और युवाओं में नुकीले हथियार जेब में रखकर घूमने और बात-बात पर उनका इस्तेमाल करने की आदत खतरनाक रूप से बढ़ रही है।
ऑपरेशन हॉक के जरिए शिकंजा कसने का प्रयास
अवैध छुरों के चलन और हमलों की रोकथाम के लिए शहर की पुलिस ने विशेष अभियान के तौर पर ऑपरेशन हॉक संचालित किया था। इस धरपकड़ अभियान को सुनियोजित ढंग से लागू करने के उद्देश्य से अलग-अलग थाना क्षेत्रों में नौ विशेष पुलिस दस्तों की तैनाती की गई थी। इस सघन जांच और दबिश के दौरान पुलिस ने दो दर्जन से अधिक संदिग्ध अपराधियों को दबोचा और उनके पास से छुरों सहित धारदार हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद किया।
सिटी एडिशनल एसपी सुभाष चंद्र मिश्रा ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि पुलिस की इस मुहिम का मुख्य मकसद बिना अनुमति हथियार रखने वालों पर कानूनी शिकंजा कसना है। इसके साथ ही चाकू और अन्य धारदार हथियारों को तैयार करने, खुले बाजार में बेचने और हिंसा में उनका इस्तेमाल करने के पूरे चक्र पर रोक लगाना प्राथमिक लक्ष्य तय किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि असामाजिक तत्वों के खिलाफ यह कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी। हालांकि धरपकड़ और छापों के समानांतर जिस तरह नई घटनाएं सामने आ रही हैं, उसने इन अभियानों की जमीनी मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राज्यभर के हमलों का बड़ा हिस्सा अकेले एक शहर में
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि पूरे राजस्थान में सामने आने वाले चाकूबाजी के मामलों में से अकेले 30 से 35 प्रतिशत हिस्सेदारी कोटा की है। सामान्य तौर पर शहर में हर साल औसतन 100 से अधिक चाकूबाजी के मामले पंजीबद्ध होते हैं। इन सालाना मामलों में करीब 120 से 125 लोग चोटिल होते हैं, जबकि 8 से 10 पीड़ितों की जान जाने का विवरण मिलता है। चालू वर्ष में भी यह आंकड़ा करीब 100 वारदातों तक पहुंच चुका है, जिसमें 110 से अधिक लोग जख्मी हुए और आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत दर्ज की गई। दिनदहाड़े या मामूली विवादों में धारदार हथियार निकल आने की इस प्रवृत्ति से आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना गहरी हो रही है और सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं।
वर्ष 1959 से चला आ रहा हथियारों का इतिहास
कोटा शहर में चाकूबाजी की समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि इसके तार दशकों पुराने रिकॉर्ड से जुड़े हैं। पुलिस अभिलेखों की पड़ताल बताती है कि वर्ष 1959 की पुलिस डायरी में भी चाकूबाजी को शहर की एक विकराल समस्या के तौर पर चिन्हित किया गया था। स्थानीय इतिहास और प्रचलित विवरणों के अनुसार, रियासती दौर में उत्तर प्रदेश के रामपुर से आए नवाब अपने सुरक्षा दस्तों के साथ यहां ठहरे थे। उनके सुरक्षाकर्मियों के पास मौजूद विशेष चाकू समय के साथ रामपुरी चाकू के नाम से मशहूर हुए।
शुरुआती दौर में कई नौजवानों ने इसे आत्मरक्षा की कला के रूप में सीखा था। परंतु कालक्रम में इसका उद्देश्य बदल गया और इसका उपयोग लोगों पर धौंस जमाने, डराने, रंगदारी वसूलने और आपसी रंजिश में वार करने के लिए किया जाने लगा। धीरे-धीरे कुछ असामाजिक और उपद्रवी तत्वों के बीच धारदार हथियार रखना प्रतिष्ठा और दबदबे का प्रतीक बन गया।
पुरानी चुनौतियों की वापसी और प्रशासनिक परीक्षा
कुछ वर्ष पूर्व भी कोटा में चाकूबाजी की श्रृंखला ने पूरे देश में खूब सुर्खियां बटोरी थीं। बीच के वर्षों में कड़ी सख्ती के बाद इन अपराधों की संख्या में कुछ कमी महसूस की गई थी, लेकिन वर्तमान में यह पुराना ढर्रा फिर से लौटता दिख रहा है। लगातार सामने आ रहे वार और मौतों ने रिहायशी इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस की नौ टीमों का ऑपरेशन हॉक और हथियारों के नेटवर्क पर की जा रही चोट इन हमलों पर कितना असरदार विराम लगा पाती है।



















