मेवाड़ के ऐतिहासिक अंचल में आस्था और प्राकृतिक छटा का एक अत्यंत विस्मयकारी केंद्र चित्तौड़गढ़ में स्थित है, जिसे श्रद्धालु जोगणिया माता धाम के नाम से पुकारते हैं. नवरात्रि के पावन अवसर पर शक्ति की उपासना के बीच यह तीर्थ विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है. अरावली की उत्तुंग पहाड़ियों, सघन वन संपदा और गहरी खंदकों से घिरा यह स्थान श्रद्धालुओं को शांति और आध्यात्मिकता का गहरा अनुभव कराता है. मंदिर के मुख्य गर्भगृह की विशेषता यह है कि यहां माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती की त्रिमूर्ति एक साथ प्रतिष्ठित है. बरसात के दिनों में मंदिर के निकट लगभग 300 फीट गहरे दर्रे में गिरता विशाल जलप्रपात इस पूरे परिदृश्य की आभा और रहस्यमयी आकर्षण को कई गुना विस्तृत कर देता है.
मन्नत पूरी होने पर हथकड़ियां अर्पित करने का अनोखा रिवाज
इस शक्तिपीठ से जुड़ी सबसे विलक्षण परंपरा लोहे की हथकड़ियां चढ़ाने की है, जिसका उदाहरण संभवतः अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलता. स्थानीय स्तर पर प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, जब कोई व्यक्ति किसी फर्जी मुकदमे, पुलिस की जांच अथवा गंभीर कानूनी उलझनों में जकड़ जाता है, तब वह निष्कपट मन से मां के दरबार में संकट निवारण की गुहार लगाता है. जब उसकी मनोकामना सिद्ध हो जाती है और वह संकटों से उबर जाता है, तो श्रद्धालु गुप्त रीति से यहां आकर मां के चरणों में लोहे की हथकड़ी समर्पित करता है. वर्तमान समय में भी मंदिर के खंभों और प्राचीरों पर टंगी अनगिनत हथकड़ियां इस देवी स्थल पर भक्तों की प्रगाढ़ निष्ठा और न्याय के प्रति उनके विश्वास की गवाही देती हैं.
हाड़ा चौहान राजवंश से जुड़ा प्राचीन इतिहास और नामकरण
धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से यह धाम 8वीं से 9वीं शताब्दी के कालखंड से संबंधित बताया जाता है. आरंभिक युग में इस पावन स्थल को अन्नपूर्णा देवी के नाम से जाना और पूजा जाता था. पारंपरिक आख्यानों के मुताबिक, हाड़ा चौहान शासकों के बंबावदागढ़ राज्य पर जब भयानक विपत्ति आन पड़ी थी, तब देवी ने स्वयं एक तपस्विनी अर्थात जोगिन का वेश धारण कर उनकी सुरक्षा की थी. उसी ऐतिहासिक घटना के उपरांत देवी की ख्याति जोगणिया माता के रूप में स्थापित हो गई. हाड़ा वंश के राजपूत आज भी देवी को अपनी कुलदेवी के रूप में सर्वोच्च स्थान देते हैं और परंपरा के अनुसार उनकी पूजा संपन्न करते हैं. गर्भगृह के मुख्य प्रवेश द्वार पर दो भव्य सिंह मूर्तियां स्थापित हैं, जबकि समीप ही मौजूद सहस्त्र शिवलिंग की उपस्थिति शिव और शक्ति के शाश्वत समन्वय का अहसास कराती है.
नवरात्रि महोत्सव में उमड़ती है तीन राज्यों के श्रद्धालुओं की भीड़
प्रत्येक वर्ष चैत्र और शारदीय नवरात्रि के पर्व पर जोगणिया माता के दर्शन के लिए अपार जनसमूह उमड़ पड़ता है. इस दौरान केवल राजस्थान के विभिन्न जिलों से ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश और गुजरात से भी लाखों की तादाद में भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर अरावली की वादियों में पहुंचते हैं. मंदिर मंडल के अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी तथा क्षेत्रीय विधायक डॉ. सुरेश धाकड़ ने व्यवस्थाओं के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि पर्व के दिनों में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रबंध किए जाते हैं. मंदिर प्रांगण में अनवरत गूंजने वाले भजन, कीर्तन और जयकारों के स्वरों से समस्त अरावली अंचल भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठता है.


















