राजस्थान के अजमेर शहर स्थित गद्दी मालियान क्षेत्र से देर रात एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक ही छत के नीचे रह रहे परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई। स्थानीय स्तर पर फर्नीचर का कारोबार करने वाले अशोक शर्मा, उनकी धर्मपत्नी इंदिरा शर्मा तथा पुत्री दीक्षा ने कथित तौर पर पानी में सल्फास की गोलियां मिलाकर पी लीं। विषैले पदार्थ के सेवन के बाद जैसे ही तीनों की शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी, उन्हें तत्काल एंबुलेंस की मदद से नजदीकी जवाहरलाल नेहरू अस्पताल ले जाया गया। वहां इमरजेंसी वार्ड में मौजूद चिकित्सकों ने गहन चिकित्सकीय परीक्षण के उपरांत तीनों को मृत घोषित कर दिया। दिल दहला देने वाली इस घटना की भनक लगते ही आदर्श नगर थाना पुलिस का दल तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा और मामले की छानबीन शुरू कर दी। तीनों मृतकों के पार्थिव शरीरों को अस्पताल के शवगृह में सुरक्षित रखवा दिया गया है।
भांजे को किए गए आखिरी फोन से सामने आया मामला
इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ी शुरुआती जानकारी के अनुसार, विषपान करने से ठीक पहले अशोक शर्मा ने अपने सगे भांजे को मोबाइल फोन मिलाया था। फोन कॉल के दौरान अशोक ने अपने भांजे के समक्ष इस खौफनाक कदम उठाए जाने की बात साझा की। रिश्तेदार के मुंह से ऐसी भयावह बात सुनते ही भांजे के होश उड़ गए और उसने बिना एक पल गंवाए अशोक शर्मा के पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति को फोन किया। उसने पड़ोसी से विनती की कि वह तुरंत दौड़कर घर के भीतर जाए और परिवार की खैरियत देखे।
भांजे से संदेश मिलते ही पड़ोसी आनन-फानन में अशोक शर्मा के मकान पर पहुंचा, मगर वहां का दृश्य देख उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। तब तक अशोक शर्मा, उनकी पत्नी इंदिरा शर्मा और बेटी दीक्षा सल्फास का बना घोल निगल चुके थे और उनकी हालत बेहद नाजुक हो चली थी। पड़ोसी व आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए तीनों को अस्पताल पहुंचाने की भागदौड़ शुरू की। आनन-फानन में बुलाई गई एंबुलेंस सेवा के माध्यम से तीनों को जवाहरलाल नेहरू अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन जहर शरीर में फैल जाने के कारण डॉक्टर उनकी जान बचाने में नाकाम रहे और जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया गया।
आदर्श नगर थाना पुलिस जुटी सुराग तलाशने में
घटना की खबर मिलते ही आदर्श नगर थाने की पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और कानूनी कार्रवाई शुरू की। पुलिस अधिकारियों ने मौके का मुआयना कर साक्ष्य जुटाए और परिवार से जुड़े नजदीकी रिश्तेदारों तथा परिचितों से सघन पूछताछ शुरू कर दी है। जांच दल इस दुखद घटना से जुड़े तमाम पहलुओं और कड़ियों को आपस में जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
जांच अधिकारियों की नजर में अशोक शर्मा द्वारा अपने भांजे को की गई आखिरी कॉल और उसके तुरंत बाद पड़ोसी को दी गई सूचना इस मामले की सबसे अहम कड़ी है। पुलिस गहराई से यह समझने का प्रयास कर रही है कि आखिर ऐसी कौन सी गंभीर वजह या विषम परिस्थितियां थीं, जिनके चलते एक हंसते-खेलते परिवार को इतना आत्मघाती कदम उठाने पर विवश होना पड़ा। फिलहाल इस सामूहिक आत्महत्या के पीछे के स्पष्ट कारणों का खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस दल परिवार के अन्य सदस्यों, संबंधियों और पड़ोसियों से जानकारियां जुटा रहा है, साथ ही घटनास्थल से मिले तमाम साक्ष्यों की फोरेंसिक दृष्टि से पड़ताल की जा रही है।
शवगृह में रखवाए गए शव, इलाके में पसरा मातम
अशोक शर्मा, उनकी पत्नी इंदिरा और बेटी दीक्षा के शवों को जवाहरलाल नेहरू अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तय कानूनी औपचारिकताओं और आवश्यक कागजी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसके बाद शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंपे जाएंगे।
गद्दी मालियान जैसे घनी आबादी वाले इलाके में एक साथ तीन मौतों की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में गहरा सन्नाटा और मातम पसर गया। आसपास के बाशिंदों को जैसे ही इस दर्दनाक हादसे का पता चला, वे बड़ी तादाद में घटनास्थल के इर्द-गिर्द जमा हो गए। हर कोई इस अनहोनी से स्तब्ध नजर आया। पुलिस प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच जारी है। घटना के मूल कारणों को लेकर अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। जांच पूरी होने, परिवारजनों के बयान दर्ज किए जाने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस परिवार ने किन मजबूरियों के चलते ऐसा कदम उठाया।





















