घरेलू नुस्खे से मिनटों में चमकाएं गंदी प्लास्टिक बाल्टी, बेकिंग सोडा और सिरके का आसान उपायगद्दी मालियान में फर्नीचर कारोबारी ने पत्नी और बेटी समेत निगला जहर, अस्पताल में तीनों ने तोड़ा दमपिथौरागढ़ के गंगोलीहाट में विराजीं मां हाटकलिका, कुमाऊं रेजिमेंट की रक्षक देवी के दरबार में हर सुबह दिखता है अनूठा रहस्यवापसी से पहले सक्रिय हुआ मानसून, कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनीमूलांक 7 अंकज्योतिष राशिफल 20 सितंबर 2026: केतु का प्रभाव दूर करेगा मन का संशय, शांत बातचीत से संवरेंगे रिश्ते और कामताजे मक्के और फूले चावल से बनाएं पारंपरिक छिलका, दही और गुड़ के साथ लाजवाब लगेगा देसी स्वाद21 से 27 सितंबर 2026 के बीच कई राज्यों में बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले देखें छुट्टियों का पूरा ब्योराघरेलू गैस सिलेंडर पर सब्सिडी जारी रखने के लिए बायोमेट्रिक आधार सत्यापन अनिवार्य, 1 अक्टूबर 2026 से बदलेगा नियममूलांक 9 अंकज्योतिष 20 सितंबर 2026: उत्साह और मेलजोल के बीच खान-पान व बजट पर रखें नियंत्रणराजस्थान निकाय चुनाव के बाद शीर्ष पदों पर घमासान, कई जिलों में प्रदर्शन और बाड़ेबंदी के बीच गरमाई सियासत
पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट में विराजीं मां हाटकलिका, कुमाऊं रेजिमेंट की रक्षक देवी के दरबार में हर सुबह दिखता है अनूठा रहस्यउत्तराखंड
20 सित॰ 2026, 8:56 am (1 घंटे पहले)· 1

पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट में विराजीं मां हाटकलिका, कुमाऊं रेजिमेंट की रक्षक देवी के दरबार में हर सुबह दिखता है अनूठा रहस्य

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित गंगोलीहाट में देवदार के जंगलों के बीच मां हाटकलिका का शक्तिपीठ स्थापित है, जिन्हें भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की संरक्षक देवी माना जाता है।

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित गंगोलीहाट घने देवदार के पेड़ों से घिरा एक ऐसा धार्मिक केंद्र है, जहां मां हाटकलिका का प्रसिद्ध और जागृत शक्तिपीठ स्थित है। इस पावन धाम को मां महाकाली के भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। इस मंदिर की पहचान इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और समृद्ध धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है। दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु अपने जीवन की मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं और मां के जागृत स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

कुमाऊं रेजिमेंट की रक्षक और अगाध आस्था का केंद्र

भारतीय सेना की विख्यात कुमाऊं रेजिमेंट के लिए यह सिद्धपीठ अत्यंत पूजनीय है। कुमाऊं रेजिमेंट के जवान और अधिकारी मां हाटकलिका को अपनी आराध्य और संरक्षक देवी मानते हैं। सीमा पर तैनात जवानों और सैनिकों की इस मंदिर के प्रति अटूट आस्था जुड़ी है, और सैन्य कर्मियों द्वारा यहां आकर पूजा-अर्चना करने की एक लंबी परंपरा चली आ रही है। सैनिकों और श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि मां हाटकलिका हर विपत्ति और संकट की घड़ी में अपने भक्तों की ढाल बनकर रक्षा करती हैं।

ये भी पढ़ें

आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापना और पौराणिक इतिहास

धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, इस पावन शक्तिपीठ की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा की गई थी। इसके ऐतिहासिक निर्माण और विकास का संबंध 9वीं से 14वीं शताब्दी के दौरान कत्यूरी और चंद वंश के राजाओं के शासनकाल से जोड़ा जाता है। इसके अलावा, स्कंद पुराण के मानस खंड में भी इस पावन स्थल का विशेष उल्लेख मिलता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, माता काली पश्चिम बंगाल से आकर गंगोलीहाट के इस स्थान पर बस गई थीं। इसी पावन भूमि पर माता काली ने सुमैया नामक दैत्य का संहार कर धर्म की रक्षा की थी।

रात में देवी का विश्राम और सुबह बिस्तर पर सिलवटों का चमत्कार

स्थानीय लोकमान्यताओं में इस मंदिर से जुड़ा एक बड़ा रहस्य सदियों से चर्चा का विषय रहा है। मान्यता है कि रात्रि के समय साक्षात मां काली मंदिर परिसर में विश्राम करने के लिए पधारती हैं। इसी आस्था के तहत मंदिर के पुजारी रोजाना रात को माता रानी के विश्राम हेतु बिस्तर सजाते हैं। अगली सुबह जब पूजा-अर्चना के लिए मंदिर के कपाट खोले जाते हैं, तो उस बिस्तर पर स्पष्ट सिलवटें दिखाई देती हैं। श्रद्धालु और स्थानीय निवासी इसे देवी के जागृत होने और रात में वहां उपस्थित रहने का प्रत्यक्ष प्रमाण मानते हैं।

नकारात्मक शक्तियों का निवारण और नवरात्रि में विशेष अनुष्ठान

धार्मिक परंपराओं में मां हाटकालिका को भगवान शिव की शक्ति और देवी काली के अत्यंत उग्र स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना से हर मनोकामना पूर्ण होती है और देवी की कृपा से सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों, बाधाओं और कष्टों से मुक्ति मिलती है। नवरात्रि और प्रमुख पर्वों के दौरान इस पहाड़ी परिसर में श्रद्धालुओं का भारी तांता लगता है। मंदिर में गूंजती घंटियों की ध्वनि, वेदमंत्रों का पाठ और देवदार के वनों से घिरी शांत वादियों का संगम यहां आने वाले हर साधक को एक अलौकिक आध्यात्मिक अनुभूति से भर देता है।

सवाल-जवाब

मां हाटकलिका का मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट में घने देवदार के जंगलों के बीच स्थित है।
हाटकलिका मंदिर किस सैन्य रेजिमेंट की आराध्य देवी है?
यह मंदिर भारतीय सेना की प्रसिद्ध कुमाऊं रेजिमेंट की आराध्य और संरक्षक देवी का पावन स्थल है।
इस शक्तिपीठ की स्थापना किसने की थी?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस सिद्धपीठ की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी।
मंदिर के निर्माण का संबंध किन राजवंशों से माना जाता है?
मंदिर का निर्माण 9वीं से 14वीं शताब्दी के दौरान कत्यूरी और चंद वंश के राजाओं के काल से जुड़ा हुआ है।
स्कंद पुराण के अनुसार मां काली ने यहां किस दैत्य का वध किया था?
स्कंद पुराण के मानस खंड के अनुसार मां काली ने इस स्थान पर सुमैया नामक दैत्य का वध किया था।
मंदिर में सुबह दिखने वाला चमत्कार क्या है?
रात में पुजारी द्वारा लगाए गए माता के बिस्तर पर सुबह कपाट खोलने पर सिलवटें दिखाई देती हैं, जिसे देवी की उपस्थिति का प्रमाण माना जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 मिनट पहले

यह रिपोर्ट धार्मिक आस्था और सैन्य इतिहास के अनूठे संगम को दर्शाती है, जहाँ कुमाऊं रेजिमेंट की सुरक्षा से जुड़ी मान्यता राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक मनोबल के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। सीमा पर तैनात सैनिकों का इस जागृत शक्तिपीठ से भावनात्मक जुड़ाव यह रेखांकित करता है कि हमारी सेना में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विश्वास का कितना गहरा स्थान है, जो युद्ध के मैदान में मनोबल को बनाए रखता है।

Rohan Verma@rohan-verma·11 मिनट पहले

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि कैसे हमारी सेना के भीतर आध्यात्मिक बल और रणनीतिक मनोबल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। गंगोलीहाट जैसे सीमावर्ती और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित ऐसे शक्तिपीठ केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं हैं, बल्कि यह सैनिकों को मानसिक दृढ़ता प्रदान करते हैं। दुर्गम इलाकों में तैनात जवानों के लिए यह सांस्कृतिक और पौराणिक जुड़ाव हर चुनौती का सामना करने की प्रेरणा बनता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp