राजस्थान के जंगलों में भेड़ियों के संरक्षण और उनकी घटती आबादी को फिर से बढ़ाने के लिए वन विभाग ने एक व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू किया है. इस बड़े अभियान का मुख्य केंद्र हाड़ौती संभाग के वन क्षेत्र और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व को बनाया गया है. इसके अलावा मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में भेड़ियों की वास्तविक तादाद, उनके प्राकृतिक वास और रोजमर्रा की गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन करने के लिए एक विस्तृत सर्वे शुरू किया गया है, ताकि वन्यजीवों के इस महत्वपूर्ण हिस्से को नया जीवन दिया जा सके.
जनभागीदारी और डिजिटल फॉर्म से तैयार होगा सुरक्षित कॉरिडोर
इस पूरे संरक्षण अभियान में वन विभाग ने स्थानीय समुदायों और आम लोगों की सक्रिय भागीदारी पर खास ध्यान दिया है. अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए ग्रामीणों, वन्यजीव प्रेमियों, शोधकर्ताओं और फोटोग्राफरों को सीधे तौर पर शामिल किया जा रहा है. भेड़ियों की सटीक लोकेशन और गतिविधियों की जानकारी जुटाने के लिए विभाग ने एक विशेष गूगल फॉर्म भी उपलब्ध कराया है. जंगल या उसके आसपास किसी भी हिस्से में भेड़िया नजर आने पर कोई भी व्यक्ति उस फॉर्म के माध्यम से विभाग को तुरंत सूचना दे सकता है. कोटा संभाग का वन अमला इस डिजिटल डेटा का विश्लेषण करके भेड़ियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए मजबूत कॉरिडोर विकसित करेगा.
पंद्रह वर्षों में आबादी का बड़ा उतार-चढ़ाव
प्रदेश में भेड़ियों की संख्या पिछले डेढ़ दशक में लगातार अस्थिर रही है. आंकड़ों के अनुसार साल 2010 में राजस्थान भर में लगभग 1,289 भेड़िये दर्ज थे, लेकिन अगले दस वर्षों में यह संख्या तेजी से गिरकर साल 2020 में केवल 682 रह गई. इसके बाद गिरावट का सिलसिला जारी रहा और साल 2022 की गणना में यह आंकड़ा सिमटकर 532 पर आ गया. हालांकि, साल 2024 की वन्यजीव गणना में कुछ सकारात्मक संकेत दिखे, जब प्रदेश में भेड़ियों की कुल संख्या बढ़कर 771 दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हाड़ौती के प्राकृतिक आवासों में सख्त निगरानी और अनुकूल माहौल उपलब्ध कराया जाए, तो इनकी आबादी में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है.
उपरमाल पठार पर 800 हेक्टेयर का सेफ जोन और पर्यटन
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले भीमझरी और बांका-गोपालपुरा बफर क्षेत्रों में पिछले दो वर्षों से भेड़िया संरक्षण से जुड़ी शुरुआती गतिविधियां चल रही थीं. अब इस काम को बड़ा विस्तार देते हुए गोपालपुरा रेंज के उपरमाल पठारी इलाके में करीब 800 हेक्टेयर वन क्षेत्र को भेड़ियों और भालुओं के लिए पूर्ण सुरक्षित प्राकृतिक ठिकाने के रूप में तैयार किया जा रहा है. इस पूरे इलाके की जीपीएस मैपिंग की जा रही है और साथ ही पर्यावरण अनुकूल इको-टूरिज्म की संभावनाओं को भी तलाशा जा रहा है, ताकि वन्यजीवों की मुकम्मल सुरक्षा के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकें.

















