राजस्थान के झुंझुनूं जिले में पंचायत समिति चुनाव से जुड़े एक गंभीर प्रकरण में कानूनी शिकंजा कस गया है. सूरजगढ़ पंचायत समिति चुनाव की प्रक्रिया के दौरान हाईकोर्ट के नाम से कथित तौर पर फर्जी आदेश पेश करने के आरोप में स्थानीय कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार के पुत्र जयप्रकाश और हरियाणा में सेवारत बैंक मैनेजर उमेश भूकर के खिलाफ पुलिस ने औपचारिक आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है. इस घटनाक्रम की पुष्टि झुंझुनूं के जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने की है. चुनाव संचालन के दौरान न्यायिक दस्तावेजों के साथ कथित हेराफेरी सामने आने के बाद निर्वाचन मशीनरी और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है.
रिटर्निंग ऑफिसर की शिकायत पर जालसाजी का आपराधिक मुकदमा दर्ज
यह पूरी कानूनी कार्रवाई सूरजगढ़ के रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) की लिखित शिकायत के आधार पर शुरू हुई है. निर्वाचन अधिकारी ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया कि चुनावी प्रक्रिया के संचालन के समय हाईकोर्ट का एक ऐसा आदेश प्रस्तुत किया गया था, जो प्रथम दृष्टया संदिग्ध और कथित तौर पर फर्जी पाया गया. चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के उद्देश्य से जाली न्यायिक आदेश का उपयोग किए जाने के संदेह पर पुलिस ने जयप्रकाश और उमेश भूकर के विरुद्ध जालसाजी और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है. स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव की निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादाओं के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
सह-आरोपी बैंक मैनेजर और आरोपियों की पृष्ठभूमि
इस मामले में नामजद दूसरे आरोपी उमेश भूकर मूल रूप से झुंझुनूं जिले के गोरियां गांव के रहने वाले हैं. वर्तमान में वह पड़ोसी राज्य हरियाणा में एक राष्ट्रीयकृत सरकारी बैंक में शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं. पुलिस अब इस पहलू की गहन पड़ताल कर रही है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान इस कथित आदेश को तैयार करने, प्रमाणित दिखाने और निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने में किसकी क्या विशिष्ट भूमिका रही थी. क्या इस दस्तावेज को तैयार करने में किसी संगठित गिरोह का हाथ था या फिर दोनों आरोपियों ने इसे सीधे तौर पर पेश किया, इन सभी तकनीकी और कानूनी बिंदुओं की विवेचना की जा रही है.
हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, रजिस्ट्रार को तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश
न्यायालय के नाम का दुरुपयोग कर कथित जाली दस्तावेज पेश करने के मामले को न्यायपालिका ने भी बेहद गंभीरता से लिया है. हाईकोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम पर स्वतः संज्ञान लेते हुए रजिस्ट्रार को विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश जारी किए थे. कोर्ट ने रजिस्ट्रार को तीन दिन के भीतर पूरे मामले की पड़ताल कर वास्तविक स्थिति साफ करने का समय दिया था. आज 2 नवंबर को इस अहम मामले में हाईकोर्ट की पीठ के समक्ष सुनवाई निर्धारित है. इस न्यायिक सुनवाई के दौरान रजिस्ट्रार की ओर से पेश की जाने वाली गोपनीय जांच रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी.
न्यायिक पड़ताल और पुलिस तफ्तीश पर टिकी आगामी कार्रवाई
आज होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई और रजिस्ट्रार की रिपोर्ट से यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा कि पंचायत समिति चुनाव में दाखिल किया गया आदेश वास्तविक रिकॉर्ड का हिस्सा था या उसमें जालसाजी, कूटरचना अथवा छेड़छाड़ की गई थी. एक तरफ जहां सूरजगढ़ थाने की पुलिस रिटर्निंग ऑफिसर की तहरीर पर दर्ज मुकदमे में साक्ष्य जुटा रही है, वहीं दूसरी तरफ हाईकोर्ट का रुख भी बेहद निर्णायक साबित होगा. दोनों आरोपियों पर लगे आरोप वर्तमान में जांच के दायरे में हैं, और न्यायिक रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर ही आने वाले दिनों में गिरफ्तारी अथवा आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी.

















