आमतौर पर अश्व पालकों के बीच यह चिंता सबसे बड़ी होती है कि अपने पशु को शारीरिक रूप से कैसे ताकतवर और सेहतमंद बनाया जाए। इसके लिए शुरुआती उम्र से ही घोड़े के खान-पान पर विशेष ध्यान देना बेहद महत्वपूर्ण होता है। जब घोड़ा विकास के चरण में होता है, तो उसके शरीर, हड्डियों और मांसपेशियों के ढांचे का निर्माण तेजी से हो रहा होता है। ऐसे नाजुक समय में उन्हें पौष्टिक और संतुलित भोजन मिलना चाहिए। कई लोग सोचते हैं कि केवल अत्यधिक मात्रा में सूखा या हरा चारा खिलाने से पशु स्वस्थ हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है। घोड़े की वास्तविक जरूरत उसकी उम्र, शारीरिक बनावट और उसके द्वारा किए जाने वाले काम के स्तर पर निर्भर करती है।
बढ़ती उम्र में सही पोषण का महत्व
घोड़ों के विकास के शुरुआती वर्ष उनके पूरे जीवनकाल की मजबूती तय करते हैं। इस अवस्था में शरीर के संपूर्ण विकास के लिए पोषक तत्वों की भारी मांग होती है। यदि इस समय भोजन में असंतुलन रहता है, तो पशु की हड्डियां कमजोर रह सकती हैं और मांसपेशियों का विकास प्रभावित हो सकता है। इसलिए, उन्हें एक ऐसा आहार दिया जाना चाहिए जिसमें सभी जरूरी तत्व मौजूद हों। पशुपालकों को अत्यधिक चारा देने के बजाय गुणवत्तापूर्ण और योजनाबद्ध तरीके से तैयार की गई खुराक पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
बछेड़ों के लिए जरूरी आहार और सावधानियां
छोटे घोड़ों यानी बछेड़ों के पोषण का तरीका थोड़ा अलग होता है। उनके लिए हमेशा उच्च गुणवत्ता का सूखा चारा, ताजी हरी घास और पीने का बिल्कुल साफ पानी उपलब्ध रहना चाहिए। यदि आप उन्हें अतिरिक्त पोषक तत्व देना चाहते हैं, तो किसी योग्य पशु चिकित्सक या पशु पोषण विशेषज्ञ से परामर्श लेकर उनकी उम्र के मुताबिक तैयार संतुलित दाना दे सकते हैं। यहाँ एक बड़ी सावधानी बरतनी जरूरी है; कभी भी अचानक बछेड़े को बहुत ज्यादा अनाज या भारी मात्रा में दाना नहीं परोसना चाहिए। ऐसा करने से उनका नाजुक पाचन तंत्र बिगड़ सकता है और वे गंभीर पेट दर्द या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के शिकार हो सकते हैं।
देसी खुराक तैयार करने का सही तरीका
भारत में पारंपरिक तौर पर घोड़ों को मजबूत बनाने के लिए घरेलू या देसी खुराक दी जाती है। इस घरेलू आहार में मुख्य रूप से जौ, चना, मक्का और कुछ अन्य पौष्टिक अनाजों को शामिल किया जाता है। हालांकि, इन चीजों को मनमाने ढंग से खिलाने के बजाय घोड़े की उम्र और उसकी मेहनत के अनुसार सीमित मात्रा में ही देना सही रहता है। अनाजों को सीधे खिलाने के बजाय पहले उन्हें अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। इसके बाद, जरूरत के मुताबिक इन्हें पानी में भिगोकर या थोड़ा दरदरा पीसकर खिलाना ज्यादा फायदेमंद और सुपाच्य होता है। इसके अलावा, जब भी आप घोड़े की नियमित खुराक में कोई बदलाव करना चाहें, तो इसे अचानक करने के बजाय धीरे-धीरे कुछ दिनों के अंतराल में करें ताकि उनके पेट को नए आहार के अनुकूल होने का समय मिल सके।
केवल अनाज ही नहीं, इन पोषक तत्वों पर भी दें ध्यान
अक्सर लोग सोचते हैं कि ढेर सारा अनाज खिलाने से ही घोड़े की हड्डियां वज्र जैसी मजबूत हो जाएंगी, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। मजबूत हड्डियों और सुगठित शरीर के विकास के लिए सिर्फ अनाज काफी नहीं होता। घोड़ों के आहार में पर्याप्त मात्रा में रेशा, प्रोटीन, आवश्यक खनिज और विटामिन का होना भी उतना ही अनिवार्य है। इसके अलावा, नमक और विशेष मिनरल सप्लीमेंट की आवश्यकता भी हर घोड़े के लिए अलग होती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि घोड़े की उम्र क्या है, उसे किस प्रकार का चारा मिल रहा है और उसकी सेहत की स्थिति कैसी है। इसलिए, बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के अपनी मर्जी से किसी भी एक सप्लीमेंट को बहुत ज्यादा मात्रा में नहीं खिलाना चाहिए।
साफ-सफाई और बीमारी के लक्षणों पर रखें नजर
घोड़े की अच्छी सेहत के लिए केवल भोजन ही नहीं, बल्कि उसके रख-रखाव की स्वच्छता भी उतनी ही मायने रखती है। पशु के पास चौबीसों घंटे पीने का ताजा और बिल्कुल साफ पानी उपलब्ध होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, आप जो भी चारा स्टोर करके रखते हैं, उसे फफूंद, सीलन, नमी और हर तरह की गंदगी से सुरक्षित रखना जरूरी है। फफूंदयुक्त चारा खाने से घोड़े गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं। यदि आपको कभी भी अपने घोड़े में दस्त, भूख की कमी, पेट में मरोड़ या दर्द, कमजोरी या लगातार वजन घटने जैसे असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो घर पर ही इलाज या घरेलू नुस्खों के भरोसे वक्त बर्बाद नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी स्थानीय पशु चिकित्सक से संपर्क कर उचित इलाज शुरू करवाना ही सबसे समझदारी भरा कदम होता है।
















