राजस्थान में मानसून की सुस्त चाल का असर अब सीधे जंगलों की जिंदगी पर दिखने लगा है और जयपुर के झालाना लेपर्ड रिजर्व से आया एक वीडियो इसकी बानगी बन गया है, जिसमें रिजर्व के मशहूर लेपर्ड राणा को एक नर नीलगाय के सामने पीछे हटना पड़ा। कैमरे में कैद हुआ यह नजारा इसलिए चर्चा में है क्योंकि जंगल के सबसे बेखौफ शिकारियों में गिने जाने वाले इस लेपर्ड ने भिड़ने की बजाय पीछे हटना बेहतर समझा।
पानी के एक कुंड पर हुआ आमना-सामना
घटना उस वक्त की है जब राणा रिजर्व के एक वाटर पॉइंट के पास आराम फरमा रहा था। इतने में एक भारी भरकम नर नीलगाय बिना किसी डर के उसी जगह चला आया। आमतौर पर जंगल के बाकी जानवर लेपर्ड की मौजूदगी भांपते ही रास्ता बदल लेते हैं, मगर इस रोजड़े को शायद प्यास ने इतना बेचैन कर रखा था कि उसने शिकारी की परवाह ही नहीं की और सीधा पानी तक चला गया। शिकारी और शिकार का इस तरह एक ही कुंड पर आमने-सामने आना दुर्लभ ही होता है, और यह बताता है कि रिजर्व के भीतर इस मौसम में पानी की उपलब्धता कितनी सीमित हो चुकी है।
सींग तानकर आगे बढ़ा रोजड़ा, गुर्राहट से नहीं डरा
पानी में मुंह डालते ही नीलगाय ने अपनी प्यास बुझानी शुरू कर दी। राणा ने अपनी मौजूदगी जताने के लिए गुर्राहट भरी, ताकि सामने वाला जानवर हट जाए, लेकिन नीलगाय टस से मस नहीं हुआ। उलटे उसने अपने नुकीले सींग तानकर लेपर्ड की दिशा में कदम बढ़ा दिए, जिससे कुछ पलों के लिए पूरा माहौल तनाव से भर गया। कुछ देर के लिए दोनों में से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं था, मानो दोनों यह परख रहे हों कि पहले कौन नजरें झुकाता है।
टकराव की बजाय राणा ने चुनी सूझबूझ
कैमरे में कैद हुए इस पूरे नजारे में राणा ने हालात को भांपते हुए भिड़ने से इनकार कर दिया। जंगल के सबसे माहिर शिकारियों में गिना जाने वाला यह लेपर्ड भी जानता था कि नीलगाय के वजनदार शरीर और नुकीले सींगों से टकराना बेवजह का खतरा मोल लेना होगा, इसलिए वह चुपचाप वहां से हट गया। इसके बाद नीलगाय पूरे इत्मीनान से पानी के पास डटा रहा। इस फैसले ने यह भी जता दिया कि जंगल में हमेशा ताकत ही अंतिम फैसला नहीं करती, बल्कि खतरे को सही वक्त पर भांप लेना भी उतना ही जरूरी होता है।
मोर की चेतावनी भरी आवाजों से गूंजा जंगल
इस घटनाक्रम के दौरान आसपास बैठे मोर, टिटहरी और कुछ अन्य पक्षी भी खामोश दर्शक नहीं रहे। जैसे ही राणा पीछे हटा, कई मोर एक साथ तेज आवाजें निकालने लगे। मोरों की यह पुकार आमतौर पर लेपर्ड के आसपास होने पर सुनाई देती है, लेकिन इस बार उनका शोर बदले हुए हालात, यानी शिकारी की पीछे हटने की खबर, जैसा जान पड़ रहा था। आमतौर पर यह आवाजें लेपर्ड के गुजरने की चेतावनी मानी जाती हैं, लेकिन इस मौके पर उनका शोर मानो इस असामान्य नतीजे को ही रेखांकित कर रहा था।
घटते जलस्रोत बन रहे हैं असली वजह
वन्यजीव जानकारों का कहना है कि झालाना में लेपर्ड भले ही खाद्य श्रृंखला में सबसे ऊपर हो, मगर एक वयस्क नर नीलगाय अपने भारी शरीर और मजबूत सींगों की बदौलत बराबरी का प्रतिद्वंद्वी बन सकता है, इसीलिए अनुभवी शिकारी भी अक्सर सीधी भिड़ंत टालना ही समझदारी मानते हैं। झालाना के लेपर्ड आमतौर पर हर वाटर पॉइंट पर अपना ही रौब चलाते हैं, यही वजह है कि इस बार का पीछे हटना जंगल पर नजर रखने वालों को इतना असाधारण लगा। यह वाकया सिर्फ दो जानवरों की भिड़ंत भर नहीं है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बदलता मौसम और सिकुड़ते जलस्रोत जंगल के अंदर पानी के लिए मुकाबला कितना बढ़ा रहे हैं। जब कुंड और तालाब सूखने लगते हैं, तो जंगल का हर जीव जिंदा रहने के लिए अपनी पूरी ताकत और चालाकी झोंक देता है।




















