राजस्थान के मरुस्थलीय जिले जैसलमेर में लंबे समय से पड़ रही भीषण गर्मी के बाद अचानक मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। सीमा पर स्थित इस रेतीले क्षेत्र के निवासी पिछले कई हफ्तों से लगातार चिलचिलाती धूप, आसमान से बरसती आग और असहनीय उमस भरी गर्मी से बुरी तरह परेशान थे। दिन के समय बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया था और लोग अपने घरों में कैद रहने को मजबूर थे। लेकिन अब अचानक हुई झमाझम बारिश ने स्थानीय लोगों को इस भयंकर तपिश से एक बहुत बड़ी राहत प्रदान की है। केवल मुख्य जैसलमेर शहर ही नहीं, बल्कि जिले के आसपास के तमाम दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में भी जमकर काले बादल बरसे हैं। इस भारी और मूसलाधार वर्षा के कारण पूरी सूखी मरुभूमि पानी से पूरी तरह सराबोर हो गई है। महीनों के लंबे इंतजार के बाद आसमान से गिरी इन ठंडी बूंदों ने रेगिस्तान के आम जनजीवन में एक नई ताजगी, ऊर्जा और उल्लास का संचार कर दिया है। पश्चिमी राजस्थान का यह पूरा इलाका आमतौर पर अपने चरम तापमान और धूल भरी आंधियों के लिए जाना जाता है। ऐसे में जब यहां अचानक काले बादल घिरते हैं और बारिश होती है, तो पूरा नजारा ही जादुई हो जाता है। बारिश शुरू होते ही पारे में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे उमस का नामोनिशान मिट गया। अब ठंडी और सुखद हवाएं चल रही हैं, जिन्होंने समूचे वातावरण को बेहद सुहावना और सुकून भरा बना दिया है।
सड़कों पर बहा पानी और पर्यटकों का उल्लास
जैसलमेर के मुख्य बाजारों, व्यस्त चौराहों और निचले हिस्सों में भारी बारिश के कारण सड़कों पर पानी का अत्यंत तेज बहाव देखने को मिला। डामर की सड़कें कुछ ही देर में पानी के छोटे नालों में तब्दील हो गईं। शहर की भौगोलिक स्थिति के कारण कई जगहों पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। हालांकि, चिलचिलाती गर्मी से मिली इस अप्रत्याशित राहत के सामने आम जनता ने पानी भरने जैसी इन छोटी परेशानियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। स्वर्ण नगरी की ऐतिहासिक छतरियों, हरे-भरे उद्यानों और अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थलों पर पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई इस मनमोहक और खुशनुमा मौसम का भरपूर आनंद लेना चाहता था। छोटे बच्चों और युवाओं का उत्साह सबसे अधिक देखने लायक था। वे अपनी छतों और शहर की गलियों में निकल आए और बारिश के पानी में भीगकर इस दिन का जमकर जश्न मनाया। शहर के हर कोने में खुशी का माहौल नजर आ रहा था।
कृषि और पशुपालन के लिए वरदान साबित हुई बारिश
बारिश का यह सुखद और राहत भरा दौर केवल शहरी सीमाओं के भीतर ही सीमित नहीं रहा। जैसलमेर जिले के दूरदराज के रेतीले ग्रामीण अंचलों में भी मेघों की यह भारी मेहरबानी देखने को मिली है। पश्चिमी राजस्थान के इन सीमावर्ती गांवों में जीवन मुख्य रूप से पशुपालन और बारिश पर निर्भर खेती पर टिका होता है। ऐसे में यह मानसूनी बारिश यहां के लोगों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। लंबे समय से गर्मी की मार झेल रही और पूरी तरह से सूखी पड़ी रेतीली जमीन को इस वर्षा से बहुत जरूरी नमी प्राप्त हुई है। भीषण तपन और प्यास से बेहाल हो रहे जंगली पशु-पक्षियों और अन्य मवेशियों को भी इस प्राकृतिक ठंडक से बहुत बड़ा सुकून मिला है। इस समय होने वाली वर्षा खेती-बाड़ी की गतिविधियों को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करेगी। इससे चारे के उत्पादन में भी वृद्धि होगी, जो पशुपालकों के लिए अत्यधिक लाभदायक साबित होगी। खेतों में नमी लौटने से किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं।
आगामी घंटों के लिए मौसम का पूर्वानुमान और चेतावनी
जैसलमेर के आसमान में अभी भी काले और घने बादलों का भारी जमावड़ा बना हुआ है। बादलों की इस निरंतर आवाजाही और बदलते मौसमी पैटर्न को देखते हुए मौसम विभाग तथा स्थानीय विशेषज्ञों ने स्पष्ट अनुमान जताया है कि बारिश का यह सिलसिला अभी थमेगा नहीं। आने वाले कुछ घंटों तक जैसलमेर शहर के साथ-साथ इसके सीमावर्ती और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में हल्की से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश का यह सुहावना दौर लगातार जारी रहने की प्रबल संभावना है। निरंतर हो रही इस बारिश के बीच मौसम विशेषज्ञों ने आम जनता के लिए एक अहम सलाह भी जारी की है। नागरिकों को हिदायत दी गई है कि वे इस खूबसूरत मौसम का आनंद लेते समय पूरी सतर्कता भी बरतें। विशेषकर उन निचले और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है, जहां खतरा अधिक होता है। थोड़ी सी सावधानी बरतने से किसी भी प्रकार की अप्रिय दुर्घटना से बचा जा सकता है और इस बेहतरीन प्राकृतिक बदलाव का सुरक्षित तरीके से लुत्फ उठाया जा सकता है।




















