बिहार के दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड स्थित मझौलिया गांव के एक बेटे ने प्रशासनिक सेवा में ऐसी छाप छोड़ी है कि तीन दशक बाद भी उसकी चर्चा होती है। नवीन कुमार चौधरी आज दिल्ली सरकार में PWD विभाग के प्रधान सचिव हैं, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने से पहले उन्होंने लेह-लद्दाख की कठिन प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं और एक विवादित मामले में CBI की जांच का भी सामना किया।
1994 में गांव में मना था जश्न
मई 1994 में जब UPSC का नतीजा आया, तो नवीन चौधरी ने देशभर में छठी रैंक हासिल की थी। यह खबर मझौलिया गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में मिठाइयां बंटने लगीं। ग्रामीणों और आसपास के लोगों ने बताया कि उस दौर में इतनी ऊंची रैंक किसी स्थानीय युवा के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी, और इस सफलता ने पूरे मिथिला क्षेत्र को गर्व से भर दिया था।
जम्मू-कश्मीर कैडर से लेह-लद्दाख तक
अच्छी रैंक मिलने के बाद नवीन चौधरी ने जम्मू-कश्मीर कैडर चुना। यहां उन्होंने लेह-लद्दाख के डिप्टी कमिश्नर यानी डीसी समेत कई अहम पदों की जिम्मेदारी संभाली। इसी दौरान एक पावर प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में तत्कालीन उपराज्यपाल सत्यपाल मलिक ने उन पर आरोप लगाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI ने उनके घर सहित कई ठिकानों पर छापेमारी की। हालांकि जांच में कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लगा। इस पूरे प्रकरण को राजनीति से प्रेरित माना गया और नवीन चौधरी की छवि बेदाग बनी रही।
क्लीन चिट के बाद मेघालय, फिर दिल्ली की पुकार
जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद उनका कैडर बदलकर मेघालय कर दिया गया। इसके बाद दिल्ली सरकार ने उन्हें अपने यहां बुला लिया। दिल्ली में शुरुआत में उन्हें यमुना नदी की सफाई जैसी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसमें उन्होंने काफी हद तक सफलता हासिल की। इसी अनुभव और काम को देखते हुए वर्तमान में उन्हें PWD विभाग के प्रधान सचिव का दायित्व दिया गया है, जो दिल्ली सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में गिना जाता है।
गांव को आज भी है अपने बेटे पर नाज़
मझौलिया के ग्रामीणों का कहना है कि नवीन चौधरी के IAS अधिकारी बनने से पूरे गांव का नाम रोशन हुआ है। हालांकि अब गांव के लोग यह उम्मीद नहीं रखते कि कोई एक अधिकारी अकेले पूरे गांव का विकास कर देगा, फिर भी मझौलिया गांव आज भी अपने इस बेटे की उपलब्धियों पर गर्व महसूस करता है।


















