राजस्थान के विभिन्न इलाकों में लंपी वायरस के फैलने से पशुपालक भारी चिंता में घिरे हुए हैं, लेकिन इसी संकट के दौर में भरतपुर स्थित काली बगीची गौशाला की गायें अपने बेहतरीन स्वास्थ्य को लेकर खासी सुर्खियां बटोर रही हैं। इस गौशाला में काफी बड़ी तादाद में गायों का संरक्षण और पालन-पोषण किया जा रहा है। गौशाला प्रबंधन का स्पष्ट कहना है कि मवेशियों को हर तरह की मौसमी और संक्रामक बीमारियों से महफूज रखने के लिए परिसर की संपूर्ण स्वच्छता, पौष्टिक खान-पान और चौबीसों घंटे की निगरानी पर कड़ा ध्यान दिया जाता है।
चमत्कार और धार्मिक आस्था से जुड़ी मान्यता
काली बगीची परिसर को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच एक बहुत पुरानी और अनोखी मान्यता प्रचलित है। मंदिर के पुजारी के अनुसार, लंबे समय से यह विश्वास चला आ रहा है कि इस पवित्र गौशाला की परिधि में वास करने वाली गायों पर किसी भी घातक या गंभीर बीमारी का असर नहीं होता। जब आसपास के इलाकों में लंपी वायरस का खतरा मंडरा रहा है, तब यहां के पशुओं को तंदुरुस्त देखकर बड़ी संख्या में भक्त इसे ईश्वरीय कृपा, धार्मिक आस्था और चमत्कार के रूप में देख रहे हैं।
सख्त स्वच्छता और वैज्ञानिक प्रबंधन की व्यवस्था
दूसरी तरफ, गौशाला की संचालन समिति इसे नियमित परिश्रम और अनुशासन का नतीजा मानती है। प्रबंधन के अनुसार, प्रत्येक गाय की सेहत पर लगातार नजर रखी जाती है। संक्रमण की रोकथाम के लिए बाड़ों की रोजाना धुलाई, साफ-सफाई, संतुलित और पौष्टिक चारा, स्वच्छ पेयजल तथा आवश्यकता पड़ने पर पशु चिकित्सकों से परामर्श लेने में कोई कोताही नहीं बरती जाती। यदि किसी भी पशु में अस्वस्थता अथवा असामान्य लक्षण नजर आते हैं, तो उसे तत्काल अलग रखकर विशेष निगरानी और चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जाता है। गौशाला के दर्शन करने आने वाले आगंतुक और स्थानीय नागरिक भी यहां गौसेवा के साथ-साथ वैज्ञानिक प्रबंधन के इस तालमेल की सराहना करते हैं।
आस्था बनाम पशु चिकित्सा विज्ञान
मवेशियों के पूरी तरह निरोगी बने रहने के पीछे केवल चमत्कार है अथवा सुदृढ़ वैज्ञानिक कारण, यह विषय अलग-अलग दृष्टिकोणों में बंटा हुआ है। पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संक्रामक महामारी से पशुधन की रक्षा करने में स्वच्छता, समयबद्ध टीकाकरण, त्वरित उपचार और नियमित डॉक्टरी निगरानी सबसे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। काली बगीची गौशाला की स्वस्थ गायें चाहे आस्था का प्रतीक मानी जाएं या प्रबंधन के अथक प्रयासों का फल, लेकिन संकट के समय पशुओं की वैज्ञानिक देखभाल और सतर्कता का महत्व हर पशुपालक के लिए सर्वोपरि साबित हो रहा है।

















