बीकानेर जिले के सीमावर्ती इलाके खाजूवाला के 1KJD गांव में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के बाहर गांव के लोग और छात्र इकट्ठा हुए और स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया. इसके साथ ही उन्होंने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया. वजह साफ है, स्कूल की पुरानी इमारत गिराए जाने के बाद अब पूरा स्कूल सिर्फ दो कमरों में चल रहा है और बच्चों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त जगह ही नहीं मिल रही.
दो कमरों में सैकड़ों बच्चे, कैसे हो पढ़ाई
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में दर्ज बच्चों की संख्या के हिसाब से मौजूदा दो कमरे कहीं से भी पर्याप्त नहीं हैं. पुरानी बिल्डिंग को डिस्मेंटल तो कर दिया गया, लेकिन उसकी जगह नई इमारत का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका. नतीजा यह है कि अलग अलग कक्षाओं के बच्चों को एक ही छोटी जगह में बिठाकर पढ़ाना पड़ रहा है. ग्रामीणों के मुताबिक इतनी भीड़भाड़ वाली क्लास में न तो बच्चे ठीक से बैठ पाते हैं और न ही शिक्षक सामान्य तरीके से पढ़ा पाते हैं, जिससे रोजाना की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है.
बार-बार शिकायत के बावजूद नहीं मिला समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला कोई नया नहीं है. स्कूल भवन की इस दिक्कत को लेकर वे शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कई बार मिल चुके हैं और अपनी शिकायत दर्ज करा चुके हैं. इसके बावजूद न तो नई बिल्डिंग बनाने की मंजूरी मिली और न ही निर्माण कार्य को लेकर कोई ठोस पहल हुई. ग्रामीणों का कहना है कि महीनों की खामोशी और अनदेखी के बाद अब उनके पास धरना देने और गेट पर ताला जड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था. धरने पर बैठे ग्रामीणों और छात्रों ने साफ मांग रखी है कि विद्यालय में कम से कम चार नए कमरे बनवाए जाएं, ताकि सभी कक्षाओं को अलग अलग जगह मिल सके और बच्चों को बेहतर माहौल में पढ़ाई करने का मौका मिले. उन्होंने यह भी कहा है कि जब तक मांग पूरी नहीं होती, गेट पर ताला लगा ही रहेगा और धरना जारी रहेगा.
नहीं मानी बात तो भूख हड़ताल की चेतावनी
धरने पर बैठे ग्रामीणों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग को सीधी चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही भवन निर्माण को लेकर कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा. जरूरत पड़ी तो ग्रामीण और छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठ सकते हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द विद्यालय के लिए पर्याप्त भवन उपलब्ध कराया जाए, ताकि आने वाले दिनों में किसी भी बच्चे की पढ़ाई जगह की कमी की वजह से प्रभावित न हो.



















