राजस्थान में आगामी निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के मामलों में पूरी तरह सख्त रुख अपना लिया है। पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ जाकर बगावत करने वाले नेताओं पर अब गाज गिरने लगी है, जिसकी शुरुआत पाली और सिरोही जिलों से हो चुकी है। इन दोनों ही इलाकों में संगठन के खिलाफ जाकर काम करने वाले कुल 10 पदाधिकारियों को पार्टी से छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इसके अलावा राजधानी जयपुर में भी पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वाले लगभग दो दर्जन मौजूदा और पूर्व पदाधिकारियों की एक लंबी फेहरिस्त तैयार की जा रही है, जिन पर आने वाले दिनों में बड़ा अनुशासनात्मक एक्शन लिया जा सकता है।
सभी जिलों से मांगी गई बागी नेताओं की विस्तृत रिपोर्ट
संगठन के भीतर अनुशासन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश नेतृत्व ने राज्य के सभी जिला संगठनों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। पार्टी मुख्यालय की तरफ से सभी जिलाध्यक्षों को यह कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के ऐसे सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की सूची भेजें जिन्होंने या तो खुद पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ मोर्चा खोला है या फिर बागी उम्मीदवारों के पक्ष में खुलकर प्रचार किया है। इसी आंतरिक जांच और रिपोर्ट के आधार पर पाली और सिरोही में यह पहली बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां एक साथ 10 पदाधिकारियों पर यह कड़ा अनुशासनात्मक हंटर चला है। हालांकि अभी तक इन सभी निष्कासित किए गए चेहरों के नाम और उनके मामलों से जुड़ी पूरी तथ्यात्मक जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है, लेकिन इस सख्त कदम से साफ संदेश दे दिया गया है कि चुनाव के वक्त भीतरघात करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
जयपुर में रडार पर हैं करीब दो दर्जन नेता
राजधानी जयपुर में भी बागी तेवर दिखाने वाले नेताओं की मुश्किलें आने वाले दिनों में काफी बढ़ने वाली हैं। अंदरखाने से मिल रही जानकारी के मुताबिक जयपुर जिले के लगभग दो दर्जन पदाधिकारी और पूर्व पदाधिकारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निशाने पर आ चुके हैं। प्रदेश मुख्यालय ने जयपुर जिला संगठन से उन तमाम नेताओं के बारे में पूरा ब्योरा तलब किया है जिन पर चुनाव के दौरान पार्टी अनुशासन तोड़ने या अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ काम करने के गंभीर आरोप हैं। इस प्रादेशिक रिपोर्ट के मिलने के बाद जयपुर सहित राजस्थान के अन्य हिस्सों में भी कार्रवाई का यह सिलसिला और अधिक तेजी से आगे बढ़ने की पूरी संभावना है। पार्टी हाईकमान ने यह साफ कर दिया है कि चुनावी समर में भीतरघात करने वालों को किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जाएगा और संगठनात्मक सख्ती का यह दौर आगे भी जारी रहेगा।
टिकट वितरण के बाद बढ़ती है बगावत
आम तौर पर स्थानीय निकाय के चुनावों के दौरान टिकट बंटवारे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और नाराजगी के स्वर उठना बहुत आम बात मानी जाती है। कई बार टिकट न मिलने की सूरत में निराश होकर कुछ महत्त्वाकांक्षी नेता और कार्यकर्ता पार्टी लाइन से अलग हटकर निर्दलीय मैदान में कूद जाते हैं या फिर किसी अन्य विरोधी दल के उम्मीदवार की मदद करने लगते हैं। भाजपा नेतृत्व ने इस बार इस तरह की प्रवृत्ति से सख्ती से निपटने का मन बना लिया है। पाली और सिरोही में हुई इन ताबड़तोड़ कार्यवाहियों ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि पार्टी संगठन इस बार किसी भी तरह की गुटबाजी या भितरघात को बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा संभालेंगे चुनावी कमान
एक तरफ जहां पार्टी संगठन बागियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कदम उठाने में जुटा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ चुनावी मैदान में माहौल को भाजपा के पूरी तरह पक्ष में मोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार अभियान भी चलाया जा रहा है। इसी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राजधानी जयपुर की सड़कों पर उतरकर एक भव्य रोड शो के माध्यम से पार्टी के पक्ष में चुनावी माहौल बनाएंगे। मतदान की तारीख से ठीक पहले यानी 9 सितंबर को यह विशेष रोड शो आयोजित किया जाना प्रस्तावित है, जो सुबह के ठीक 11 बजे से शुरू होकर लगभग दो घंटे तक लगातार जारी रहेगा।
सांगानेरी गेट से निकलेगा मुख्यमंत्री का रोड शो
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यह बहुप्रचारित रोड शो ऐतिहासिक सांगानेरी गेट से अपनी भव्य शुरुआत करेगा। वहां से आगे बढ़ते हुए यह काफिला शहर के मुख्य व्यापारिक और व्यस्त मार्गों जैसे कि जौहरी बाजार, बड़ी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार, छोटी चौपड़, चांदपोल बाजार से गुजरते हुए अंत में चांदपोल गेट तक पहुंचेगा। लगभग दो घंटे की इस पूरी चुनावी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री जगह-जगह रुककर जयपुर नगर निगम चुनाव में खड़े सभी भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में जनता से भारी संख्या में मतदान करने की पुरजोर अपील करेंगे। राजधानी में ठीक मतदान से पूर्व होने वाले इस रोड शो को भाजपा की चुनावी रणनीति का एक बेहद अहम और निर्णायक हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी की मुख्य कोशिश यही है कि अंतिम दौर के इन खास पलों में सीधे मतदाताओं के दिल तक पहुंचा जाए। इस प्रकार राजस्थान भाजपा एक ही समय पर दो मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है, जहां एक तरफ अनुशासनहीनता दिखाने वाले बागियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के इस विशाल रोड शो के जरिए पार्टी के चुनाव प्रचार को अभूतपूर्व धार दी जा रही है।



















