राजस्थान में हाल ही में संपन्न हुई करीब 53 हजार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती के बाद चयनित उम्मीदवारों में असंतोष खुलकर बाहर आने लगा है। सोमवार को राजधानी जयपुर में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत चयनित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इन कर्मियों का मुख्य आरोप है कि विभाग ने उन्हें नियुक्ति के बाद सामान्य कार्यालयीन कार्यों पर लगाने के बजाय हॉस्टलों में रसोइया और चौकीदार के तौर पर तैनात कर दिया है।
हॉस्टलों में खाना बनाने और रखवाली का जिम्मा
समाज कल्याण विभाग द्वारा लगभग 900 चयनित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को विभिन्न स्थानों पर पोस्टिंग दी गई है। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि इनमें से एक बहुत बड़ी संख्या को विभाग के विभिन्न छात्रवासों में भेज दिया गया है, जहां उनसे सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार करवाने और पहरेदारी जैसे कार्य कराए जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब इस भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए थे और चयन प्रक्रिया चल रही थी, तब उन्हें इस प्रकार की ड्यूटी के बारे में कोई पूर्व सूचना या जानकारी नहीं दी गई थी।
उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं की पीड़ा और आपत्तियां
इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले कर्मियों में बड़ी संख्या ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं की है जो बेहद उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। इनमें इंजीनियरिंग की बीटेक डिग्री रखने वाले युवा, एमएससी और यहां तक कि पीएचडी की उपाधि धारक भी शामिल हैं। कुछ प्रतिभागियों ने बीएड की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी जब मनचाही शिक्षक की नौकरी नहीं मिली, तो मजबूरी में चतुर्थ श्रेणी के इस पद को स्वीकार कर लिया था।
कर्मचारियों का साफ कहना है कि उन्होंने मेहनत से मिलने वाले किसी भी काम को कभी छोटा नहीं माना, लेकिन जिस पद के लिए उनका चयन हुआ था, उससे पूरी तरह भिन्न और अप्रत्याशित जिम्मेदारियां सौंपे जाने पर उन्हें गहरी आपत्ति है। उनका तार्किक पक्ष यह है कि नियमों के अनुसार रसोइया और चौकीदार के पद पूरी तरह अलग होते हैं और कुक के पद के लिए बाकायदा खाना बनाने के अनुभव का प्रमाण पत्र तक मांगा जाता है। ऐसे में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से नियमित रूप से बावर्ची का काम करवाना पूरी तरह अनुचित है। विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने मांग उठाई कि उनका पदनाम बदलकर 'सहायक कर्मचारी' किया जाए, अन्य सरकारी कर्मियों की भांति उनके लिए भी आठ घंटे की निश्चित ड्यूटी का प्रावधान हो और उन्हें दफ्तरों के भीतर केवल सहायक प्रकृति के काम ही सौंपे जाएं।
अधिकारियों का पक्ष और कर्मचारियों की कड़ी प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले को लेकर जब समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक अमित शर्मा से सवाल पूछा गया कि चतुर्थ श्रेणी कर्मियों से रसोइया का काम क्यों कराया जा रहा है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्य भर्ती के मूल पदनाम के अंतर्गत ही शामिल था। हालांकि, उप निदेशक के ठीक सामने खड़े कर्मचारियों ने इस दावे पर तुरंत अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में गलत बयानबाजी कर रहे हैं और भर्ती के समय उन्हें इन कामों के बारे में कभी नहीं बताया गया था। कर्मचारियों ने अपनी चेतावनी में कहा है कि यदि उनकी मांगों पर प्रशासन ने जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो वे इस आंदोलन को और अधिक उग्र और व्यापक बनाएंगे।



















