प्रसिद्ध धार्मिक स्थल खाटूश्यामजी मंदिर की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को अपने यात्रा कार्यक्रम में बदलाव करने की आवश्यकता है, क्योंकि इस लोकप्रिय मंदिर के कपाट आम जनता के लिए कुछ समय के लिए बंद कर दिए जाएंगे। यह अस्थायी बंदी 16 सितंबर की रात से शुरू होकर अगले दिन तक जारी रहेगी, जिसके दौरान भक्त बाबा श्याम के दर्शन नहीं कर पाएंगे। श्री श्याम मंदिर कमेटी ने इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है, ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और वे अपनी योजना उसी के अनुरूप बना सकें।
मंदिर बंद रहने की अवधि और निर्धारित समय
मंदिर प्रबंधन द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, बुधवार, 16 सितंबर की रात को शयन आरती के बाद रात 10 बजे मंदिर के पट पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद अगले दिन यानी गुरुवार, 17 सितंबर को पूरे दिन आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था बंद रहेगी। यह पूरा अंतराल लगभग 18 घंटे 30 मिनट का होगा, जिसे करीब 19 घंटे माना जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने सभी भक्तों से अनुरोध किया है कि वे इस निर्धारित समय सारणी को ध्यान में रखकर ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं ताकि उन्हें धाम पहुंचने पर प्रवेश से वंचित न होना पड़े।
विशेष तिलक श्रृंगार और पूजा की पारंपरिक विधि
इस अस्थायी बंदी का मुख्य कारण मंदिर की एक प्राचीन धार्मिक परंपरा है। श्री श्याम मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष रवि सिंह चौहान ने इस संबंध में बताया कि पारंपरिक नियमों के अनुसार समय-समय पर बाबा श्याम का विशेष तिलक श्रृंगार और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस पवित्र प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए मंदिर के कपाट बंद रखे जाते हैं ताकि पूजा में कोई व्यवधान न आए।
इस विशिष्ट अवधि के दौरान, बाबा श्याम के मस्तक पर चंदन का विशेष लेप लगाया जाएगा और मंत्रोच्चार के साथ वैदिक पूजा संपन्न की जाएगी। इस अत्यंत गोपनीय और श्रद्धापूर्ण धार्मिक अनुष्ठान के दौरान गर्भगृह में केवल मुख्य पुजारी और अधिकृत सेवादारों को ही रहने की अनुमति होती है। इस विशेष श्रृंगार के पूरा होने के बाद ही आम जनता को प्रवेश की अनुमति दी जाती है।
मंदिर के पट दोबारा खुलने का समय
विशेष पूजा और श्रृंगार का कार्य संपन्न होने के बाद, गुरुवार, 17 सितंबर की शाम को मंदिर के द्वार फिर से खोल दिए जाएंगे। श्रद्धालु शाम को 4:30 बजे होने वाली संध्या आरती के समय से बाबा श्याम के दर्शन कर सकेंगे। मंदिर कमेटी ने सभी भक्तों से अपील की है कि वे मंदिर के बंद रहने की इस अवधि के दौरान परिसर में अनावश्यक भीड़ लगाने से बचें। इस समय का ध्यान रखने से श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होगी और वे सुगमता से दर्शन कर सकेंगे।
बाबा श्याम का पौराणिक इतिहास और महत्व
धार्मिक मान्यताओं में बाबा श्याम को "हारे का सहारा" कहा जाता है और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का ही एक रूप माना जाता है। इस आस्था की जड़ें महाभारत काल से जुड़ी हुई हैं। भीम के पोते बर्बरीक जब कौरवों की ओर से युद्ध में भाग लेने के लिए जा रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने एक ब्राह्मण का रूप धारण कर उनसे उनका शीश दान में मांग लिया।
बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के अपना शीश भगवान कृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया। इस महान त्याग और भक्ति से अत्यंत प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को एक अद्भुत वरदान दिया। उन्होंने कहा कि कलियुग में बर्बरीक को उनके स्वयं के नाम यानी 'श्याम' के रूप में पूजा जाएगा। इसके साथ ही वे दुनिया के सभी निराश और हारे हुए लोगों का संबल बनेंगे। इसी वरदान के फलस्वरूप आज देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा श्याम के दरबार में अपनी मन्नतें लेकर आते हैं और अटूट आस्था के साथ उनके दर्शन करते हैं।

















