सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर में दर्शन की योजना बना रहे भक्तों के लिए मंदिर प्रबंधन ने एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। आने वाले दिनों में बाबा श्याम का विशेष पूजन और अलौकिक तिलक श्रृंगार किया जाएगा, जिसके कारण मुख्य मंदिर के कपाट लगभग 30 घंटों तक आम श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह बंद रहेंगे। इस अवधि के दौरान मंदिर परिसर में नियमित दर्शन व्यवस्था पूरी तरह स्थगित रखी जाएगी। यदि आप भी राजस्थान के सीकर स्थित खाटूधाम की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यात्रा शुरू करने से पहले मंदिर के खुलने और बंद होने के नए समय पत्रक की पूरी जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है, ताकि यात्रा के दौरान किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।
विशेष पूजा और अलौकिक श्रृंगार की परंपरा
श्री श्याम मंदिर कमेटी के प्रतिनिधि मानवेंद्र सिंह चौहान के अनुसार, मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं के तहत समय-समय पर बाबा श्याम का विशेष तिलक और श्रृंगार आयोजित किया जाता है। यह एक अत्यंत पावन और गोपनीय धार्मिक प्रक्रिया है, जिसे पूर्ण विधि-विधान तथा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न किया जाता है। श्रृंगार सेवा के दौरान खाटू नरेश के पावन मस्तक पर विशेष रूप से तैयार किया गया चंदन का लेप अर्पित किया जाता है। इस संपूर्ण सेवा कार्य में केवल मंदिर के अधिकृत सेवादार और मुख्य पुजारी ही उपस्थित रहते हैं। प्रक्रिया की सूक्ष्मता और धार्मिक निष्ठा को ध्यान में रखते हुए इस पूरे समय में आम भक्तों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहता है।
दर्शन स्थगित रहने की समय-सारणी
मंदिर प्रबंधन द्वारा घोषित अधिकृत समय-सारणी के अनुसार, 8 सितंबर को मंगलवार की रात 10:00 बजे शयन आरती संपन्न होने के तुरंत बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके अगले दिन यानी 9 सितंबर को बुधवार के पूरे दिन कपाट पूरी तरह बंद रहेंगे और मंदिर परिसर के भीतर पुजारियों द्वारा अलौकिक श्रृंगार एवं विशेष सेवा कार्य संपादित किए जाएंगे। इसके बाद 10 सितंबर को गुरुवार की शाम 4:30 बजे संध्या आरती के पावन अवसर पर बाबा श्याम के कपाट पुनः खोले जाएंगे, जिसके पश्चात देश-विदेश से आए श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन कर सकेंगे।
श्रद्धालुओं और पदयात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
मंदिर कमेटी ने देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले पदयात्रियों, स्थानीय भक्तों और दूर-दराज से पहुंचने वाले पर्यटकों से विशेष अपील की है। समिति का कहना है कि भक्तगण मंदिर बंद रहने की इस 30 घंटे की समयावधि का ध्यान रखकर ही अपनी यात्रा का कार्यक्रम तय करें। 8 सितंबर की रात से लेकर 10 सितंबर की शाम तक खाटूधाम पहुंचने से बचें, जिससे मंदिर पहुंचने पर बिना दर्शन किए लौटने की नौबत न आए और न ही किसी प्रकार की व्यावहारिक परेशानी झेलनी पड़े।
महाभारत काल से जुड़ी बाबा श्याम की पावन कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार खाटूश्याम जी को कलयुग में भगवान श्रीकृष्ण के अवतार रूप में पूजा जाता है। महाभारत काल की कथाओं के अनुसार, भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक एक अत्यंत पराक्रमी योद्धा थे। जब वे महाभारत के युद्ध मैदान की ओर चले, तब उनका संकल्प 'हारे का सहारा' बनने का था। उनकी असीम शक्ति को देखते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने एक ब्राह्मण का रूप धारण कर उनसे उनका शीश दान में मांगा। वीर बर्बरीक ने सहर्ष अपना शीश समर्पित कर दिया। इस अनुपम बलिदान और धर्मनिष्ठा से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को वरदान दिया कि कलयुग में वे उनके अपने नाम 'श्याम' से घर-घर पूजे जाएंगे और हर दुखी व हारे हुए इंसान का सहारा बनेंगे।





















