राजस्थान के पाली शहर में प्रशासनिक दावों और कागजी विकास के बीच एक गंभीर जनसमस्या उभरकर सामने आई है। शहर के नगर निगम अंतर्गत आने वाले वार्ड 21 से लेकर वार्ड 25 तक के हजारों बाशिंदे प्रतिदिन अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष करने पर मजबूर हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि चुनाव के दौरान लंबे-चौड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि और नगर निगम के प्रशासनिक अधिकारी अब उनकी समस्याओं की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में बदहाली का माहौल व्याप्त है।
टैगोर नगर कच्ची बस्ती: जल संकट और महीनों लंबा अंधेरा
वार्ड संख्या 24 के अंतर्गत आने वाले टैगोर नगर कच्ची बस्ती, मानपुरा, कीरो की ढाणी, मरुधर नगर तथा बावरियों का बास में नागरिक सुविधाओं का ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है। कच्ची बस्ती की बुजुर्ग निवासी वालकी देवी ने बताया कि इस पूरे क्षेत्र में पीने के पानी की आपूर्ति हफ्ते में केवल एक बार, यानी हर 7-8 दिनों में महज एक बार होती है। इसके अतिरिक्त, गलियों की रोड लाइटें पिछले 4 महीनों से लगातार बंद पड़ी हुई हैं। मानपुरा भाखरी इलाके के निवासियों ने भी टूटी हुई नालियों, उफनते गंदे पानी और पूरी तरह ठप पड़ी सफाई व्यवस्था पर अपना भारी गुस्सा और आक्रोश जाहिर किया है।
केशव नगर: सीवरेज की समस्या और आवारा मवेशियों का डर
केशव नगर इलाके के लोग लंबे समय से सीवरेज की विकट समस्या का सामना कर रहे हैं। नालियों की समय पर और नियमित रूप से सफाई न होने की वजह से पूरे मोहल्ले में बदबू फैली रहती है, जिससे लोगों का सांस लेना भी दुश्वार हो गया है। स्थानीय निवासी नारायण सिंह का कहना है कि नगर निगम कार्यालय में कई बार लिखित और मौखिक गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन अधिकारियों द्वारा सीवरेज का कोई स्थाई समाधान नहीं किया गया है। इसके साथ ही, निवासी उर्मिला देवी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गलियों में खुलेआम घूम रहे आवारा मवेशियों और खूंखार कुत्तों के आतंक के कारण छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का घर से बाहर पैदल निकलना बेहद खतरनाक साबित हो रहा है।
शहीद नगर व टैगोर नगर: टूटे बिजली खंभे, कचरा और बदहाल सड़कें
वार्ड संख्या 22 यानी शहीद नगर में भी सीवरेज का पानी सड़कों पर बह रहा है और जगह-जगह कचरे का अंबार लगा हुआ है। क्षेत्र के बुजुर्ग नागरिक कस्तुरराम ने बताया कि इलाके में लंबे समय से सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त पड़ी है। इतना ही नहीं, स्थानीय रामलीला मैदान अब एक बड़े कचरा डंपिंग क्षेत्र में तब्दील हो चुका है। सड़क के किनारे खड़ा बिजली का एक टूटा हुआ खंभा कभी भी गिरकर किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकता है, जिसे हटाने की बार-बार मांग के बाद भी अनदेखा किया गया है। उधर वार्ड 23 टैगोर नगर में स्थिति बेहद खराब है। स्थानीय नागरिक अभिषेक राजपुरोहित ने बताया कि क्षेत्र की सड़कें जगह-जगह से पूरी तरह टूटकर खस्ताहाल हो चुकी हैं, जिससे वाहनों और पैदल यात्रियों का आवागमन दुष्कर हो गया है। बंद रोड लाइटों और सफाई कर्मचारियों की भारी लापरवाही के कारण पूरे इलाके में गंदगी का साम्राज्य फैला हुआ है।
हैदर कॉलोनी: क्षतिग्रस्त रपट से दुर्घटनाओं की आशंका
वार्ड 25 की हैदर कॉलोनी में मुख्य आवाजाही वाले मार्ग पर बनी रपट काफी समय से टूटी और क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़ी हुई है। स्थानीय बुजुर्ग निवासी शहिदा बानो ने बताया कि रात के समय रोड लाइटें बंद रहने के कारण अंधेरा छा जाता है, जिससे इस टूटी रपट पर हर समय गंभीर दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। नागरिकों का कहना है कि पूरे वार्ड में सफाई व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो चुकी है और नगर निगम प्रशासन में बार-बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद धरातल पर कोई सुध नहीं ली जा रही है।





















