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राजस्थान के पाली में नगर निगम की बड़ी लापरवाही, 5 वार्डों की जनता सीवरेज, अंधेरे और पानी की किल्लत से परेशानराजस्थान
2 सित॰ 2026, 5:49 am (54 मिनट पहले)· 2

राजस्थान के पाली में नगर निगम की बड़ी लापरवाही, 5 वार्डों की जनता सीवरेज, अंधेरे और पानी की किल्लत से परेशान

राजस्थान के पाली शहर के वार्ड 21 से 25 में नागरिक मूलभूत सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। सीवरेज ओवरफ्लो, 8 दिनों में एक बार पानी और महीनों से बंद रोड लाइटों को लेकर स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश है।

राजस्थान के पाली शहर में प्रशासनिक दावों और कागजी विकास के बीच एक गंभीर जनसमस्या उभरकर सामने आई है। शहर के नगर निगम अंतर्गत आने वाले वार्ड 21 से लेकर वार्ड 25 तक के हजारों बाशिंदे प्रतिदिन अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष करने पर मजबूर हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि चुनाव के दौरान लंबे-चौड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि और नगर निगम के प्रशासनिक अधिकारी अब उनकी समस्याओं की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में बदहाली का माहौल व्याप्त है।

टैगोर नगर कच्ची बस्ती: जल संकट और महीनों लंबा अंधेरा

वार्ड संख्या 24 के अंतर्गत आने वाले टैगोर नगर कच्ची बस्ती, मानपुरा, कीरो की ढाणी, मरुधर नगर तथा बावरियों का बास में नागरिक सुविधाओं का ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है। कच्ची बस्ती की बुजुर्ग निवासी वालकी देवी ने बताया कि इस पूरे क्षेत्र में पीने के पानी की आपूर्ति हफ्ते में केवल एक बार, यानी हर 7-8 दिनों में महज एक बार होती है। इसके अतिरिक्त, गलियों की रोड लाइटें पिछले 4 महीनों से लगातार बंद पड़ी हुई हैं। मानपुरा भाखरी इलाके के निवासियों ने भी टूटी हुई नालियों, उफनते गंदे पानी और पूरी तरह ठप पड़ी सफाई व्यवस्था पर अपना भारी गुस्सा और आक्रोश जाहिर किया है।

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केशव नगर: सीवरेज की समस्या और आवारा मवेशियों का डर

केशव नगर इलाके के लोग लंबे समय से सीवरेज की विकट समस्या का सामना कर रहे हैं। नालियों की समय पर और नियमित रूप से सफाई न होने की वजह से पूरे मोहल्ले में बदबू फैली रहती है, जिससे लोगों का सांस लेना भी दुश्वार हो गया है। स्थानीय निवासी नारायण सिंह का कहना है कि नगर निगम कार्यालय में कई बार लिखित और मौखिक गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन अधिकारियों द्वारा सीवरेज का कोई स्थाई समाधान नहीं किया गया है। इसके साथ ही, निवासी उर्मिला देवी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गलियों में खुलेआम घूम रहे आवारा मवेशियों और खूंखार कुत्तों के आतंक के कारण छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का घर से बाहर पैदल निकलना बेहद खतरनाक साबित हो रहा है।

शहीद नगर व टैगोर नगर: टूटे बिजली खंभे, कचरा और बदहाल सड़कें

वार्ड संख्या 22 यानी शहीद नगर में भी सीवरेज का पानी सड़कों पर बह रहा है और जगह-जगह कचरे का अंबार लगा हुआ है। क्षेत्र के बुजुर्ग नागरिक कस्तुरराम ने बताया कि इलाके में लंबे समय से सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त पड़ी है। इतना ही नहीं, स्थानीय रामलीला मैदान अब एक बड़े कचरा डंपिंग क्षेत्र में तब्दील हो चुका है। सड़क के किनारे खड़ा बिजली का एक टूटा हुआ खंभा कभी भी गिरकर किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकता है, जिसे हटाने की बार-बार मांग के बाद भी अनदेखा किया गया है। उधर वार्ड 23 टैगोर नगर में स्थिति बेहद खराब है। स्थानीय नागरिक अभिषेक राजपुरोहित ने बताया कि क्षेत्र की सड़कें जगह-जगह से पूरी तरह टूटकर खस्ताहाल हो चुकी हैं, जिससे वाहनों और पैदल यात्रियों का आवागमन दुष्कर हो गया है। बंद रोड लाइटों और सफाई कर्मचारियों की भारी लापरवाही के कारण पूरे इलाके में गंदगी का साम्राज्य फैला हुआ है।

हैदर कॉलोनी: क्षतिग्रस्त रपट से दुर्घटनाओं की आशंका

वार्ड 25 की हैदर कॉलोनी में मुख्य आवाजाही वाले मार्ग पर बनी रपट काफी समय से टूटी और क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़ी हुई है। स्थानीय बुजुर्ग निवासी शहिदा बानो ने बताया कि रात के समय रोड लाइटें बंद रहने के कारण अंधेरा छा जाता है, जिससे इस टूटी रपट पर हर समय गंभीर दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। नागरिकों का कहना है कि पूरे वार्ड में सफाई व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो चुकी है और नगर निगम प्रशासन में बार-बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद धरातल पर कोई सुध नहीं ली जा रही है।

सवाल-जवाब

पाली नगर निगम के कौन से वार्ड नागरिक सुविधाओं की समस्या से प्रभावित हैं?
पाली नगर निगम के वार्ड 21 से लेकर 25 तक (केशव नगर, शहीद नगर, टैगोर नगर, टैगोर नगर कच्ची बस्ती और हैदर कॉलोनी) मूलभूत सुविधाओं की समस्या से जूझ रहे हैं।
टैगोर नगर कच्ची बस्ती में पानी की आपूर्ति कितने दिनों में होती है?
टैगोर नगर कच्ची बस्ती में निवासियों को 7 से 8 दिनों में केवल एक बार पीने के पानी की आपूर्ति की जा रही है।
वार्ड 22 शहीद नगर में क्या प्रमुख समस्याएं देखने को मिल रही हैं?
शहीद नगर में सीवरेज ओवरफ्लो, जगह-जगह कचरे का अंबार, सड़क किनारे टूटा हुआ बिजली का खंभा और रामलीला मैदान में गंदगी की गंभीर समस्या है।
हैदर कॉलोनी में रात के समय दुर्घटनाओं की आशंका क्यों बनी रहती है?
हैदर कॉलोनी के मुख्य रास्ते की रपट क्षतिग्रस्त पड़ी है और रोड लाइटें बंद होने से रात में अंधेरा रहता है, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है।
नगर निगम प्रशासन में शिकायत दर्ज कराने के बाद क्या कार्रवाई हुई?
स्थानीय निवासियों के अनुसार नगर निगम में बार-बार गुहार लगाने के बावजूद धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है और शिकायतें अनदेखी की जा रही हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 मिनट पहले

पाली के वार्ड 21 से 25 में प्रशासनिक लापरवाही केवल नागरिक असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी बड़ा संकट खड़ी कर रही है। टूटे बिजली के खंभे और खुले में घूम रहे खूंखार कुत्ते कभी भी किसी गंभीर हादसे का कारण बन सकते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। यदि नगर निगम ने जल्द ही सीवरेज और जलापूर्ति जैसी मूलभूत समस्याओं पर कानूनी कार्रवाई करते हुए ठोस कदम नहीं उठाए, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन का रूप ले सकता है, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही तय करना अनिवार्य हो जाता है।

Rohan Verma@rohan-verma·7 मिनट पहले

पाली के इन वार्डों में पानी की आपूर्ति हर सात-आठ दिन में होना और महीनों तक स्ट्रीटलाइट्स बंद रहना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि स्थानीय निकायों में जवाबदेही और जमीनी निगरानी का पूरी तरह से अभाव है। जब सीवरेज का गंदा पानी सड़कों पर बहने लगे और बच्चों तथा बुजुर्गों के लिए आवारा मवेशी व टूटे पोल जानलेवा खतरा बन जाएं, तो यह केवल बुनियादी सुविधाओं की विफलता नहीं बल्कि प्रशासनिक उदासीनता की पराकाष्ठा है। यदि समय रहते इन वार्डों में सफाई और जलापूर्ति का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो यह स्थानीय रोष किसी बड़े जन-आंदोलन में बदल सकता है, जिससे नगर निकाय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।

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