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उदयपुर के मंडियों में छाया लाल रंग का पालक, जैविक खेती करने वाले किसानों को मिल रहे दोगुने दामराजस्थान
2 सित॰ 2026, 6:08 am (1 घंटे पहले)· 4

उदयपुर के मंडियों में छाया लाल रंग का पालक, जैविक खेती करने वाले किसानों को मिल रहे दोगुने दाम

उदयपुर की सब्जी मंडियों में इन दिनों गहरे लाल रंग का पालक ग्राहकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ग्रामीण अंचल में कभी दांडी चंदलाई के नाम से पहचाने जाने वाले इस पालक को स्थानीय किसान जैविक विधि से उगा रहे हैं और बाजार में यह हरे पालक के मुकाबले दोगुनी कीमत पर बिक रहा है।

राजस्थान के झीलों के शहर उदयपुर के स्थानीय सब्जी बाजारों में इन दिनों एक खास सब्जी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। आमतौर पर पालक का जिक्र होते ही लोगों के जेहन में हरे रंग की पत्तियों का ख्याल आता है, लेकिन इन दिनों बाजार में लाल रंग की पत्तियों वाले पालक की मांग में जबरदस्त इजाफा देखा जा रहा है। दिखावट में यह सामान्य पालक जैसा ही संरचनात्मक आकार रखता है, लेकिन इसका गहरा और चटख लाल रंग इसे बेहद अनोखा और दर्शनीय बना देता है। स्वाद और पकाने के तरीके में सामान्य हरे पालक जैसा होने के बावजूद, बाजार में इसकी बढ़ती मांग ने इसे एक प्रीमियम सब्जी का दर्जा दिला दिया है।

रंग का आकर्षण और पारंपरिक पहचान

उदयपुर की सब्जी मंडियों में आने वाले ग्राहक पहली ही नजर में इस लाल रंग की सब्जी की तरफ खिंचे चले आते हैं। इस सब्जी के इतिहास और पृष्ठभूमि पर बात करते हुए स्थानीय किसान हेमंत मीणा बताते हैं कि यह कोई बिल्कुल नई खोज या आधुनिक किस्म नहीं है। पुराने समय में राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में इसे दांडी चंदलाई के नाम से जाना जाता था और लोग इसकी पत्तियों का सेवन पारंपरिक भोजन के रूप में करते थे। हालांकि, आधुनिक समय के शहरी बाजारों में अब इसे लाल पालक के नए नाम से पहचान मिली है। इसका आकर्षक लाल रंग इसे मंडियों में रखी अन्य हरी सब्जियों से पूरी तरह अलग दिखाता है, जिसकी वजह से खरीदारी करने आए लोग इसे उत्सुकता से खरीद रहे हैं।

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जैविक खेती और बाजार में दोगुनी कीमत

क्षेत्र के स्थानीय किसान अब पारंपरिक फसलों के पारंपरिक ढर्रे से हटकर लाल पालक की खेती में विशेष रुचि दिखा रहे हैं। किसान हेमंत मीणा अपने कृषि फार्म पर पूरी तरह से ऑर्गेनिक यानी जैविक पद्धतियों का पालन करते हुए लाल पालक की पैदावार कर रहे हैं। उनके खेत से रोजाना निकलने वाली ताजा उपज की मांग बाजार में लगातार बनी हुई है। जैसे-जैसे आम लोगों को इस लाल रंग की पत्तेदार सब्जी की उपलब्धता के बारे में जानकारी मिल रही है, वैसे-वैसे इसे खरीदने वालों की कतारें लंबी होती जा रही हैं। बाजार में लाल पालक की आवक सीमित है जबकि इसकी मांग काफी अधिक है। इसी वजह से मंडियों में यह सामान्य हरे पालक की तुलना में लगभग दोगुनी कीमत पर बेचा जा रहा है। इसके बावजूद ग्राहक इसके अनोखे रंग और स्वाद के कारण अधिक मूल्य चुकाकर भी इसे खुशी-खुशी खरीद रहे हैं।

पोषण से भरपूर और चिकित्सकों की सलाह

खान-पान के जानकारों का मानना है कि लाल पालक में आयरन, विभिन्न आवश्यक विटामिन्स और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। यही कारण है कि सेहत को लेकर सतर्क रहने वाले लोग और हरी सब्जियों के शौकीन इसे अपनी दैनिक खुराक में प्राथमिकता के साथ शामिल कर रहे हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और चिकित्सकों का कहना है कि किसी भी प्रकार की चिकित्सीय समस्या या शरीर में खून की कमी होने पर केवल लाल पालक के सेवन पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसी किसी भी स्थिति में डॉक्टरी परामर्श लेना और उचित चिकित्सीय मार्गदर्शन प्राप्त करना बेहद जरूरी है।

पकाने में आसान और सर्विंग का नया अंदाज

लाल पालक को पकाने की प्रक्रिया बेहद सरल है और इसके लिए किसी विशेष विधि या अतिरिक्त तैयारी की आवश्यकता नहीं होती है। जिस तरह से रसोई घर में साधारण हरे पालक की सब्जी, सूप, भुजी या स्वादिष्ट पराठे तैयार किए जाते हैं, ठीक उसी तरह लाल पालक को भी आसानी से पकाया जा सकता है। यह सब्जी न केवल खाने में स्वादिष्ट लगती है, बल्कि परोसते समय इसका गहरा लाल रंग व्यंजन को एक बहुत ही सुंदर और नया रूप प्रदान करता है। उदयपुर के खेतों से लेकर शहर की प्रमुख सब्जी मंडियों तक, यह लाल पालक अब एक विशिष्ट और मांग वाली सब्जी के रूप में स्थापित हो चुका है।

सवाल-जवाब

उदयपुर के बाजारों में लाल पालक की कीमत कितनी है?
उदयपुर की सब्जी मंडियों में लाल पालक सामान्य हरे पालक की तुलना में लगभग दोगुनी कीमत पर बिक रहा है।
लाल पालक का पुराना या पारंपरिक नाम क्या है?
ग्रामीण इलाकों में लाल पालक को पुराने समय में दांडी चंदलाई के नाम से जाना जाता था।
उदयपुर में लाल पालक की खेती कौन से किसान कर रहे हैं?
उदयपुर क्षेत्र के किसान हेमंत मीणा अपने फार्म पर पूर्णतः जैविक तरीके से लाल पालक की खेती कर रहे हैं।
लाल पालक में कौन से मुख्य पोषक तत्व पाए जाते हैं?
लाल पालक को आयरन, विटामिन्स और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का समृद्ध स्रोत माना जाता है।
क्या खून की कमी होने पर केवल लाल पालक का सेवन काफी है?
चिकित्सकों का कहना है कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या या खून की कमी में केवल लाल पालक पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टरी सलाह लेना बेहद जरूरी है।
लाल पालक को पकाने का तरीका क्या सामान्य पालक से अलग है?
नहीं, लाल पालक को पकाने के लिए किसी विशेष विधि की जरूरत नहीं होती है और इसे सामान्य हरे पालक की तरह ही सब्जी, सूप या पराठे के रूप में पकाया जा सकता है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 मिनट पहले

उदयपुर के बाजारों में 'लाल पालक' की यह सफलता और जैविक खेती से किसानों को मिल रहे दोगुने दाम कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक बदलाव का संकेत हैं। हालांकि, अपराध और न्याय व्यवस्था की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण है कि इस प्रकार की प्रीमियम और उच्च मांग वाली कृषि उपज की बढ़ती कीमतों का बाजार में कोई कृत्रिम कालाबाजारी, मिलावट या बिचौलियों द्वारा किसानों के शोषण का नया जरिया न बने। प्रशासन और स्थानीय मंडियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जैविक उत्पादों की आड़ में उपभोक्ताओं के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी न हो और किसानों को उनकी मेहनत का पूरा और पारदर्शी लाभ मिलता रहे।

Rohan Verma@rohan-verma·35 मिनट पहले

यह सफलता दर्शाती है कि जैविक और पारंपरिक फसलों की मांग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है। हालांकि, जब भी किसी उत्पाद के दाम बढ़ते हैं, तो आपूर्ति और मांग के असंतुलन का फायदा बिचौलियों द्वारा उठाए जाने का जोखिम पैदा हो जाता है। यह बेहद जरूरी है कि कृषि विपणन समितियां और जिला प्रशासन इस बात पर कड़ी नजर रखें कि स्थानीय बाजारों में पारदर्शी मूल्य निर्धारण लागू हो और किसानों को उनकी उपज का उचित हिस्सा मिले, साथ ही उपभोक्ताओं को भी सही गुणवत्ता का उत्पाद मिले।

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