अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय शोधकर्ताओं ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। झारखंड की राजधानी स्थित बीआईटी मेसरा के शोधकर्ता नीतीश कुमार को पोलैंड में प्रतिष्ठित यंग साइंटिस्ट अवार्ड प्रदान किया गया है। उन्होंने भारत के चंद्रयान-2 मिशन से प्राप्त डेटा का विश्लेषण करके चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित क्रेटर में बर्फ की मौजूदगी पर अपना महत्वपूर्ण शोध पत्र प्रस्तुत किया था। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली सराहना से न केवल संस्थान का बल्कि पूरे देश का मान बढ़ा है।
चंद्रयान-2 के रडार डेटा से खोला चंद्रमा का रहस्य
नीतीश कुमार को यह सम्मान उनके शोध पत्र Ejecta Characterization of an Icy Crater Using Chandrayaan-2 Dual-Frequency Synthetic Aperture Radar को प्रस्तुत करने पर दिया गया है। इस वैज्ञानिक अध्ययन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में संभावित बर्फ वाले गड्ढों और उनसे बाहर निकले मलबे की सतह एवं आंतरिक भौतिक विशेषताओं का बारीकी से विश्लेषण करना था।
इस अनुसंधान कार्य में उन्नत पोलरिमेट्रिक मापदंडों और डुअल-फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर) की मदद ली गई है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जल और बर्फ के जमाव की संभावनाओं को समझने के दृष्टिकोण से यह अध्ययन बेहद अहम माना जा रहा है। उन्नत रडार रिमोट सेंसिंग तकनीकों के माध्यम से क्रेटर की सतह के मलबे की जांच करके अंतरिक्ष विज्ञान में नए आयाम स्थापित किए गए हैं।
मार्गदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर का तकनीकी सहयोग
यह शोध चंद्रयान-2 अनुसंधान कार्यक्रम के तहत पूरा किया गया है। इस परियोजना में नीतीश कुमार को बीआईटी मेसरा के प्रधान अन्वेषक डॉ. वी. एस. राठौर तथा सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. ए. पी. कृष्णा का निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। वरिष्ठ वैज्ञानिकों की देखरेख में तैयार इस शोध ने रिमोट सेंसिंग के क्षेत्र में नई संभावनाएं दिखाई हैं।
इस शोध कार्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर का तकनीकी सहयोग भी शामिल था। इटली स्थित सीएनआईटी की रास लैब के शोधकर्ता डॉ. अजीत कुमार ने भी इस अध्ययन में अपना योगदान दिया। इस तरह के वैश्विक समन्वय से ग्रहीय अन्वेषण के लिए रडार आधारित अवलोकनों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलती है।
कैमूर के छोटे से गांव से वैज्ञानिक बनने की प्रेरणादायी यात्रा
मूल रूप से बिहार राज्य के कैमूर जिले के अंतर्गत आने वाले दंडवस गांव के रहने वाले नीतीश कुमार की यह सफलता संघर्ष और लगन का परिणाम है। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले नीतीश के पिता खेती करते हैं और उनकी माता गृहिणी हैं।
बचपन से ही विज्ञान और अंतरिक्ष के प्रति उनका गहरा आकर्षण था, और वे एक दिन वैज्ञानिक बनने का सपना देखते थे। इस अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार ने उनके वर्षों पुराने सपने को साकार कर दिया है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनके गांव और परिवार में खुशी की लहर है, बल्कि देश के युवा शोधकर्ताओं को भी आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिली है।

















