लखनऊ के दर्दनाक कोचिंग हादसे और किशनगढ़ में रोडवेज बस में लगी भीषण आग के बाद राजस्थान का परिवहन महकमा हरकत में आ गया है। प्रदेश के कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी को लेकर हुई सख्ती के बाद अब सरकारी बसों की सुरक्षा व्यवस्था भी कसौटी पर है। जयपुर के सबसे बड़े बस टर्मिनल सिंधी कैंप पर रोडवेज बसों की हकीकत जांची गई, तो तस्वीर आधी अच्छी और आधी चिंताजनक निकली।
पड़ताल में साफ हुआ कि रोडवेज की सभी नई बसों में अग्निशामक यंत्र अनिवार्य रूप से लगाए गए हैं। किसी भी आपात स्थिति में आग पर काबू पाने के लिए ये पूरी तरह तैयार हैं। दिक्कत पुरानी और कंडम हो चुकी बसों में है। इन खटारा बसों में आग से निपटने का कोई इंतजाम नहीं मिला, जो यात्रियों की सुरक्षा पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
परिवहन मंत्री ने क्या कहा
परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने इस मामले पर संतोष जताते हुए कहा कि विभाग यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और ज्यादातर बसों में फायर सेफ्टी सिस्टम ठीक से काम कर रहा है। उन्होंने पुरानी बसों की कमियों को भी माना। बैरवा ने कहा, ‘जिन पुरानी बसों में फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं है, उन्हें जल्द ही रोडवेज के बेड़े से बाहर यानी कंडम घोषित कर दिया जाएगा। यात्रियों की जान के साथ कोई समझौता नहीं होगा।’
ड्राइवर और कंडक्टर को मिल रही ट्रेनिंग
सिंधी कैंप के डिपो मैनेजर राकेश राय ने बताया कि सिर्फ उपकरण लगा देना काफी नहीं है, उन्हें सही समय पर इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है। इसी वजह से रोडवेज प्रशासन समय-समय पर ड्राइवरों और कंडक्टरों को फायर सेफ्टी की खास ट्रेनिंग दे रहा है, ताकि शॉर्ट सर्किट या किसी भी अनहोनी की हालत में वे सूझबूझ से तुरंत आग पर काबू पा सकें।
अभी भी बड़ी चुनौती है यह
कई पुरानी और कंडम बसों में अग्निशामक यंत्र नहीं मिले। रोडवेज प्रशासन का दावा है कि चालकों और परिचालकों को नियमित रूप से फायर सेफ्टी, आपदा प्रबंधन और आग बुझाने का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा पक्की रहे। परिवहन मंत्री ने मौजूदा व्यवस्था पर भले ही संतोष जताया हो, लेकिन पुरानी बसों में सुरक्षा उपकरणों की कमी दूर करना अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। कोचिंग हादसों से सबक लेते हुए बसों की यह जांच वक्त की जरूरत है।













